रवीश कुमार जी, कभी मैं आपकी लेखनी और पत्रकारिता का प्रशंसक हुआ करता था. मैं आपकी लेखनी का आज भी प्रशंसक हूँ लेकिन आपको अब एक निष्पक्ष पत्रकार नहीं मान सकता. ना जाने कब आप एक ऐसे अहंकारोन्मादी व्यक्तित्व बन गए जो अपने अहंकार में इतना अँधा हो गया है कि उसे अपने सिवा ना […]