Sarvan Kumar 04/10/2023
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Last Updated on 04/10/2023 by Sarvan Kumar

बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट आ गयी है. इस रिपोर्ट में 200 से ऊपर जातियों का आंकड़ा जारी किया गया है इसमें 40 के आसपास मुस्लिम जातियों का भी उल्लेख है. ज्यादातर लोगों को यही पता है कि मुस्लिम में कोई जाति व्यवस्था नहीं होती और ये बस हिन्दुओं मे होती है. बिहार की जातीय जनगणना से यह स्पष्ट हो गया है कि मुसलमानों मे भी हिन्दुओं की तरह कई जातियां है. 2022 bihar caste census का रिपोर्ट को देखें तो इसमे चिक (Chik), चूड़ीहार (Churihar), ठकुराई (Thakurai), दफाली (Dafali), धुनिया (Dhunia), धोबी (Dhobi), नट ( Nat) ,नालबंद( Nalband), पठान ( Pathan), पमरिया (pamaria), बक्खो,,(Bakho) , भटियारा (Bhathiara), मदारी (Madari), मलिक (Malik), मुकेरी (Mukri),मिरासी (Mirasi), लालबेगिया (Lalbegia), हलालखोर (Halalkhor), भंगी मेहतर ( Bhangi Mehtar) , मोमिन (मुस्लिम), (Momin /Muslim) , जुलाहा/ अंसारी (julaha/ Ansari) मोरशिकार (मुस्लिम), राईन या कुंजरा (Rayeen or Kunjara)  , रंगरेज ( Rangrej) साई / फ़क़ीर / दिवान / मदार (Sai/ Fakir tDiwan/Madar) सैकलगर ( सिकालगर ( Sikligar ),इदरीसी या दर्जी ( Idrisi or Darji)
ईटफरोश / ईटाफटरोश / गदहेड़ी / ईटपज इब्राहिमी, कसाब (Kasab).आइए जानते हैं Muslim me jati pratha, मुस्लिम समाज भी ऊंच-नीच अगड़ा-पिछड़ा और दलित-आदिवासी में बंटा है.

Muslim me jati pratha

भारतीय मुसलमान मुख्यतः तीन जाति समूहों में बंटा हुआ है. इन्हें ‘अशराफ़’, ‘अजलाफ़’, और ‘अरज़ाल’ कहा जाता है. ये जातियों के समूह हैं, जिसके अंदर अलग-अलग जातियां शामिल हैं. मुस्लिम समाज भी ऊंच-नीच अगड़ा-पिछड़ा और दलित-आदिवासी में बंटा है. अमूमन जब राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय या जाति आधारित भागीदारी की बात होती है तो सिर्फ हिंदू समाज का मसला समझा जाता है मगर यह सच नहीं. हिंदुओं में जैसे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्ण होते हैं, वैसे ही अशराफ़, अजलाफ़ और अरज़ाल को देखा जाता है.

अशराफ़ में सैयद, शेख़, पठान, मिर्ज़ा, मुग़ल जैसी उच्च जातियां शामिल हैं. मुस्लिम समाज की इन जातियों की तुलना हिंदुओं की उच्च जातियों से की जाती है, जिनमें ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य शामिल हैं.

दूसरा वर्ग है- अजलाफ़. इसमें कथित बीच की जातियां शामिल हैं. इनकी एक बड़ी संख्या है, जिनमें ख़ास तौर पर अंसारी, मंसूरी, राइन, क़ुरैशी जैसी कई जातियां शामिल हैं. हिंदुओं में उनकी तुलना यादव, कोइरी, कुर्मी जैसी जातियों से की जा सकती है.

तीसरा वर्ग है- अरज़ाल. इसमें हलालख़ोर, हवारी, रज़्ज़ाक जैसी जातियां शामिल हैं. हिंदुओं में मैला ढोने का काम करने वाले लोग मुस्लिम समाज में हलालख़ोर और कपड़ा धोने का काम करने वाले धोबी कहलाते हैं.
अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर ने नवाब सैयद हामिद को 500 लोगों की एक सेना तैयार करने का आदेश यह कहते हुए दिया था कि उसमें केवल शेख, सैयद, पठान आदि उच्च जाति के मुसलमान ही होने चाहिए। इस हकीकत से अनजान पिछड़ी जाति के मुस्लिम आज भी यह समझते हैं कि उनके लोग भारत के शासक थे।
बादशाह अकबर ने कसाई और मछुआरों के लिए राजकीय आदेश जारी किया था कि उनके घरों को आम आबादी से अलग कर दिया जाए और जो लोग इस जाति से मेलजोल रखें, उनसे जुर्माना वसूला जाए। अकबर के राज में अगर निम्न श्रेणी का व्यक्ति किसी उच्च श्रेणी के किसी व्यक्ति को अपशब्द कहता था तो उस पर कहीं अधिक अर्थदंड लगाया जाता था।
मुसलमानों में भी जाति प्रथा हिंदुओं की तरह ही काम करती है. विवाह और पेशे के अलावा मुसलमानों में अलग-अलग जातियों के रीति रिवाज भी अलग-अलग है. मुसलमानों में भी लोग अपनी ही जाति देखकर शादी करना पसंद करते हैं. मुस्लिम इलाक़ों में भी जाति के आधार पर कॉलोनियां बनी हुई दिखाई देती हैं. कुछ मुसलमान जातियों की कॉलोनी एक तरफ़ बनी हुई है, तो कुछ मुसलमान जातियों की दूसरी तरफ़.


References:
https://www.jagran.com/editorial/apnibaat-castes-and-caste-based-discrimination-in-muslim-society-too-jagran-special-22106000.html

https://www.bbc.com/hindi/india-61678034#:~:text=%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE%20%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%B9%E0%A5%88.-,%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6%20%E0%A4%94%E0%A4%B0%20%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BE%20%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AE%20%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE,%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97%20%E0%A4%B9%E0%A5%88%2D%20%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A4%BC.

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