Ranjeet Bhartiya 19/05/2023
Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 27/06/2023 by Sarvan Kumar

प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में ब्राह्मणों का महत्व रहा है. धर्म ग्रंथों में ब्राह्मणों को धर्म की मूर्ति, सबका कल्याण करने वाला और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला बताया गया है. ब्राह्मण सदैव समाज का पथ प्रदर्शक रहा है, इसीलिए हर युग में ब्राह्मणों का सम्मान किया गया है. लेकिन ब्राह्मणों की आलोचना करने वालों की संख्या भी कम नहीं है. भारतीय समाज का एक वर्ग ब्राह्मणों पर ढोंगी होने का आरोप लगाता रहा है. इसी क्रम में जानते हैं ब्राह्मणों के ढोंग के बारे में.

ब्राह्मणों के ढोंग

ब्राह्मणों के ढोंग (Pretense of Brahmins) के बारे में बात करने से पहले आइए ढोंग शब्द का का मतलब समझ लेते हैं. ढोंग का अर्थ होता है-दिखावा, पाखंड या आडंबर. एक ढोंग एक क्रिया या व्यवहार का तरीका है जिसका उद्देश्य लोगों को कुछ ऐसा विश्वास दिलाना है जो सत्य नहीं है. आइए अब ब्राह्मणों के ढोंग के बारे में निम्न बिंदुओं से समझते हैं-

•ब्राह्मणों पर ढोंगी और पाखंडी होने का आरोप लगाने वालों का कहना है कि ब्राह्मण धार्मिक होने का ढोंग करते हैं. इनके द्वारा सभी के कल्याण की बातें करना भी मिथ्या है. वास्तव में ब्राह्मण लालची, कपटी और हिंसक होते हैं. ब्राह्मण विनम्रता का झूठा दिखावा करते हैं लेकिन वास्तव में वे शोषक हैं जो केवल अपने लाभ की परवाह करते हैं.

•बहुत से लोग भारतीय समाज में ब्राह्मणों के वर्चस्व को जातिवाद से जोड़ते हैं. ब्राह्मणों को पाखंडी मानने वालों का कहना है कि भारत में जाति व्यवस्था की उत्पत्ति और विकास ब्राह्मणों ने ही किया है. ब्राह्मणों ने चतुराई से जाति व्यवस्था का निर्माण किया ताकि समाज में उनका वर्चस्व बना रहे.

•ब्राह्मणों पर आरोप लगता आया है कि है कि ब्राह्मण कर्मकांड और पूजा-पाठ के के नाम पर ढगते हैं. ब्राह्मणों ने कई ऐसे नियम बनाए हैं जिनका सीधा प्रभाव लोगों के खान-पान, विवाह और सामाजिक संबंधों पर पड़ता है जिससे गैर-ब्राह्मणों का शोषण होता है.

•ब्राह्मणों को ढोंगी मानने वाले आरोप लगाते हैं कि ब्राह्मण अपने को जन्म से श्रेष्ठ मानते हैं. अपने स्वयं के लिखित ग्रंथों में भी उन्होंने स्वयं को सर्वोच्च स्थान दिया है तथा अपने लिए अनेक विशेष अधिकारों की घोषणा की है. इतना ही नहीं, वे गैर-ब्राह्मणों को अपने से कम समझते हैं, जिसके कारण समाज के एक बड़े गैर-ब्राह्मण वर्ग को भेदभाव और शोषण का शिकार बनना पड़ता है.

•ब्राह्मण विरोधियों का कहना है कि ब्राह्मण अपने पाखंड और ढंग से समाज में अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं. अंधविश्वास समाज में कुरीतियों को जन्म देता है तथा इससे समाज में पिछड़ापन आता है. ब्राह्मणों के आलोचक श्राद्ध, मृत्यु भोज, पिंडदान समेत हिंदू धर्म के कई कर्मकांडों को कुरीति के रूप में देखते हैं. उनके अनुसार यह रीति रिवाज ब्राह्मणों ने अपने फायदे के लिए बनाया है.

अंतिम शब्द: ब्राह्मण ढोंगी हैं या नहीं, यह एक बहस का विषय है. यह निर्णय हम अपने पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं!


References:

•Dharmashastra Aur Jatiyon ka Sach

By Śaśi Śekhara Śarmā · 2021

•जातिविहीन भारत

By Wazir Singh Poonia · 2022

Leave a Reply

Discover more from Jankari Today

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading