Ranjeet Bhartiya 04/02/2020

हाथरस भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक जिला है. भारत की राजधानी नई दिल्ली से लगभग 185 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित यह जिला अलीगढ़ डिविजन के अंतर्गत आता है. हाथरस शहर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है. यह जिला देसी घी से बनाए जाने वाले मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध है. जिले में बनाए जाने वाले प्रमुख मिठाईयां हैं: सोहन हलवा, सोनपापड़ी, बालूशाही, जलेबी, इमरती, गाजर का हलवा और मूंग का हलवा. जिले में कितने तहसील है? कितनी जनसंख्या है? आइये जानते हैं हाथरस जिले की पूरी जानकारी.

हाथरस जिला कब बना

एक स्वतंत्र जिले के रूप में अस्तित्व में आने से पहले हाथरस अलीगढ़ और मथुरा जिले का हिस्सा हुआ करता था. 3 मई 1997 को अलीगढ़ और मथुरा जिले के कुछ तहसीलों को मिलाकर नए जिले का गठन किया गया. 6 मई 1997 को हाथरस जिले के गठन की अधिसूचना जारी की गई.

नामकरण

1997 में जब इस जिले का गठन हुआ तो उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मायावती सरकार ने इसका नाम गौतम बुध की माता के नाम पर महामाया नगर रखा. लेकिन 2012 में जिले का नाम फिर से बदलकर हाथरस कर दिया गया.

हाथरस जिले की भौगोलिक स्थिति

बाउंड्री (चौहद्दी)
यह जिला कुल 5 जिलों से घिरा हुआ है.
उत्तर में-अलीगढ़ जिला
दक्षिण में-आगरा जिला
पूरब में-कांशीराम नगर जिला और एटा जिला
पश्चिम में-मथुरा जिला
समुद्र तल से ऊंचाई
हाथरस समुद्र तल से लगभग 180 मीटर की औसत ऊंचाई पर स्थित है.
क्षेत्रफल
इस जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1840 वर्ग किलोमीटर है.
प्रमुख नदियां:
जिले के प्रमुख नदियां हैं: करबन, सेंगर और काली.

अर्थव्यवस्था-कृषि, उद्योग और उत्पाद

इस जिले की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन, वन, उद्योग और व्यवसाय पर आधारित है.

कृषि

जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. जिले की भूमि उपजाऊ है और यहां रबी, खरीफ और जायद फसलों को उगाया जाता है. जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फसल हैं: गेहूं, बार्ली, मक्का, ज्वार, बाजरा, धान, दलहन (चना,मूंग, उड़द और मटर), तिलहन (मूंगफली और सरसों), कॉटन, गन्ना, तंबाकू, आलू, प्याज और सब्जियां. जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फल हैं: अमरूद, आम, आमला और बेर.

पशुपालन

जिले के ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान है. जिले में बेहतर गुणवत्ता वाले पशुओं का पंजाब और हरियाणा से आयात किया जाता है. जिले के प्रमुख पशु धन हैं: गाय, भैंस, सूअर, बकरी और पोल्ट्री.

वन

जिले में वन क्षेत्र बहुत कम हैं. जिले में कोई आरक्षित वन क्षेत्र नहीं है. जिले में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण पेड़ हैं: बबूल, आम, जामुन और महुआ.

खनिज

इस जिले में मूल्यवान खनिजों का अभाव है. जिले में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज हैं: बालू, कंकर, रेह, लाइमस्टोन और क्ले.

उद्योग

जिले में बड़े उद्योगों का अभाव है. जिले में छोटे-मोटे औद्योगिक इकाइयां कार्यरत है. जिले के प्रमुख औद्योगिक उत्पाद हैं: चाकू, रेडीमेड गारमेंट, रंग, तंबाकू आधारित उत्पाद, कपास, हींग, खाद्य तेल, रसायन, हार्डवेयर, कृत्रिम मोती, धातु हस्तशिल्प और पेय पदार्थ.

व्यापार और वाणिज्य

हाथरस कृषि उत्पादों का व्यापार केंद्र है.जिले से निर्यात किए जाने वाले प्रमुख पदार्थ हैं: अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, गुड़ और आलू.
जिले में आयात किए जाने वाले प्रमुख पदार्थ हैं: रोजमर्रा के सामान, नमक, दवाई, कपड़े, मसाले, पेट्रोल, डीजल और बिल्डिंग मटेरियल.

प्रशासनिक सेटअप

प्रमंडल: अलीगढ़
प्रशासनिक सहूलियत के लिए इस जिले को 4 तहसीलों (अनुमंडल) और 7 विकासखंडो (प्रखंड/ ब्लॉक) में बांटा गया है.
तहसील (अनुमंडल):
जिले को कुल 4 तहसीलों में बांटा गया है:
सिकंदराराऊ, हाथरस, सासनी और सादाबाद.
विकासखंड (प्रखंड):
इस जिले को कुल 7 विकासखंडों (प्रखंडों) में बांटा गया है: सिकंदराराऊ, हसायन, सासनी, हाथरस, मुरसान, सहपऊ और सादाबाद.
पुलिस थानों की संख्या: 11
नगर पालिका परिषदों की संख्या: 2
नगर पंचायतों की संख्या: 7
ग्राम पंचायतों की संख्या: 474
गांवों की संख्या: 683
निर्वाचन क्षेत्र
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र: 1; हाथरस
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र: 3
जिले के अंतर्गत कुल 3 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं: सिकंदराराऊ, हाथरस और सादाबाद.
जनसांख्यिकी
2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, इस जिले की जनसांख्यिकी इस प्रकार है-
कुल जनसंख्या: 15.65 लाख
पुरुष: 8.36 लाख
महिला: 7.28 लाख
जनसंख्या वृद्धि (दशकीय): 17.12%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर): 850
उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में अनुपात: 0.78%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष): 871
औसत साक्षरता: 71.59%
पुरुष साक्षरता: 82.38%
महिला साक्षरता: 59.23%
शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या: 21.26%
ग्रामीण जनसंख्या: 78.74%

धार्मिक जनसंख्या

2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, हाथरस एक हिंदू बहुसंख्यक जिला है. जिले में हिंदुओं की जनसंख्या 89.30% है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 10.19% है. अन्य धर्मों की बात करें तो जिले में ईसाई 0.09%, सिख 0.03%, बौद्ध 0.03% और जैन 0.08% हैं.
भाषाएं
जिले में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं हैं: हिंदी और उर्दू.

हाथरस जिले में घूमने की जगह 

इस जिले में पौराणिक, धार्मिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कई दर्शनीय स्थल हैं. जिले में स्थित प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में संक्षिप्त विवरण:

श्री दाऊजी महाराज मंदिर

भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम को समर्पित यह विशाल मंदिर यमुना नदी के दूसरे किनारे स्थित है. यह शहर का एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है. मंदिर में श्री बलदेव, उनकी पत्नी देवी रेवती और श्रीकृष्ण की भव्य प्रतिमा विराजमान है. इस मंदिर को “वल्लभ संप्रदाय” का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है.

तीर्थधाम मंगलायतन

लगभग 16 एकड़ में फैला यह जैन धार्मिक स्थल अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर अलीगढ़-आगरा राजमार्ग पर स्थित है.

हाथरस कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग

हाथरस जिले का अपना हवाई अड्डा नहीं है. यहां के लिए डायरेक्ट हवाई सेवाएं उपलब्ध नहीं है. निकटतम हवाई अड्डा: पंडित दीनदयाल उपाध्याय एयरपोर्ट/आगरा एयरपोर्ट (Code: AGR).
यह हवाई अड्डा हाथरस से लगभग 54 किलोमीटर की दूरी पर आगरा में स्थित है. दूसरा नजदीकी एयरपोर्ट: ग्वालियर एयरपोर्ट (Code: GWL) हवाई अड्डा हाथरस से लगभग 162 किलोमीटर की दूरी पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित है.

रेल मार्ग

हाथरस रेल मार्ग से प्रदेश की राजधानी लखनऊ, देश की राजधानी नई दिल्ली तथा देश के विभिन्न हिस्सों से अच्छे से जुड़ा हुआ है.
निकटतम रेलवे स्टेशन: हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन (Code: HTC) और हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशन (Code: HRS).

सड़क मार्ग

हाथरस सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से अच्छे से जुड़ा हुआ है. यहां के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध है. आप यहां अपने निजी वाहन कार या बाइक से भी आ सकते हैं.
नेशनल हाईवे 93 (NH 93) और स्टेट हाईवे 33 (SH 33) जिले से होकर गुजरती है.

हाथरस जिले की कुछ रोचक बातें:

2011 के जनगणना के अनुसार,
1. जनसंख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में 63वां स्थान है.
2. लिंगानुपात के मामले में उत्तर प्रदेश में 58वां स्थान है.
3. साक्षरता के मामले में उत्तर प्रदेश में 20वां स्थान है.
4. सबसे ज्यादा बसे गांव वाला तहसील: हाथरस (248).
5. सबसे कम बसे गांव वाला तहसील: सासनी (115)
6. जिले में कुल निर्जन गांवों की संख्या: 14.

 

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