Ranjeet Bhartiya 03/10/2019
माता रानी ये वरदान देना,बस थोड़ा सा प्यार देना,आपकी चरणों में बीते जीवन सारा ऐसा आशीर्वाद देना। आप सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं। नव दुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री देवी का है। ये माता पार्वती का ही एक रूप हैं हिमालयराज की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री भी कहा जाता है। नवरात्रि के पहले दिन मां के शैलपुत्री रूप का पूजन होता है. Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 03/10/2019 by Sarvan Kumar

महोबा भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित एक जिला है. उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी भाग में आने वाला यह जिला चित्रकूट प्रमंडल के अंतर्गत आता है. महोबा शहर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है. बुंदेलखंड के सबसे पूरब में स्थित यह जिला अपने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पुरातन परंपरा, प्रसिद्ध योद्धा अल्हा और उदल की वीरता, परिहार शैली में निर्मित 9वीं शताब्दी की ग्रेनाइट सूर्य मंदिर, पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थलों जैसे खजुराहो, कालिंजर, झांसी ओरछा, कुलपहाड़ और लवकुशनगर से निकटता के लिए प्रसिद्ध है. यह जिला बुंदेलखंड की संस्कृति, कला, लोक नृत्य और लोक गान के के कारण यह पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण है.महोबा जिले में कितने तहसील है? कितनी जनसंख्या है? आईये जानते हैं महोबा जिले की पूरी जानकारी।

नामकरण

जिले का नाम इसके मुख्यालय शहर ‘महोबा’ पर रखा गया है. ऐसी मान्यता है कि अति प्राचीन काल से यह नगर अस्तित्व में है. अलग- अलग समय पर इसके अलग-अलग नाम थे. त्रेता युग में इसका नाम केकपुर था जबकि द्वापर युग में यह पाटनपुर के नाम से जाना जाता था. जिले के वर्तमान नाम की उत्पत्ति के बारे में मान्यता है कि पहले इस स्थान पर चंदेल राजा महोत्सव किया करते थे, जिसके कारण इस स्थान का नाम महोत्सव नगर था, जो कालांतर में महोबा हो गया.

महोबा जिला कब बना

एक स्वतंत्र जिले के रूप में अस्तित्व में आने से पहले महोबा हमीरपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था. 9 फरवरी 1995 को हमीरपुर जिले के दक्षिणी भाग को अलग करके इसे एक स्वतंत्र जिला बनाया गया.

महोबा जिले की भौगोलिक स्थिति

बाउंड्री (चौहद्दी)

महोबा जिले की सीमा मध्य प्रदेश से लगती है. यह जिला 5 जिलों से घिरा हुआ है.
उत्तर में-हमीरपुर जिला
दक्षिण में-मध्यप्रदेश का छतरपुर जिला
पूरब में-बांदा जिला और हमीरपुर जिला
पश्चिम में-झांसी जिला और मध्य प्रदेश का टीकमगढ़ जिला
समुद्र तल से ऊंचाई
महोबा शहर समुद्र तल से लगभग 214 मीटर (702 फीट) की औसत ऊंचाई पर स्थित है.

महोबा जिले की मैप
                                    महोबा जिले की मैप

क्षेत्रफल
महोबा जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 3144 वर्ग किलोमीटर है.

प्रमुख नदियां:
जिले की प्रमुख नदियां है: धसान, उर्मिल, बिरमा, चंद्रावल और अर्जुन.

अर्थव्यवस्था-कृषि, उद्योग और उत्पाद

महोबा जिले की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन, वन, उद्योग और व्यवसाय पर आधारित है.

कृषि

महोबा जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है. जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फसल हैं: ज्वार, बाजरा, धान, बार्ली, दलहन (मटर, अरहर और मसूर), सरसों, गन्ना, तंबाकू और सब्जियां.
महोबा जिला पान के पत्तों की खेती के लिए प्रसिद्ध है.

पशुपालन

ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन जिले के लोगों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण जरिया है. जिले के प्रमुख पशु धन हैं: गाय, बैल, भैंस, सूअर, बकरी और पोल्ट्री.

मछली पालन
जिले के नदियों और जलाशयों से मछली का उत्पादन किया जाता है.

वन

जिले में पाए जाने वाले प्रमुख वन संपदा हैं: तेंदू, महुआ, सेमल, ढाक और खैर.

खनिज

जिले में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज हैं: जिप्सम पत्थर, पायरोफाईलाइट, डाई स्पोर, पत्थर, गिट्टी, ग्रेनाइट और मुरम.

उद्योग

औद्योगिकरण की दृष्टि से महोबा एक पिछड़ा हुआ जिला है. जिले में कृषि आधारित छोटे-मोटे उद्योग स्थित हैं. जिले की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान है.

व्यवसाय

जिले में कृषि उत्पादों, वन उत्पादों और पत्थर से बनी कलाकृतियों की खरीद बिक्री होती है.

प्रशासनिक सेटअप

प्रमंडल: चित्रकूट
प्रशासनिक सहूलियत के लिए महोबा जिले को 3 तहसीलों (अनुमंडल) और 4 विकासखंडो (प्रखंड/ ब्लॉक) में बांटा गया है.

तहसील (अनुमंडल):

महोबा जिले को कुल 3 तहसीलों में बांटा गया है: महोबा चरखारी और कुलपहाड़.

विकासखंड (प्रखंड):
महोबा जिले को कुल 4 विकासखंडों (प्रखंडों) में बांटा गया है-कबरई, चरखारी, पनवाड़ी और जैतपुर.

पुलिस थानों की संख्या: 10
नगर पालिका परिषदों की संख्या: 2
नगर पंचायतों की संख्या: 3
ग्राम पंचायतों की संख्या: 247
गांवों की संख्या: 521

निर्वाचन क्षेत्र
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र: 1, हमीरपुर

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र: 2
महोबा जिले के अंतर्गत कुल 2 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं: महोबा और चरखारी.

महोबा जिले की डेमोग्राफीक्स (जनसांख्यिकी)

2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, महोबा
जिले की जनसांख्यिकी इस प्रकार है-
कुल जनसंख्या: 8.76 लाख
पुरुष: 4.66 लाख
महिला: 4.09 लाख

जनसंख्या वृद्धि (दशकीय): 23.64%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर): 279
उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में अनुपात: 0.44%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष): 878

औसत साक्षरता: 65.27%
पुरुष साक्षरता: 75.83%
महिला साक्षरता: 53.22%

शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या: 21.16%
ग्रामीण जनसंख्या: 78.84%

धार्मिक जनसंख्या

2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, महोबा एक हिंदू बहुसंख्यक जिला है. जिले में हिंदुओं की जनसंख्या 93.06% है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 6.56% है.अन्य धर्मों की बात करें तो जिले में ईसाई 0.11%, सिख 0.04%, बौद्ध 0.01%, जैन 0.03% और अन्य 0.02% हैं.

भाषाएं
जिले में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं हैं: हिंदी, बुंदेली और उर्दू.

महोबा पर्यटन स्थल

इस जिले में पौराणिक, धार्मिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कई दर्शनीय स्थल हैं. जिले में स्थित प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में संक्षिप्त विवरण:

जैन तीर्थंकर

जैन धर्मावलंबियों के लिए पवित्र यह तीर्थ स्थल बड़ी चंद्रिका मंदिर के पीछे छोटी पहाड़ी पर स्थित है. यहां पहाड़ की कंदरा में जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं उत्कीर्ण हैं.

मां बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर

यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ महोबा से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर राजकीय वीरभूमि महाविद्यालय के सामने स्थित है. इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के शासक कीर्ति चंद्र वर्मन ने 831 में करवाया था.

शिव तांडव मंदिर महोबा

भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन मंदिर गोरखगिरी पर्वत के नजदीक स्थित है. इस मंदिर का मुख्य आकर्षण ग्रेनाइट पत्थर की बनी तांडव नृत्य करते हुए भगवान शिव की 10 भुजाओं वाली विशाल दुर्लभ प्रतिमा है. इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के शासक नान्नुक ने 11वीं सदी में करवाया था.

सूर्य मंदिर

भगवान सूर्य को समर्पित यह प्राचीन मंदिर महोबा से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर राहिला सागर के पश्चिम में स्थित है. अपने खूबसूरत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के शासक राहिल देव बर्मन ने 9वीं सदी (890-910 AD) करवाया था.

गोरखगिरी पर्वत

इस मनोरम स्थल का धार्मिक और पौराणिक महत्व है. यह सुंदर पर्वत जिले का एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट भी है. ऐसी मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने कुछ दिनों तक यहां समय बिताया था. नाथ संप्रदाय के संस्थापक गुरु गोरखनाथ ने अपने शिष्य के साथ यहां पर तपस्या किया था. इस पर्वत पर अनोखी शिलायें विद्यमान है जिस पर शेर, कछुआ, शेषनाग, नृत्य करते हुए महिला, साधु और भगवान शिव की आकृति बनी हुई है.

महोबा कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग

महोबा जिले का अपना हवाई अड्डा नहीं है. यहां के लिए डायरेक्ट हवाई सेवा उपलब्ध नहीं हैं. निकटतम हवाई अड्डा: खजुराहो एयरपोर्ट (Code: HJR). यह हवाई अड्डा बांदा से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर मध्यप्रदेश के खजुराहो में स्थित है. दूसरा नजदीकी हवाई अड्डा: कानपुर एयरपोर्ट (Code: KNU).
यह हवाई अड्डा बांदा से लगभग 151 किलोमीटर की दूरी पर कानपुर में स्थित है.

रेल मार्ग

महोबा रेल मार्ग से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तथा देश के विभिन्न हिस्सों से अच्छे से जुड़ा हुआ है. निकटतम रेलवे स्टेशन: महोबा जंक्शन रेलवे स्टेशन (Code: MBA).

सड़क मार्ग

महोबा सड़कों के नेटवर्क के माध्यम से उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से अच्छे से जुड़ा हुआ है. यहां के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध है. आप यहां अपने निजी वाहन कार या बाइक से भी आ सकते हैं.  नेशनल हाईवे 76 (NH 76) और नेशनल हाईवे 86 (NH 86) जिले से होकर गुजरती है.

महोबा जिले की कुछ रोचक बातें:

2011 के जनगणना के अनुसार,
1. जनसंख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में 71वां स्थान है.
2. लिंगानुपात के मामले में उत्तर प्रदेश में 53वां स्थान है.
3. साक्षरता के मामले में उत्तर प्रदेश में 48वां स्थान है.
4. सबसे ज्यादा बसे गांव वाला तहसील: कुलपहाड़ (227).
5. सबसे कम बसे गांव वाला तहसील: चरखारी (83)
6. जिले में कुल निर्जन गांवों की संख्या: 86.

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