Sarvan Kumar 04/02/2019

वैशाली भारत के बिहार राज्य में स्थित एक जिला है.उत्तरी बिहार में आने वाले वैशाली जिले का गठन 12 अक्टूबर 1972 को हुआ. इससे पहले यह मुजफ्फरपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था.वैशाली का नामांकन महाभारत काल के इक्ष्वाकु वंश के राजा विशाल के नाम पर हुआ है.वैशाली जिला में कितने ब्लॉक है? कितनी जनसंख्या है? आईए जानते हैं वैशाली जिले की पूरी जानकारी.

वैशाली जिले की भौगोलिक स्थिति

क्षेत्रफल– वैशाली का भौगोलिक क्षेत्रफल 2036 वर्ग किलोमीटर है.

बाउंड्री (चौहद्दी)
उत्तर में-मुजफ्फरपुर
दक्षिण में- पटना
पूर्व मेंसमस्तीपुर
पश्चिम में- सारण

प्रमुख नदियां

गंगा और गंडक

अर्थव्यवस्था : कृषि और उत्पाद

वैशाली एक कृषि प्रधान जिला है. यहां केला, धान, गेहूं मक्का और दलहन की खेती की जाती है.

प्रशासनिक सेटअप

मुख्यालय: हाजीपुर
डिवीजन (प्रमंडल) : वैशाली जिला तिरहुत प्रमंडल का हिस्सा है.
अनुमंडल :  जिले को तीन अनुमंडल में बांटा गया है: हाजीपुर, महनार और महुआ

वैशाली जिला में कितने ब्लॉक है?

वैशाली जिले में कुल 16 ब्लॉक हैं.
हाजीपुर अनुमंडल में 7 ब्लॉक हैं: हाजीपुर, राघोपुर, बीदुपुर, लालगंज, वैशाली, भगवानपुर, पटेढ़ी और बेसलर

महनार अनुमंडल में 3 ब्लॉक हैं :देसरी, सहदेई बुजुर्ग और महनार
महुआ अनुमंडल में 6 ब्लॉक हैं: महुआ, राजापाकर, गोरौल, जन्दाहा, पातेपुर और चेहराकला

शहरों की संख्या :
हाजीपुर (नगर परिषद), माहार बाजार (नगर पंचायत) और लालगंज (नगर पंचायत).
ग्राम पंचायतों की संख्या: 290
गांव की संख्या: 1569
इनमें से 1422 गांव बसे हुए हैं जबकि 147 गांव निर्जन है.

वैशाली जिले की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी)

2011 की जनगणना के अनुसार
कुल जनसंख्या: 34.95 लाख
पुरुष: 18. 47 लाख
महिला: 16.48 लाख
जनसंख्या वृद्धि (दशकीय): 28.57%
जनसंख्या घनत्व : 1717 प्रति वर्ग किलोमीटर
बिहार की जनसंख्या में अनुपात: 3.36%
ग्रामीण जनसंख्या : 93.35%
शहरी जनसंख्या : 6.65%
लिंगानुपात (प्रति 1000 पुरुषों में महिलाएं): 895

औसत साक्षरता : 68.6%
पुरुष साक्षरता: 77%
महिला साक्षरता: 59.1%

धर्म
2011 की जनगणना के अनुसार
वैशाली जिले के 90. 20% लोग हिंदू धर्म को मानने वाले हैं जबकि 9.56% इस्लाम के अनुयाई हैं.जिले में अन्य धर्मों को मानने वाले इस प्रकार हैं: ईसाई (0.06%), सिख (0.02%), बौद्ध (0.01%), जैन (0.01%) और अन्य (0.15%).

वैशाली जिले की पर्यटन स्थल

अशोक स्तंभ

सम्राट अशोक ने वैशाली में भगवान महात्मा बुध के अंतिम उपदेश की याद में नगर के समीप एक स्तंभ स्थापित किया था. यह स्तंभ लाल बलुआ पत्थर का एक बेहद पॉलिश्ड एकल टुकड़े से बना हुआ है .इसकी ऊंचाई 18.3 मीटर है. स्तंभ के ऊपर घंटी के आकार की बनावट है. यहां पर मुख्य परिसर से लगभग 3 किलोमीटर दूर कोल्हुआ यानी बखरा गांव में हुई खुदाई के बाद मिले पुरातत्व अवशेषों को सहेज कर रखा गया है.

बौद्ध स्तूप

इसका निर्माण दूसरे बौद्ध परिषद की याद में किया गया था. यह स्तूप बुध के पार्थिव अवशेषों पर बने 8 मौलिक स्तूपों में से एक है. मूलत: यह पांचवी सदी ईसा पूर्व में निर्मित 8.07 मीटर व्यास वाला मिट्टी का छोटा सा स्तूप था. मौर्य, शुंग, सॉन्ग और कुषाण शासनकाल में पक्की ईंटों से आच्छादित करके चार चरणों में इसका निर्माण किया गया जिससे स्तूप का व्यास बढ़कर 12 मीटर हो गया.

अभिषेक पुष्करणी

यह प्राचीन वैशाली गणराज्य द्वारा बनवाया गया पवित्र सरोवर है. ऐसा माना जाता है जब कोई वैशाली गणराज्य का शासक निर्वाचित होता था तो उनको इसी पवित्र सरोवर पर अभिषेक करवाया जाता था .

विश्व शांति स्तूप

अभिषेक पुष्कर्णी के नजदीक ही जापान के निप्पोनजी बौद्ध समुदाय द्वारा निर्माण कराया गया विश्व शांति स्तूप स्थित है. इस शांति स्तूप के चारों ओर महात्मा बुध की अलग अलग मुद्राओं में मूर्तियां हैं.

भारत के प्राचीनतम लोकतांत्रिक व्यवस्था वैशाली

राजा विशाल का गढ

राजा विशाल का घर एक छोटा सा किला है. इसकी परिधि 1 किलोमीटर है इसके चारों तरफ 2 मीटर ऊंचे दीवार हैं और जिसके चारों तरफ 43 मीटर चोरी खाई है. माना जाता है कि यह स्थान प्राचीनतम संसद है इस संसद में 7777 संघीय सदस्य इकट्ठा होकर समस्याओं पर चर्चा करते थे. यह आज पर्यटकों को भारत के प्राचीनतम लोकतांत्रिक व्यवस्था की याद दिलाता है.

कुंडलपुर

वैशाली को भगवान महावीर के जन्म स्थली होने का गौरव प्राप्त है. जैन धर्म मानने वालों का एक सबसे पवित्र और लोकप्रिय स्थल है. यहीं पर 599 ईसा पूर्व जैन धर्म के भगवान महावीर का जन्म हुआ था.

सोनपुर मेला

हाजीपुर से 35 किलोमीटर दूर, गंगा और गंडक नदी के संगम पर स्थित सोनपुर में, कार्तिक पूर्णिमा दिवस (अक्टूबर- नवंबर) के महीने में एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है.

Leave a Reply