Ranjeet Bhartiya 01/11/2021

लोहार भारत में पाई जाने वाली एक व्यावसायिक जाति है. इन्हें लुहार, लोहरा और पांचाल के नाम से भी जाना जाता है. झारखंड में लोहार को स्थानीय रूप से लोहरा या लोहारा के नाम से जाना जाता है. प्राचीन काल से ही लोहा या इस्पात से विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को बनाना इनका पारंपरिक कार्य रहा है. इसीलिए इन्हें लोहार कहा जाता है. यह हथोड़ा, चीनी और भाथी आदि औजारों का प्रयोग करके दरवाजा, ग्रिल, रेलिंग, कृषि उपकरण, बर्तन और हथियार आदि बनाते हैं. अधिकांश लोहार अभी भी धातु निर्माण के अपने पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. हालांकि यह जीवन यापन के लिए खेती बारी तथा अन्य काम धंधा भी करने लगे हैं. प्राचीन काल से ही इनका समाज में महत्वपूर्ण स्थान रहा है. यह आम लोगों के लिए कृषि उपकरण तथा घर में प्रयोग किए जाने वाले सामान बनाते थे. साथ ही यह राजा महाराजा के सेनाओं के लिए हथियार बनाते थे. आइए जानते हैं  लोहार  समाज का इतिहास, लोहार शब्द की उत्पति कैसे हुई?

लोहार किस धर्म  को मानते हैं?

धर्म से यह हिंदू, मुसलमान या सिख हो सकते हैं. भारत में निवास करने वाले अधिकांश लोहार हिंदू धर्म को मानते हैं. यह भगवान विश्वकर्मा और हिंदू अन्य देवी देवताओं की पूजा करते हैं. धार्मिक आधार पर हिंदू लोहार को विश्वकर्मा के रूप में जाना जाता है, जबकि मुस्लिम लोहार सैफी कहलाते हैं। यह भगवान विश्वकर्मा के वंशज होने का दावा करते हैं.

लोहार समाज के उपनाम

अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग उपनाम है. बिहार और उत्तर प्रदेश में के प्रमुख उपनाम विश्वकर्मा और ठाकुर हैं. दिल्ली में इनके उपनाम हैं -लोहार मिस्त्री और पांचाल. लोहार जाति दो उप समूहों में विभाजित है-गाडिया लोहार और मालविया लोहार.

हिंदू लोहार जाति के प्रमुख गोत्र

हिंदू लोहार जाति के प्रमुख गोत्र इस प्रकार हैं- बडगुजर, तंवर, चौहान, सोलंकी, करहेड़ा, परमार भूंड, डांगी, पटवा, जसपाल, तावड़ा, धारा, शांडिल्य, भीमरा और भारद्वाज.

लोहार किस कैटेगरी में आते हैं?

हिमाचल प्रदेश में तारखान और लोहार दो जातियां हैं. सिख लोहार को तारखान के नाम से जाना जाता है, और इन्हें ओबीसी जाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है. यहां लोहार जाति को अनुसूचित जाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. उत्तर प्रदेश में इन्हें ओबीसी जाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है. धार्मिक आधार पर हिंदू लोहार को विश्वकर्मा के रूप में जाना जाता है, जबकि मुस्लिम लोहार सैफी कहलाते हैं।आरक्षण व्यवस्था के तहत इन्हें बिहार राज्य में अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

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