Last Updated on 30/07/2023 by Sarvan Kumar
सत्य और अहिंसा मौलिक सिद्धांत हैं जो समाज में सद्भाव और प्रगति को बढ़ावा देते हैं। सत्य विश्वास, पारदर्शिता और विश्वसनीयता का पोषण करता है, वास्तविक रिश्तों को बढ़ावा देता है। अहिंसा सहानुभूति और करुणा का प्रतीक है, संघर्षों को शांतिपूर्वक हल करने से स्थायी समाधान निकलता है। इन मूल्यों को अपनाने से समझ, सम्मान और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है, जिससे एक अधिक न्यायपूर्ण और न्यायसंगत दुनिया का मार्ग प्रशस्त होता है जहां लोग एक साथ बढ़ सकते हैं।आइए इसी क्रम में सत्य और अहिंसा विषय पर दो कविताएँ यहाँ पढ़ें:
सत्य और अहिंसा विषय पर दो कविताएँ
कविता 1: सत्य
सत्य की राह पर चलना है हमें,
हृदय को शुद्ध बनाना है हमें।
जीवन के सफलता के मार्ग पर,
सत्य को अपनाना है हमें।।
जिधर भी जाएं हम, सत्य रास्ता है,
कठिनाइयों को पार करना है हमें।
चाहे जितना भी बढ़ावा दे झूठ,
हकीकत को ही मानना है हमें।।
सत्य के प्रकाश में जगमगाएं,
भ्रष्टाचार को मिटाना है हमें।
न्याय के पुजारी हृदय धर्मी,
सत्य को हर पल याद करना है हमें।।
अखंडता से जुड़े वचन देकर,
सत्य को सदा साथ रखना है हमें।
धर्म के मार्ग पर अड़ी रहकर,
सत्य को पहचाना है हमें।।
कविता 2: सत्य
सत्य और अहिंसा की राह पर चलो,
धरती को स्वर्ग बना दो।
प्रेम और सम्मान से गले लगाओ,
हर दिल में भाईचारा बसा दो।
हिंसा के रास्ते न चलो कभी,
सत्य के मार्ग पर हमेशा चलो।
दूसरों के दर्द को समझो तुम,
उनके साथ खड़े हमेशा चलो।
जीवन के सफलता का रहस्य है,
सत्य और अहिंसा का पालन।
करो इन्हें धरोहर अपनी,
खुद को समर्पित कर दो पूर्ण।
प्रेम के पुल से जुड़ जाओ आप,
दूसरों के दर्द को समझो।
सत्य और अहिंसा के प्रती वफ़ादार बनो,
जीवन को खुशियों से सजाओ।
सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलो,
धरती को स्वर्ग बना दो।
प्रेम और सम्मान से गले लगाओ,
हर दिल में भाईचारा बसा दो।
