Sarvan Kumar 24/12/2019

आजकल दो विधेयक लोगों को भूत की तरह डरा रहा है। भूत का तो कोई अस्तित्व नहीं होता तो एक समय के बाद इसका डर खत्म हो जाता है पर CAA और NRC तो हकीकत है। भारतीय लोगों खासकर मुस्लिम समाज में ये डर थोड़ा ज्यादा है। जब बीजेपी सरकार ने पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में CAB को सफलतापूर्वक पास करा लिया तो पूरे देश में कोहराम मच गया। देशव्यापी विरोध में जमकर हिंसा और आगजनी की गई। सरकारी संपत्तियों का भारी नुकसान किया गया। कई प्रदर्शनकारी पुलिस के गोलियों के शिकार हो गए। लोगों के मन में CAA और NRC के लिए मुख्यतः ये डर की है इसके आड़ में कहीं वे घुसपैठिया ना साबित कर दिये जाये।

Document के लेकर काफी उधेड़बुन

NRC लागू होने के बाद वो कौन से Document होंगे जो नागरिकता साबित करने में अहम साबित होंगे ये सवाल भी लोगों को परेशान कर रहा है।आईये जानते हैं CAA और NRC कितना डरावना है और कौन से Document है जिससे भारतीय, अपना नागरिकता साबित कर पायेंगे?

NRC और CAA का फुल फॉर्म क्या है?

क्या है इस दोनों बिल में?

बहुत सारे आम जनता को तो इन दोनों बिल का फुल फॉर्म तक नहीं पता है इसके अंदर क्या प्रावधान है, ये तो दूर की बात है।

CAA क्या है?

CAA का फुल फॉर्म है (Citizens Amendment Act) इसे हिन्दी में नागरिकता संशोधन कानून भी कहतें हैं। भारतीय संविधान मे भारतीय नागरिक होने के कुछ शर्ते हैं। अनुच्छेद 5 से लेकर 11 तक में इसका विस्तृत वर्णन है। अनुच्छेद 11 के अनुसार भारतीय संसद नागरिकता के नये कानून बना सकती है। इसी अनुच्छेद 11 का प्रयोग कर मोदी सरकार CAA लेकर आई है। इस संशोधन के मुताबिक तीन पड़ोसी देश पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान से आये गैर मुस्लिमों को जैसे हिन्दू , सिख ,इसाई, बौध ,जैन और पारसी को भारतीय नागरिकता मिल जायेगी। इसमें शर्त ये है की वे लोग 31 दिसम्बर 2014 से पहले आयें हो और 6 साल से भारत में रह रहे हों।

क्यों खफा हैं मुसलमान?

मुस्लिमों को इस कानून में ना शामिल किया जाना इन समुदाय के लोगों को आहत कर दिया है। वे इसे धार्मिक आधार पर लाया गया कानून मानने लगे हैं। वे इस बात को नहीं समझ पा रहे की ये कानून पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में प्रताड़ित अल्पसंख्यको के लिए की गई है जिसकी वकालत महात्मा गांधी भी कर चुके हैं।

CAA से मुसलमानों पर क्या असर होगा?

इस नये नागरिकता संशोधन कानून से जो डर मुसलमानों में है वो बेबुनियाद  है। यह कानून उन्हें कुछ भी नहीं बिगाड़ पायेगी। ये कानून नागरिकता छीनने का है ही नहीं ये तो नागरिकता देने का है।

NRC क्या है?

NRC का फुल फॉर्म है (National Register of Citizens),
यह एक भारतीय लोगों का official Record होगा। इस कानून के तहत भारतीय नागरिक को अपनी नागरिकता साबित करना होगा। पहली बार 1951 में असम में  NRC कराया गया जिसको अभी तक अपडेट नहीं किया गया था, साल 2013- 2014 में असम मे दुबारा NRC करवाया गया।

कौन है भारतीय नागरिक?

नागरिकता कानून 1955 के अनुसार जो व्यक्ति 26 जनवरी 1950 के बाद भारत में जन्मा होगा वो भारत का नागरिक होगा।
माता- पिता के बारे में कोई नियम नहीं  :इस कानून की सबसे बड़ी ये खामी ये थी की इसमें माता पिता का कोई जिक्र नहीं था कोई विदेशी बच्चा भी भारत का नागरिक हो सकता था अगर उसका जन्म भारत में हुआ हो।

1986 नागरिकता संशोधन कानून

1955 के नागरिकता कानून के खामी को दूर करने के लिए 1986 में संशोधन किया गया। इस संशोधन के अनुसार  26 जनवरी 1950 के बाद पैदा हर व्यक्ति भारत का नागरिक होगा अगर उसके माता भी भारत के नागरिक है। अगर दोनों भारत के नागरिक नहीं है तो कम से कम एक को भारतीय नागरिक होना जरूरी है।

2003 नागरिकता संशोधन कानून

नागरिकता कानून में एक संशोधन 2003 में हुआ जिसके अनुसार माता पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक है और दूसरा अवैध प्रवासी नहीं है। प्रवासी होने का सारा कानूनी दस्तावेज भी उसके पास होने चाहिए।

NRC में कौन से Document से साबित होगी नागरिकता?

असम में 2103-14 में हुए NRC में लोगों से 24 मार्च 1971 के पहले भारत में आने का Document मांगा गया। इसको साबित करने के लिए उनसे बर्थ सर्टिफिकेट, पासपोर्ट ,बैंक या पोस्ट आफिस Documents, रिफ्यूजी रजिस्टरेसन सर्टिफिकेट, LIC पाॅलिसी, स्थायी आवास प्रमाण पत्र, सरकारी नौकरी प्रमाण पत्र, भूमि स्वामित्व कागजात, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, कोर्ट रेकार्डस इत्यादि मांगे गये।

पूरे देश का NRC असम NRC से अलग होगा ?

असम NRC के बाद BJP सरकार की पूरे देश में NRC लागू करने की योजना है। हालांकि इस NRC की रूप रेखा अभी तैयार नहीं की गई है पर ऐसा लगता है ये असम से अलग होगा। असम में 1971 के पहले भारत में आने का Document मांगा गया , पूरे देश में होने वाले NRC में किस साल का document मांगा जायेगा ये अभी स्पष्ट नहीं है।

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