Sarvan Kumar 27/02/2019
जाट गायक सिद्धू मूसेवाला आज हमारे बीच नहीं है पर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा बनी रहेगी। अपने गानों के माध्यम से वह अमर हो गए हैं । सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को मानसा जिले में उनके घर से कुछ किलोमीटर दूर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या किसने और किस वजह से की यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन हमने जाट समाज का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके फैंस पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। jankaritoday.com की टीम के तरफ से उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि! Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 06/09/2020 by Sarvan Kumar

मुंगेर जिला भारत के बिहार राज्य में स्थित  है. दक्षिणी बिहार में आने वाला यह जिला मुंगेर प्रमंडल का मुख्यालय है. मुंगेर प्रमंडल के अंतर्गत 6 जिले आते हैं- मुंगेर , जमुई , खगड़िया लखीसराय, बेगूसराय और शेखपुरा.मुंगेर को योग की नगरी कहा जाता है. जिले में स्थित योग विश्वविद्यालय दुनिया के श्रेष्ठ योग संस्थानों में से एक हैं. ऐसी मान्यता है की माता सीता ने इसी जगह पर अग्नि परीक्षा देकर अपनी पवित्रता सिद्ध की थी? मुंगेर जिला की जनसंख्या कितनी है ?कितनेेे ब्लॉक हैं ? मुंगेर की पूरी जानकारी.

गठन

मुंगेर पहले एक बहुत बड़ा जिला हुआ करता था. मुंगेर जिले का वर्तमान स्वरूप 5 बार हुए विभाजन का परिणाम है.मुंगेर जिले को विभाजित करके 5 नये जिले बनाए गए: बेगूसराय (1976), खगड़िया (1988) , जमुई (1991) लखीसराय तथा शेखपुरा (1994).

बाउंड्री (चौहद्दी)
उत्तर में – खगड़िया और बेगूसराय जिला
दक्षिण में – बांका और जमुई जिला
पूर्व में – भागलपुर, खगड़िया और बांका जिला
पश्चिम में – लखीसराय और जमुई जिला

मुंगेर जिला की भौगोलिक स्थिति

क्षेत्रफल
मुंगेर जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1419.7 वर्ग किलोमीटर है.

प्रमुख नदियां :
गंगा, मोहना ,हरोहर और किऊल

अर्थव्यवस्था :कृषि, उद्योग और उत्पाद

मुंगेर जिले की अर्थव्यवस्था कृषि, खनन और उद्योग पर आधारित है.
कृषि
मुंगेर जिले में उगाये जाने वाले प्रमुख फसल हैं- चावल, मक्का, गेहूं, चना, जौ, पलवल, आम,दलहन और तिलहन

उद्योग

1.भारतीय रेलवे, जमालपुर में एशिया की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी रेलवे कार्यशाला  संचालित करती है. इस कार्यशाला की स्थापना सन 1862 में अंग्रेजों ने किया था.

2 मुंगेर में गन फैक्ट्री और आईटीसी मिल्क डेयरी है.

3.मुंगेर जिले में भारत के विशालतम सिगरेट कारखानों में से एक स्थित है.

4.जिले में अभ्रक, स्लेट और चूना पत्थर का खनन होता है.

 

मुंगेर जिला का  प्रशासनिक सेटअप

मुंगेर जिला के वर्तमान पदाधिकारी

प्रमंडल: मुंगेर
अनुमंडल: मुंगेर जिले को 3 अनुमंडलों में बांटा गया है-मुंगेर सदर, हवेली खड़गपुर और तारापुर.

प्रखंड: मुंगेर जिले को 9 प्रखंडों में बांटा गया है.
मुंगेर सदर अनुमंडल में कुल 4 प्रखंड है: मुंगेर सदर, जमालपुर, बख्तियारपुर और धरहरा.
हवेली खड़गपुर अनुमंडल में कुल 2 प्रखंड हैं: खड़गपुर और टेटिया बंबर
तारापुर अनुमंडल में कुल 3 प्रखंड हैं: तारापुर , असरगंज और संग्रामपुर

पुलिस थानों की संख्या : 19

नगर निगम की संख्या : 1,नगर परिषद की संख्या : 1
नगर पंचायत की संख्या : 1.

ग्राम पंचायतों की संख्या :101
गांवों की संख्या : 923

निर्वाचन क्षेत्र
लोकसभा
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की संख्या: 1 , मुंगेर
विधानसभा
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या: 3 , तारापुर ,मुंगेर और जमालपुर

मुंगेर जिला की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी)

2011 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार,
कुल जनसंख्या : 13.68 लाख
पुरुष :7.29 लाख
महिला: 6.38 लाख

जनसंख्या वृद्धि (दशाकीय): 20.21%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर): 964
बिहार की जनसंख्या में अनुपात: 1.31%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष) : 876

औसत साक्षरता: 70.46%
पुरुष साक्षरता : 77.74%
महिला साक्षरता: 62.08%

शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या: 27.79%
ग्रामीण जनसंख्या: 72.21%

धर्म

अधिकारिक जनगणना 2011 के अनुसार, मुंगेर हिंदू बहुसंख्यक जिला है. जिले में हिंदुओं की जनसंख्या 91.56% , जबकि मुस्लिमों की आबादी 8.07% है.अन्य धर्म की बात करें तो यहां ईसाई 0.13%, सिख 0.02% , बौद्ध 0.01% और जैन 0.01% हैं.

मुंगेर जिला के पर्यटन स्थल

चंडी स्थान
मुंगेर जिले में स्थित चंडी स्थान शक्तिपीठों में से एक है. यह मुंगेर जिला मुख्यालय से 4 किलोमीटर की दूरी पर पूर्वोत्तर कोने में स्थित है. ऐसी मान्यता है कि इस स्थल पर माता सती की बाई आंख गिरी थी. लोगों का मानना है कि यहां पर माता की पूजा करने से और यहां से काजल ले जाने से नेत्र संबंधित रोग दूर होते हैं.

मनपत्थर (सीता चरण)
यह स्थान कष्टहरणी घाट के नजदीक, किले से लगभग 2 मील दूरी पर स्थित है. सीता चरण नदी के बिस्तर में एक चट्टान है जिस पर दो चरणों के निशान हैं. ऐसी मान्यता है कि ये माता सीता के चरण हैं. यह पत्थर 250 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा है. इस स्थान पर एक छोटा सा मंदिर भी है.

कष्टहरणी घाट
कष्टहरणी घाट का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में मिलता है. ऐसी मान्यता है कि राक्षसी ताड़का का वध करने के बाद भगवान श्री राम और लक्ष्मण कुछ समय तक यहां रुके थे .इस घाट को लेकर एक और मान्यता है. कहा जाता है जब भगवान राम, माता सीता के साथ विवाह के बाद मिथिला से अयोध्या वापस लौट रहे थे तो उन्होंने थकान दूर करने के लिए यहां पर स्नान किया था. ऐसी मान्यता है कि इस घाट पर स्नान करने के बाद सारे दर्द दूर हो जाते हैं और मन ,मस्तिष्क ,शरीर तथा आत्मा को शांति मिलती है.

सीता कुंड

सीता कुंड गर्म पानी का झरना है जो मुंगेर शहर से 4 मील दूर पूर्व में स्थित है. ऐसी मान्यता है की माता सीता ने इसी जगह पर अग्नि परीक्षा देकर अपनी पवित्रता सिद्ध की थी. अग्नि परीक्षा के बाद प्रज्वलित अग्नि गर्म जल में परिवर्तित हो गई. यही कारण है कि सीता कुंड का जल हमेशा गर्म रहता है.सीता कुंड के सामने ठंडे पानी का झरना है जिसे रामकुंड कहा जाता है. इसके पश्चिम में तीन जलाशय हैं जिन्हें लक्ष्मण कुंड, भरतकुंड और शत्रुघनकुंड कहा जाता है.

ऋषिकुंड

ऋषि कुंड खड़गपुर की पहाड़ियों पर स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. यह मुंगेर से 23 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण पूर्व में लावागढ़ी- पाटम पथ के समीप स्थित है.इस स्‍थान का नाम प्रसिद्ध ऋषि श्रृंग के नाम पर रखा गया है. यहां स्थित गर्म झरना पर्यटकों के बीच मुख्य आकर्षण बना रहता है. सर्दी के मौसम में इस झरने का पानी थोड़ा गर्म रहता है जिस में स्नान करने के लिए दूरदराज से पर्यटक आते हैं. यहां पर एक कुंड स्थित है जिसे लोग ऋषि कुंड के नाम से जानते हैं. इसके बारे में कहा जाता है कि व्यक्ति चाहे लंबा हो या छोटा पानी उसके कमर के आसपास तक रहता है. यहां भगवान शिव को समर्पित एक बहुत ही अति प्राचीन मंदिर है जो भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है.

गोयनका शिवालय मछली तालाब
यहां का एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है. इसकी गिनती यहां के एक प्राचीन और सबसे अधिक प्रसिद्ध हिंदू पवित्र तीर्थ स्थलों में की जाती है. मंदिर को, पानी के विशाल टंकी के बीच बनाया गया है, जो मछलियों से भरा हुआ है. सावन के महीने और शिवरात्रि के अवसर पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं.

पीर शाह नूफा मकबरा
पीर शाह नोखा का गुंबद मीर कासिम के किले  के दक्षिणी द्वार के सामने एक टीले पर स्थित है. यह स्थान हिंदू और मुस्लिम दोनों संप्रदायों के लिए एक पवित्र पूजनीय स्थल है.

मीर कासिम का किला
बंगाल के अंतिम नवाब मीर कासिम का यह किला  मुंगेर जिले का ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है. यह किला गंगा नदी के किनारे बना हुआ है. किले में स्थित गुप्त सुरंग पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है.

मीर कासिम द्वारा बनाई गई गुफा

आपात स्थिति से निपटने के लिए मीर कासिम ने रहस्यमयी सुरंगों का निर्माण करवाया था. किले से निकले इन सुरंगो का दूसरा छोर कहां है यह आज तक किसी को पता नहीं लग सका. हालांकि इसके बारे में कई अटकलें लगाई गई है. कहां जाता है कि मुंगेर मुफस्सिल क्षेत्र स्थित पीर नाफा शाह के मजार के पास सुरंग का दूसरा छोर है.

शाह शुजा का महल
शाह शुजा का महल मुंगेर के खूबसूरत स्थानों में से एक है. अब इसे एक जेल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है.

 मुंगेर कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग
मुंगेर में कोई हवाई अड्डा नहीं है.निकटतम हवाई अड्डा: जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट (Code: PAT) मुंगेर जिले से लगभग 180 किलोमीटर दूर पटना में स्थित है.

रेल मार्ग
रेल मार्ग से आप आसानी से मुंगेर आ सकते हैं . देश के अन्य प्रमुख शहरों से मुंगेर के लिए नियमित ट्रेन चलती है. ट्रेन से, पटना जंक्शन से जमालपुर जंक्शन जाने में लगभग 4 घंटे का समय लगता है.
नजदीकी रेलवे स्टेशन: जमालपुर जंक्शन

सड़क मार्ग
मुंगेर, राज्य और देश के प्रमुख नगरों से सड़क मार्ग से अच्छे से जुड़ा हुआ है. यहां के लिए नियमित बसे चलती हैं. बस से आप 4.30 घंटे में पटना से मुंगेर पहुंच सकते हैं.आप चाहे तो अपने निजी वाहन कार या बाइक से 3:30 घंटे में मुंगेर पहुंच सकते हैं.

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