Ranjeet Bhartiya 12/12/2023
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Last Updated on 12/12/2023 by Sarvan Kumar

हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भारी बहुमत से जीत हासिल की है. वहीं, दक्षिण भारतीय राज्य तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की है. चुनाव नतीजों के बाद से ही इस बात पर चर्चा शुरू हो गई थी कि इन राज्यों का मुख्यमंत्री कौन बनेगा. क्या पुराने चेहरों को ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा या नए चेहरों के जरिए नए राजनीतिक समीकरण तलाशे जाएंगे? बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय के व्यक्ति और मध्य प्रदेश में यादव समुदाय के व्यक्ति को मुख्यमंत्री चुनकर सभी को चौंका दिया है.

यहां सबसे पहले ये बताना जरूरी है कि मोहन यादव को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने राजनीति की बिसात पर ऐसी चाल चल दी है, जिसका काट निकालना कांग्रेस, राजद और समाजवादी पार्टी जैसी विपक्षी पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती होगी.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका असर सिर्फ मध्य प्रदेश में ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी देखने को मिलेगा जहां यादवों की बहुसंख्यक आबादी रहती है. बीजेपी के इस फैसले का सीधा असर उत्तर प्रदेश और बिहार की 120 लोकसभा सीटों पर पड़ सकता है.

आपको याद होगा कि साल 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यादव वोट बैंक में सेंधमारी करने में अप्रत्याशित सफलता हासिल की थी.
मोहन यादव का उत्तर प्रदेश से पुराना नाता है. ‌उनकी पत्नी राज्य के सुल्तानपुर जिले की रहने वाली हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पृष्ठभूमि से आने वाले मोहन यादव साल 2022 में अपनी पत्नी के साथ सुल्तानपुर का दौरा किया था, जहां वह अपने बीमार ससुर से मिलने गए थे.

2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी मोहन यादव के जरिए उत्तर प्रदेश और बिहार में यादव वोट बैंक को आकर्षित कर अपना राजनीतिक आधार और मजबूत करना चाहती है और केंद्र में जीत का हैट्रिक लगाना चाहती है. बीजेपी के इस कदम को उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और बिहार में लालू यादव जैसे राजनीतिक परिवारों के प्रभुत्व को चुनौती देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.

मनुवाद और जातिवाद का राग अलापकर मुस्लिम-यादव समीकरण के जरिए राजनीति करने वाली राजद और समाजवादी पार्टी के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे यादव वोट बैंक को बंटने से कैसे रोक पाएंगे. उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकसभा चुनाव के नतीजे कैसे होंगे ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तो साफ है कि अगर बीजेपी यादव वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाने में कामयाब रही तो समाजवादी पार्टी और राजद का सियासी किला ढह सकता है।

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