Ranjeet Bhartiya 13/02/2019

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Last Updated on 06/09/2020 by Sarvan Kumar

सहरसा भारत के बिहार राज्य में स्थित एक जिला है. उत्तरी बिहार में आने वाला यह जिला कोसी प्रमंडल के अंतर्गत आता है. कोसी प्रमंडल के अंतर्गत 3 जिले आते हैं- सहरसा, मधेपुरा और सुपौल. सहरसा कोसी प्रमंडल का मुख्यालय है.सहरसा जिला में कितना पंचायत है? कितने ब्लाक हैं? सहरसा जिले की पूरी जानकारी

नामकरण और गठन

सहरसा नाम संस्कृत के शब्द स+हर्षा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है ‘हर्ष से भरा हुआ’.पहले सहरसा जिला मुंगेर और भागलपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था. 1 अप्रैल 1954 को इसे एक स्वतंत्र जिला बनाया गया.

सहरसा जिले की भौगोलिक स्थिति

बाउंड्री (चौहद्दी)
उत्तर में-मधुबनी और सुपौल जिला
दक्षिण में- खगरिया जिला
पूर्व में – मधेपुरा जिला
पश्चिम में- दरभंगा और समस्तीपुर जिला

क्षेत्रफल
सहरसा जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1687 वर्ग किलोमीटर है.

प्रमुख नदियां :
कोशी , धेमरा, कोशी की सहायक नदियां, बागमती और गंडक नदी.

अर्थव्यवस्था- कृषि और उत्पाद

कृषि : सहरसा जिले में उगाये जाने वाले प्रमुख फसल हैं- मखाना, धान, आम, लीची, बांस, सरसों, मकई, गेहूं और ईख. यहां पर सागवान के पेड़ भी वृहद पैमाने पर उगाये जाते हैं.

उद्योग
ईट निर्माण सहरसा जिले का महत्वपूर्ण उद्योग है. पूरे कोसी क्षेत्र में इसे ईट उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है.

अन्य उद्योग-जिले के लोगों को रोजगार प्रदान करने वाले अन्य उद्योगों की बात करें तो यहां पर जुट ,साबुन, चॉकलेट और बिस्किट ,पेपर निर्माण के कारखाने और प्रिंटिंग का काम होता है.लोग खुद का व्यवसाय भी स्थापित कर रहे हैंं . जिले की अर्थव्यवस्था में दुकानदारों और व्यवसायियों का बड़ा योगदान है.एक अच्छे साक्षरता दर के कारण यहां के युवा सरकारी और कॉर्पोरेट सेक्टर के नौकरियों में भी जा रहे हैं.

प्रशासनिक सेटअप

प्रमंडल: कोसी
अनुमंडल: सहरसा जिले के अंतर्गत दो अनुमंडल आते हैं-सहरसा सदर और सिमरी बख्तियारपुर.
प्रखंड
सहरसा जिले को 10 प्रखंडों में बांटा गया है.

सहरसा सदर अनुमंडल में कुल 7 प्रखंड है: कहरा, सत्तर कटैया, नौहट्टा, महिषी, सोनबरसा, सौर बाजार और पतरघट.

सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल में कुल 3 प्रखंड आते हैं: सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ और बनमा इटहरी.

सहरसा जिला में कितना पंचायत है?

पंचायतों की संख्या :151
सहरसा सदर अनुमंडल में पंचायतों की संख्या: 111
सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल में पंचायतों की संख्या: 40

गांवों की संख्या : 468

निर्वाचन क्षेत्र
लोकसभा
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की संख्या: 2 ,मधेपुरा और खगड़िया.
विधानसभा
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या: 4 ,सोनबरसा, सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर और महिषी.

सहरसा जिले की डेमोग्राफी( जनसांख्यिकी)

2011 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार:
कुल जनसंख्या :19 लाख 661
पुरुष :9.97 लाख
महिला: 9.03 लाख
जनसंख्या वृद्धि (दशाकीय): 26.02%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर): 1127
बिहार की जनसंख्या में अनुपात: 1.83%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष) : 906

औसत साक्षरता: 53.20 %
पुरुष साक्षरता : 63.56%
महिला साक्षरता: 41.68%

शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या: 8.24%
ग्रामीण जनसंख्या: 91.76%

धर्म

अधिकारीक  जनगणना 2011 के अनुसार सहरसा जिला हिंदू बहुसंख्यक जिला है. यहां हिंदू धर्म मानने वालों की जनसंख्या 85.72% है. मुस्लिमों की जनसंख्या 14.03% है. अन्य धर्म की बात करें तो यहां पर ईसाई 0.07%, सिख 0.01% और जैन 0.01% हैं.

सहरसा जिले की पर्यटन स्थल

श्री उग्रतारा स्थान-
श्री उग्रतारा मंदिर सहरसा स्टेशन से 18 किलोमीटर दूर महिषी प्रखंड के महिषी गांव में स्थित है. इस प्राचीन मंदिर में भगवती तारा की पुरानी मूर्ति है.ये  दूर-दूर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है. यहां पर मां तारा के साथ एकजटा और नील सरस्वती की प्रतिमाएं भी पूजी जाती हैं.

मंडन भारती स्थान

महिषी प्रखंड में स्थित इस स्थान पर भारतीय दर्शन के दो महान विद्वान 1200 साल पहले मिले थे. यह स्थान अद्वैतवाद के प्रवर्तक शंकराचार्य और स्थानीय विद्वान मंडन मिश्र के बीच हुए शास्त्रार्थ का गवाह है. इस शास्त्रार्थ के दौरान मंडन मिश्रा की पत्नी भारती, जो कि एक महान विदुषी थी, को शास्त्रार्थ के न्यायाधीश के रूप में नामित किया गया था.

सूर्य मंदिर
यह मंदिर महिषी प्रखंड के पस्तवार पंचायत के कंदाहा गांव में स्थित है. इसका निर्माण मिथिला के राजा नरसिंह देव ने 14 वीं शताब्दी में किया था.

चंडिका स्थान पांडवों के अज्ञातवास का स्थल

देवी चंडी का यह प्राचीन मंदिर सोनबरसा प्रखंड के बिराट पुर गांव में स्थित है. ऐसी मान्यता है कि यह गांव महाभारत काल के राजा बिराट से जुड़ा हुआ है. यहां पर महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने सालों तक समय बिताया था और मां चंडी की पूजा अर्चना की थी.

दुर्गा मंदिर ,औकाही, सत्तर कटैया
यह गांव सत्तर कटैया प्रखंड प्रखंड में स्थित है. खुदाई के दौरान यहां पर देवी दुर्गा की एक प्राचीन मूर्ति निकली थी. कहा जाता है कि मां दुर्गा ने सोने नाल झा नाम के एक ब्राह्मण को सपने में एक विशेष जगह की खुदाई करने को कहा था. यह मूर्ति उसी स्थान पर खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी.

देबन बन मंदिर
इस स्थान का वर्णन श्री पुराण में मिलता है. यह मंदिर नोहटा प्रखंड के शाहपुर-मंझौल में स्थित है. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को 1009 में राजा शालिवाहन ने स्थापित किया था.

संत बाबा कारू खिरहरि मंदिर
यह मंदिर महिषी प्रखंड कार्यालय से 2 किलोमीटर दूरी पर है. ये जगह महिषी गांव के पास  पूर्वी कोसी तटबंध के नदी किनारे स्थित है. ऐसी मान्यता है कि बाबा के भभूत मात्र से पशुओं में होने वाले रोगों का नाश होता है. यहां पर सालों भर पशुपालकों की भीड़ लगी रहती है. यहां पर बिहार के विभिन्न जिलों और नेपाल के पशुपालक पशुओं के प्रथम दूध बाबा को चढ़ाने आते हैं.

मत्स्यगंधा मंदिर

चौसठ योगिनी रक्त काली मत्स्यगंधा मंदिर पूरे कोसी और मिथिला  क्षेत्र का एक प्रसिद्ध मंदिर है. इस मंदिर के अंदरूनी दीवारों पर 64 देवताओं (चौसठ योगिनी के रूप में जिन्हें जाना जाता है) को उत्कीर्ण किया गया है.

कैसे पहुंचे सहरसा

हवाई मार्ग
सहरसा में कोई हवाई अड्डा नहीं है. निकटतम हवाई अड्डा जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट (Code: PAT) है. यह सहरसा जिले से 201 किलोमीटर दूर पटना में स्थित है.

रेल मार्ग
रेल मार्ग से आप आसानी से सहरसा आ सकते हैं . देश के अन्य प्रमुख शहरों से सहरसा के लिए नियमित ट्रेन ट्रेने चलती है.
रेलवे स्टेशन: सिमरी बख्तियारपुर (SBV) और सहरसा जंक्शन (SHC).

सड़क मार्ग
सहरसा, राज्य और देश के प्रमुख  शहरों से सड़क मार्ग से अच्छे से जुड़ा हुआ है . यहां के लिए नियमित बसे चलती हैं. आप चाहे तो अपने निजी वाहन कार या बाइक से भी यहां आ सकते हैं.

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