Last Updated on 07/12/2021 by Sarvan Kumar
कचेर (Kacher) भारत में निवास करने वाला एक जातीय समुदाय है. इन्हें कचेरा (Kachera) या शीशगर (Shishgar) के नाम से भी जाना जाता है. परंपरागत रूप से इनका व्यवसाय कांच की चूड़ियां बनाना है.जीवन यापन के लिए आज भी इस समुदाय के अधिकांश लोग चूड़ियां बनाने और और उसकी बिक्री करने पर आश्रित हैं. कुछ मजदूर के रुप में भी काम करते हैं. चूड़ी बनाने के पारंपरिक व्यवसाय में बहुत कम लाभ मिलने के कारण इनकी आर्थिक स्थिति सामान्य तौर पर कमजोर है. इसीलिए यह अपने परंपरागत व्यवसाय को छोड़कर दूसरे व्यवसायों और रोजगारों को भी अपनाने लगे हैं. आइए जानते हैं, कचेर समाज का इतिहास, कचेर शब्द की उत्पति कैसे हुई?
कचेर किस धर्म को मानते हैं?
ये मुख्य रूप से राजस्थान में पाए जाते हैं. यह पूरे महाराष्ट्र में भी पाए जाते हैं और उर्दू की दखनी बोली बोलते हैं. यह मध्य भारत में भी निवास करते हैं. धर्म से यह हिंदू और मुसलमान दोनों हो सकते हैं. मुस्लिम कचेर पूरी तरह से सुन्नी इस्लाम के अनुयाई हैं, हालांकि इनमें कुछ लोक मान्यताएं भी हैं. महाराष्ट्र में छोटे मुस्लिम समुदायों में से एक के रूप में इनका बहुत कम राजनीतिक प्रभाव है. कचेर कुछ पड़ोसी मुस्लिम समुदायों जैसे अत्तर, फकीर और पिंजारा के साथ वैवाहिक संबंध भी रखते हैं. लेकिन यहां यह बताना आवश्यक है कि अधिकांश विवाह समुदाय के भीतर ही होते हैं.
कचेर की उत्पत्ति कैसे हुई?
कचेर या कचेरा शब्द की उत्पत्ति हिंदी के शब्द “कांच” से हुई है. ऐतिहासिक रूप से कांच की चूड़ियों के निर्माण करने के पारंपरिक व्यवसाय के कारण इस समुदाय का नाम “कचेर या कचेरा” पड़ा. इस समुदाय के उत्पत्ति के बारे में बहुत कम जानकारी है. लेकिन प्राप्त स्रोतों से यह पता चलता है कि 18 वीं शताब्दी में सबसे पहली बार इनका उल्लेख किया गया था. फिर भी इनके उत्पत्ति के बारे में दो प्रचलित मान्यताएं हैं.
पहली मान्यता के अनुसार, हिंदू का कचेरा समुदाय के लोगों का कहना है कि पूर्व समय में कांच की चूड़ियों का निर्माण केवल तुर्क या मुहम्मदान कचेरा द्वारा किया जाता था. संभवत: तुर्करी का वर्तमान नाम तुर्क से लिया गया है. लेकिन जब महादेव और माता पार्वती का विवाह हो रहा था तो माता पार्वती ने तुर्करी द्वारा बनाई गई चूड़ियों को पहनने से इनकार कर दिया. फिर महादेव ने एक वेदी या भट्टी का निर्माण किया, और इससे पहला हिंदू कचेरा निकला, जिसे पार्वती के लिए चूड़ियाँ बनाने के लिए नियुक्त किया गया था. दूसरी मान्यता यह है कि महादेव ने किसी आदमी को बनाया नहीं था, बल्कि वहां मौजूद एक क्षत्रिय को पकड़ लिया था और उसे चूड़ियां बनाने का आदेश दिया था. उनके वंशजों ने इस नए पेशे का पालन किया और इस तरह से वह कचेरा के नाम से जाने जाने लगे. इस किवदंती से एक संभावित निष्कर्ष यह निकलता है कि कांच की चूड़ियां बनाने की कला की शुरुआत मुसलमानों द्वारा की गई थी.
