Ranjeet Bhartiya 21/11/2021
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Last Updated on 13/01/2022 by Sarvan Kumar

बैगा (Baiga) भारत में पाई जाने वाली एक आदिवासी जनजाति (Primitive Tribe) है. यह जनजाति भारत के सबसे प्राचीनतम आदिवासी समूहों में से एक है.यह घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और दुर्गम स्थानों पर निवास करने वाली जनजाति है. जीवन यापन के लिए यह मुख्य रूप से कृषि और वन संसाधनों पर निर्भर हैं. बैगा जनजाति के लोग पहले जंगलों को काटकर और उसे जलाकर ‘बेवर खेती’ किया करते थे. लेकिन अब यह पहाड़ी ढलानो पर स्थाई खेती करते हैं. यह जंगलों से कंदमूल, तेंदूपत्ता, लाख, गोंद, शहद, लकड़ी आदि इकट्ठा करके स्थानीय बाजारों बेचते हैं. यह बांस की टोकरी और सूप बनाकर भी बेचते हैं. आइए जानते हैं बैगा जनजाति का इतिहास, बैगा शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

बैगा किस कैटेगरी में आते हैं?

भारत सरकार की सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था आरक्षण के अंतर्गत इन्हें अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. घटती आबादी, साक्षरता के निम्न स्तर और विकास की धीमी रफ्तार को देखते हुए सरकार ने इन्हें छत्तीसगढ़ राज्य में विशेष पिछड़ी जनजाति समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group, PVTG) वर्गीकृत किया है.

बैगा की जनसंख्या, कहां पाए जाते हैं?

यह मध्य भारत में पाए जाते हैं और मुख्य रूप से मध्य प्रदेश राज्य में निवास करते हैं. मध्य प्रदेश के मंडला, डिंडोरी, शहडोल, बालाघाट और जबलपुर और जिलों में इनकी बहुतायत आबादी है. मध्य प्रदेश से सटे राज्यों छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और झारखंड में भी इनकी थोड़ी बहुत आबादी है. छत्तीसगढ़ में या मुख्य रूप से कबीरधाम और बिलासपुर जिले में पाए जाते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इनकी आबादी 89,784 दर्ज की गई थी.

बैगा धर्म, उप-विभाजन, भाषा

यह हिंदू और स्थानीय है लोक धर्म (Folk Religion) को मानते हैं. यह हिंदू देवताओं के साथ-साथ, प्रकृति (वृक्ष आदि) और स्थानीय देवताओं जैसे बूढ़ा देव और दूल्हा देव की पूजा करते हैं.

बैगा जनजाति की उपजाति
यह जनजाति कई उप जातियों में विभाजित है, जिनमें कुछ उपजातियां इस प्रकार हैं-नरोतिया, भरोतिया,
बिझवार, राय भैना, काढ भैना और नाहर.

भाषा
मुख्य रूप से हिंदी, छत्तीसगढ़ी और स्थानीय भाषा बोलते हैं

बैगा शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

इनकी उत्पत्ति के बारे में ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है. इन्हें भुइयां का एक अलग समूह माना जाता है.
एक अन्य किवदंती के अनुसार, सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने जब सृष्टि की रचना की तो उन्होंने दो व्यक्तियों को उत्पन्न किया. एक को ब्रह्मा जी ने “नागर” ( हल) प्रदान किया, जबकि दूसरे को “टंगिया” (कुल्हाड़ी) दिया. नागर हेलो लेकर खेती करने लगा और गोंड कहलाया. टंगिया कुल्हाड़ी लेकर जंगल काटने लगा. क्योंकि उस समय कपड़े नहीं थे, वह नंगा बैगा कहलाया. बैगा जनजाति के लोग इसी नंगा बैगा को अपना पूर्वज मानते हैं.

 

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