Sarvan Kumar 23/03/2019
जाट गायक सिद्धू मूसेवाला आज हमारे बीच नहीं है पर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा बनी रहेगी। अपने गानों के माध्यम से वह अमर हो गए हैं । सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को मानसा जिले में उनके घर से कुछ किलोमीटर दूर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या किसने और किस वजह से की यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन हमने जाट समाज का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके फैंस पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। jankaritoday.com की टीम के तरफ से उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि! Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 06/09/2020 by Sarvan Kumar

नालंदा जिले को कौन नहीं जानता. प्रचीन काल में स्थित नालंदा विश्वविद्यालय विश्व शिक्षा का केंद्र था. यहां पर पूरे भारत वर्ष से पढ़ने के लिए छात्र तो आते ही थे, चाइना , तिब्बत तथा पूरे सेंट्रल एशिया से भी छात्र यहाँ ज्ञान प्राप्ति के लिए आते थे. नालंदा विश्वविद्यालय को विश्व धरोहर का दर्जा मिला है. 1199 में मुस्लिम शासक बख्तियार खिलजी ने इस विश्वविद्यालय में आग लगवा दिया था. पूरा विश्वविद्यालय जल गया. कहते हैं कि विश्वविद्यालय में इतनी पुस्तकें थी कि यह 3 महीने तक जलता रहा था. नालंदा भारत के बिहार राज्य में स्थित एक जिला है. बिहार के दक्षिण भाग में आने वाला यह जिला पटना प्रमंडल के अंतर्गत आता है. बिहार शरीफ इस जिले का मुख्यालय है. नालंदा जिले में कितने पंचायत हैं?कितनी जनसंख्या है?  आइए जानते हैं  नालंदा जिलेे की  पूरी  जानकारी.

नालंदा जिला कब बना

पहले ये जिला  पटना जिले का बिहार शरीफ अनुमंडल था. 9 नवंबर 1972 को इसे पटना जिले से अलग करके एक स्वतंत्र जिला बनाया गया.

नालंदा  जिले की भौगोलिक स्थिति

बाउंड्री (चौहद्दी)
उत्तर में – पटना जिला
दक्षिण में – नवादा और गया जिला
पूर्व में – शेखपुरा और लखीसराय जिला
पश्चिम में- जहानाबाद जिला

क्षेत्रफल
इस जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 2355 वर्ग किलोमीटर है.

प्रमुख नदियां : फल्गु, मोहने, जिरायन और कुंभारी

अर्थव्यवस्था- कृषि ,उद्योग और उत्पाद

इस जिले की अर्थव्यवस्था, कृषि, छोटे-मोटे उद्योग और पर्यटन पर आधारित है.
कृषि
इस जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि आधारित है.
जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फसल हैं: धान, गेहूं, मक्का, दलहन, आलू, प्याज, फल और सब्जियां.

उद्योग
जिले में कृषि पर आधारित छोटे-मोटे उद्योग हैं.

पर्यटन
नालंदा बिहार का प्रमुख पर्यटन आकर्षण है. जिले की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान है.

प्रशासनिक सेटअप

नालंदा जिले के डीम कौन है 

प्रमंडल: पटना
प्रशासनिक सहूलियत के लिए इस जिले को 3 अनुमंडलों और 20 प्रखंडों में बांटा गया है.

अनुमंडल: इस जिले के अंतर्गत कुल 3 अनुमंडल हैं-बिहारशारीफ, हिलसा और राजगीर.

प्रखंड : इस जिले के अंतर्गत कुल 20 प्रखंड आते हैं-
गिरियक, रहुई, नुरसराय, हरनौत, चंडी, इस्लामपुर, राजगीर, अस्थावां, सरमेरा, हिलसा, बिहारशरीफ, एकंगरसराय, बेन, नगरनौसा, करायपरसुराय, सिलाव, परवलपुर, कतरीसराय, बिन्द, थरथरी.

नगर निकायों की संख्या : 4

ग्राम पंचायतों की संख्या: 249
कुल गांवों की संख्या: 1084

निर्वाचन क्षेत्र
लोकसभा
इस जिले के अंतर्गत एक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र आता है : नालंदा

विधानसभा
इस जिले के अंतर्गत कुल 7 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं: अस्थावां , बिहारशरीफ, राजगीर, इस्लामपुर, हिलसा, नालन्दा और हरनौत.

नालंदा जिले की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी)

2011 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार
कुल जनसंख्या : 28.78 लाख
पुरुष : 14.97 लाख
महिला: 13.80 लाख

जनसंख्या वृद्धि (दशकीय) : 21.39%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर) : 1222
बिहार की जनसंख्या में अनुपात : 2.76%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष) : 922

औसत साक्षरता: 64.43%
पुरुष साक्षरता : 74.86%
महिला साक्षरता: 53.10%

शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या : 15.91%
ग्रामीण जनसंख्या: 84.09%

नालंदा जिले में कितने हिंदू हैं?

अधिकारिक जनगणना 2011 के अनुसार, नालंदा एक हिंदू बहुसंख्यक जिला है. जिले में हिंदुओं की जनसंख्या 92.78% है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 6.88% है. अन्य धर्मो की बात करें तो जिले में ईसाई 0.07%, सिख 0.01%, बौद्ध 0.01% और जैन 0.02% हैं.

नालंदा जिले में पर्यटन स्थल

नालंदा खंडहर

14 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस स्थान पर प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेष मिले हैं. खुदाई में मिले सभी इमारतों का निर्माण लाल पत्थर से किया गया था.

पावापुरी मंदिर

पावापुरी जल मंदिर, राजगीर और बोधगया के समीप पावापुरी में स्थित है. जैन धर्म मानने वालों के लिए यह स्थान अत्यंत ही पवित्र है. माना जाता है कि भगवान महावीर को यहीं पर मोक्ष की प्राप्ति हुई थी.

पांडु पोखर

पांडू पोखर राजगीर में स्थित है. 22 एकड़ में फैला यह क्षेत्र भारत के अद्भुत इतिहास का उदाहरण है. कहा जाता है कि महाभारत काल में महाराजा पांडू ने राजगृह पर आक्रमण किया था और इस स्थान को घोड़े के अस्तबल में बदल दिया था. जब महाराज पांडु यहां से जाने लगे तो यहां पर एक छोटा घाटी नुमा स्थान बन गया जिसमें बाद में वर्षा का पानी भर गया. इस तरह से पांडु पोखर अस्तित्व में आया. कहा जाता है कि पांडवों के पिता महाराज पांडु यहां स्नान करने आते थे और उन्हीं के नाम पर इसे पांडु पोखर के नाम से जाना जाता है. सरोवर के मध्य में महाराज पांडु की 40 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है. सौंदर्यीकरण करके इसे आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है. आप यहां नौकायन का आनंद उठा सकते हैं .

नालंदा कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग
इस जिले का अपना हवाई अड्डा नहीं है.
निकटतम हवाई अड्डा : जय प्रकाश नारायण हवाई अड्डा (PAT) नालंदा  से 67 किलोमीटर की दूरी पर पटना में स्थित है.
दूसरा नजदीकी हवाई अड्डा: गया एयरपोर्ट (GAY) , नालंदा से 104 किलोमीटर की दूरी पर गया में स्थित है.

रेल मार्ग
रेल मार्ग से आप आसानी से यहाँ  आ सकते हैं . देश के अन्य प्रमुख शहरों से नालंदा के लिए नियमित ट्रेन चलती है.
नजदीकी रेलवे स्टेशन: नालंदा (NLD), बिहार शरीफ जंक्शन (BEHS) और राजगीर स्टेशन (RGD)

सड़क मार्ग
नालंदा, राज्य और देश के प्रमुख नगरों से शहरों से सड़क मार्ग से अच्छे से जुड़ा हुआ है. यहां से पटना और अन्य जगहों के लिए बस सुविधा उपलब्ध है. आप चाहे तो अपने निजी वाहन कार या बाइक से भी यहां आ सकते हैं.

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