Ranjeet Bhartiya 23/12/2021
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Last Updated on 23/12/2021 by Sarvan Kumar

सपेरा (Sapera) उत्तर भारत में पाई जाने वाली एक हिंदू जाति है. इन्हें अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इन्हें पश्चिम बंगाल में बरवा सम्फेरिया (Barwa Sampheriya), पंजाब में सपेला (Sapela) और मध्य प्रदेश में स्परेरा (Sparera) के नाम से जाना जाता है. परंपरागत रूप से यह बीन बजाने, सांप पकड़ने तथा सांप या सांप का खेल दिखा कर अपना जीवन यापन करते हैं. सपेरा समुदाय उत्तर भारत में पाए जाने वाले कई अर्ध-खानाबदोश समुदायों में से एक है, जो उत्तर भारत के ज्यादातर शहरों के बाहरी इलाके में शिविर बनाकर रहते हैं. यह समुदाय गरीबी से पीड़ित और बेहद हाशिए पर रहने वाला समुदाय है. आज भी काफी हद तक यह समुदाय जीवन यापन के लिए अपने पारंपरिक व्यवसाय पर निर्भर है. इनमें से कुछ अब जंगलों से जड़ी-बूटी, औषधीय वनस्पति, और अन्य वन उत्पादों को इकट्ठा करके स्थानीय बाजारों में बेचने का काम भी करते हैं. कुछ रस्सी बनाने का काम भी करते हैं. इनमें से कुछ बटाईदार के रूप में खेती करने लगे हैं. आइए जानते हैैं सपेरा जाति का इतिहास, सपेरा शब्द की उत्पति कैसे हुई?

सपेरा जाति की उत्पति

अधिकांश सपेरा हिंदू धर्म को मानते हैं. इनमें से कुछ धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बन गए हैं, और मुस्लिम सपेरा एक अलग समुदाय बनाते हैं. हिंदू सपेरा शक्ति पंथ के अनुयाई हैं और माता काली की पूजा करते हैं.यह हिंदी, पंजाबी और हरियाणवी बोलते हैं. सपेरा शब्द की उत्पत्ति “सांप” शब्द से हुई है. सांप पकड़ने, सांप का खेल दिखाने के पारंपरिक व्यवसाय के कारण इनका नाम “सपेरा” पड़ा.

सपेरा जाति एक परिचय

आरक्षण प्रणाली के अंतर्गत इन्हें पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में अनुसूचित जाति (Scheduled Caste ,SC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. यह मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में पाए जाते हैं. हरियाणा में यह समुदाय सपेरा नाथ (Sapera Nath) के नाम से जाना जाता है. यहां यह समुदाय 10 उप समूहों में विभाजित है,  जिनमें प्रमुख हैं- ब्राह्मण सपेरा, झिनवार सपेरा, सोग्गर सपेरा, बिहाल सपेरा, नकफुले सपेरा और संदेनाथ सपेरा. कहा जाता है कि यह विभाजन सपेरा समुदाय के विविध मूल को दर्शाता है. अलग-अलग जाति पृष्ठभूमि के लोगों ने सांपों के प्रति आकर्षण के कारण यह व्यवसाय अपना लिया, जिसके कारण कालांतर में यह एक अलग समुदाय के रूप में विकसित हो गए. हरियाणा में इन्हें शेड्यूल्ड कास्ट का दर्जा प्राप्त है.  पंजाब में इन्हें सपेला या नाथ के नाम से जाना जाता है. यह पूरे पंजाब में पाए जाते हैं. यहां यह एक खानाबदोश समुदाय हैं, और संभवत डोम मूल के हैं.पंजाब में सपेरा समुदाय कई कुलों में विभाजित है, जिनमें प्रमुख हैं- मारार, गोर, भांबी, डूम और लधु. यह सभी कुल समान सामाजिक स्थिति के हैं और आपस में अंतर्विवाह करते हैं. पंजाब में इन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है. उत्तर प्रदेश में, विशेष रुप से बरेली जिले में, सपेरा समुदाय दो अंतर्विवाही समूहों में विभाजित है-सहारपुआ और बैगा. समूहों से आगे यह कई बहिर्विवाही कुलों में विभाजित हैं.

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