Sarvan Kumar 26/05/2018
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Last Updated on 16/04/2020 by Sarvan Kumar

रवीश कुमार जी, कभी मैं आपकी लेखनी और पत्रकारिता का प्रशंसक हुआ करता था. मैं आपकी लेखनी का आज भी प्रशंसक हूँ लेकिन आपको अब एक निष्पक्ष पत्रकार नहीं मान सकता. ना जाने कब आप एक ऐसे अहंकारोन्मादी व्यक्तित्व बन गए जो अपने अहंकार में इतना अँधा हो गया है कि उसे अपने सिवा ना कोई दिखाई देता है और ना कुछ सुनाई देता है. एक ऐसा इंसान जो अचानक अपने आपको इतना महत्वपूर्ण समझने लगा है कि बस सारी दुनिया उसके विचारो पर चले. आप दिन भर , चौबीसों घंटे दूसरों  कि आलोचना करते रहो, मर्यादा कि सीमाएं जान बुझ कर लांघते रहो , बस सब आपकी सुनता रहे. देश में कौन सा मुद्दा महत्वपूर्ण है, कौन सा मुद्दा अप्रासंगिक है इसकी समझ केवल आप रखते हैं!

जो भी आपकी थोड़ी भी आलोचना कर दे, आप के तन बदन में आग लग जाती है. आप उनको अपनी सहूलियत के हिसाब से उसे हिंदुत्व के गुंडे या ट्रोल कह देते हैं. जब -जब आप अपने आलोचकों को हिंदुत्व के गुंडे या ट्रोल कहते हैं आप खुद बेनकाब होते जाते हैं.

अभी हाल ही में आपने कहा कि आपको जान से मारने की धमकी मिली है. आपका मानना है कि  इससे प्रेस की आजादी खतरे में आ गई है. कमाल है रवीश भैया, प्रेस की आजादी तब खतरे में क्यों नहीं आयी जब पत्रकार रोहित सरदाना को जान से मारने की धमकी मिली थी, तब आप बिल्कुल खामोश रहे थे. शायद आप रोहित सरदाना को पत्रकार मानते ही नहीं इसलिए चुप रहे होंगे ! आप उत्तरी गोलार्ध के इकलौते पत्रकार जो ठहरे! खैर छोड़िये आपका दोहरा मापदंड खुल के लोगों के सामने आ गया.

जिसे आप नकली आईडी से बनी ट्रोल की फौज कहते हैं ना वो भी आप ही के तरह इस देश के नागरिक हैं. आपके ट्रोल कहे जाने से उनको फर्क नहीं पड़ेगा. आप उन्हें ट्रोल कह कर , गौ रक्षक कह कर या सनातन धर्म के रक्षक कहकर मज़ाक उड़ाते रहिये.  सच यही रहेगा की वो भी इस देश के नागरिक हैं जो अपने आप को अभिव्यक्त कर रहे हैं. वो भी कुछ कहना चाह रहे हैं जिसे आप जैसे लोग बस चुप करा देना चाहते हैं. मै किसी तरह के हिंसा का समर्थन नहीं करता, लेकिन उनकी आवाज़ इस तरह से दबाने की कोशिस होगी तो वो और ज़ोर से बोलेंगे ही. आप नहीं रोक पाओगे, सरकार नहीं रोक पायेगी. एक बात और समझिये इनमें से ज़यादातर सिर्फ अपने हितों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं. ये भ्रम निकाल फेंकिए कि इनका मकसद धर्म की सेवा या धर्म के नाम पर उन्माद फैलाना है .

आपकी प्रॉब्लम क्या है रवीशजी? आप यूट्यूब पर सरकार की झूठ की पोल खोलने वाले नौजवान ध्रुव राठी को धमकियां मिलती है तो आप उसे मुद्दा बनाते है. बनाना भी चाहिए लेकिन जब बिहार का एक लोकल कलाकार लालू यादवजी के जेल जाने पर गाना बनता है, एक गैंगस्टर से जान मारने कि धमकी मिलता है तो  इस पर आप चुप बैठ जाते हैं.

आप अपने आपको एक मसीहा समझने लगे हैं. आपको लगता है आप सारा दर्द झेल कर अपना काम रहे हैं और”गोदी मीडिया” लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है. लेकिन यकीन मानिये आपको देश के कम से कम 40 -50 % लोग “पिद्दी मीडिया” के CEO मानते हैं. आपकी विश्वसनीयता ही ऐसे हो गयी है, आपने पत्रकारिता के साख को इस स्तर तक गिरा दिया है.
मीडिया, मीडिया होता है सर, इसको गोदी मीडिया और पिद्दी मीडिया में मत बांटिए. आपका मानना है कि हिन्दुत्व के नाम पर लोगों को दंगाई बनाया जा रहा है. देशभक्ति की आड़ में उन्हें उन्मादी बनाया जा रहा है, लेकिन आप मजहब के नाम पर ISIS में भर्ती होने वालों पर चुप हो जाते हैं.
इस्लाम खतरे में है कहकर हज़ारो युवाओं को गुमराह किया जा रहा है, आप इस पर कुछ नहीं बोलते. हर दिन उलूल-जलूल फतवे जारी किये जाते हैं, इस पर आप कभी नहीं बोलेंगे. लेकिन एक नकली प्रोफाइल से कोई कुछ आपको बोल दे तो आपको लगता है लोकतंत्र और देश सब खतरे में आ गया.

सच कहूं तो अब आप पत्रकार नज़र नहीं आते. आप एक्टिविस्ट या किसी राजनितिक दल के प्रवक्ता नज़र आते हैं, जो पत्रकार की खाल पहनकर , न्यूज़ रूम में बैठकर लोगों को गुमराह करना चाहता है.
हर मुद्दे को बढ़ा-चढ़ा कर , 4 घंटे का प्राइम टाइम चला कर , अपना कद बढाने के फ़िराक़ में हमेशा ना रहिये. आप ऐसा करके देश का समय बर्बाद कर रहे हैं. जान से मारने की धमकी अगर सच में मिली है तो पुलिस में जाइये, कोर्ट में जाइये. अगर ऐसा नहीं कर सकते तो आप पत्रकारिता में ईमानदारी से लौट आइये या पॉलिटिक्स ज्वाइन कर लीजिये.

1 thought on “रवीश कुमार जी-प्राइम टाइम ड्रामा बंद कीजिये, जान से मारने की धमकी मिली है तो कोर्ट-पुलिस के पास जाइये!

  1. Ye ptrkaar h hi nhi …ye kisi sanstha ajent lagta h jo slected muddo pr hi bolta h ..#doglaa

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