Sarvan Kumar 10/11/2019
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Last Updated on 10/11/2019 by Sarvan Kumar

अयोध्या में बनेगा राम मंदिर। 9 नवंबर 2019 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया।  वर्षों से लटकी पड़ी अयोध्या बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मुद्दे को हल कर लिया गया। 40 दिन तक लगातार सुनवाई के बाद पांच जजों की खंडपीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद अयोध्या में बाबरी मस्जिद के जगह पर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ हो गया है। आइए जानते हैं फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या क्या कहा।

राम मंदिर- बाबरी मस्जिद फैसले की कुछ मुख्य बातें

9 नवंबर सुबह 10:30 बजे लोगों की धड़कन रुकी हुई थी कि अदालत अपना क्या फैसला सुनाती है। मुस्लिम और हिंदू पक्षों के साथ पूरे देश की जनता इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद इस नतीजे पर आई की विवादित बाबरी मस्जिद ढांचे के नीचे ही राम भगवान का जन्म स्थल है, लिहाजा उसी पर मंदिर बनाई जानी चाहिए। आइए देखते हैं राम मंदिर बाबरी मस्जिद फैसले की कुछ मुख्य बातें।

विवादित भूमि को सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट को दी जाएगी

कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा और और सुन्नी वक्फ बोर्ड दोनों को मालिकाना हक से बेदखल कर दिया। विवादित भूमि पूरी तरह से सरकार को दे दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सरकार 3 महीना के भीतर एक स्कीम के तहत ट्रस्ट बनाएं और वहां पर रामलला के लिए मंदिर बनाएं।

सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाएगी मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में यह भी कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ की जमीन अयोध्या में ही दी जाएगी और यह स्थान कहां होगा इसका निर्णय केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर करेगी.

कानून का उल्लंघन था बाबरी मस्जिद गिराना

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि 1993 में बाबरी मस्जिद को गिराना कानून का उल्लंघन था।

खाली जमीन पर नहीं बनी थी मस्जिद

कोर्ट ने यह साफ करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जगह पर नहीं हुआ था। मस्जिद के नीचे पहले से कोई ढांचा था हालांकि कोर्ट का कहना था कि एएसआई ने यह सबूत नहीं दे पाए कि वह वह ढांचा राम मंदिर ही था.

 1949 में रखे गए थे राम लला की प्रतिमा

22 दिसंबर 1949 को बाबरी मस्जिद गुंबद के नीचे राम लला  की प्रतिमा रख दी गई थी। यह भी अफवाह फैलाई गई कि राम लला अपने आप प्रकट हुए हैं। कोर्ट ने इसे अपवित्र काम की संज्ञा दी.

विवादित जमीन के बाहरी हिस्से में हिंदू पूजा-अर्चना करते थे

विवादित जमीन पर दो हिस्सा हुआ करते थे-आंतरिक और बाहरी हिस्सा। आंतरिक हिस्से में मुस्लिम नमाज अदा किया करते थे, जबकि बाहरी हिस्से में हिंदू पूजा अर्चना किया करते थे।

मुस्लिमों ने मस्जिद का परित्याग नहीं किया था

हिंदू पक्ष का यह दलील था कि मुस्लिमों ने मस्जिद का परित्याग कर दिया था और वे वहां नमाज अदा नहीं किया करते थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा की मुस्लिम वहां नमाज अदा करते रहे थे।

अयोध्या वर्डिक्ट के 5 जजों के नाम

अयोध्या फैसले को हल करने के लिए 5 जजों की बेंच में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर हैं।

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