Ranjeet Bhartiya 30/01/2020

मथुरा भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक जिला है. उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भाग में आने वाला यह जिला आगरा प्रमंडल के अंतर्गत आता है. मथुरा शहर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है. इस जिले को भगवान कृष्ण के जन्म स्थली होने का गौरव प्राप्त है. हिंदुओं के सात सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक होने के कारण यह एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है. यह जिला अपने परंपरा, संस्कृति, संगीत और आध्यात्मिक केंद्र होने के कारण विश्व भर में प्रसिद्ध है.जिले की कितनी जनसंख्या है? कितने तहसील है ? मथुरा जिले की पूरी जानकारी।

मथुरा जिले की भौगोलिक स्थिति

बाउंड्री (चौहद्दी)
जिले की सीमा राजस्थान और हरियाणा से लगती है. यह जिला कुल 6 जिलों से घिरा हुआ है.
उत्तर में-अलीगढ़ जिला और हरियाणा का पलवल जिला
दक्षिण में-आगरा जिला
पूरब में-अलीगढ़ जिला और हाथरस जिला
पश्चिम में-राजस्थान का भरतपुर जिला और हरियाणा का मेवात जिला

समुद्र तल से ऊंचाई
यह जिला समुद्र तल से 171.6-178 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. मथुरा शहर समुद्र तल से लगभग 174 मीटर (570 फीट) की औसत ऊंचाई पर स्थित है.

क्षेत्रफल
इस जिले की भौगोलिक क्षेत्रफल 3340 वर्ग किलोमीटर है.

प्रमुख नदियां:
यह जिला  यमुना के तट पर स्थित है.
जिले के प्रमुख नदियां हैं: यमुना, करवन और पथवाहा.

अर्थव्यवस्था-कृषि, उद्योग और उत्पाद

इस जिले की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन, मछली पालन, वन, पर्यटन, उद्योग और व्यवसाय पर आधारित है.

कृषि

जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फसल हैं: गेहूं, बार्ली, बाजरा, ज्वार, मक्का, दलहन (उड़द, मूंग, चना, मटर और अरहर), तिलहन (सरसों), आलू और सब्जियां.

पशुपालन

कृषि के बाद पशुपालन का जिले के अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है. पशुओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जिले में आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन की सुविधा उपलब्ध है. जिले में वेटरनरी कॉलेज, पिग डेवलपमेंट सेंटर, पोल्ट्री डेवलपमेंट सेंटर और शीप डेवलपमेंट सेंटर कार्यरत है. जिले के प्रमुख पशु धन हैं: गाय, भैंस, सूअर, बकरी और पोल्ट्री.

मछली पालन

जिले के नदियों और जलाशयों से मछली का उत्पादन किया जाता है. जिले में 22 से ज्यादा प्रकार के मछलियां पाई जाती है.

वन

जिले में पाए जाने वाले प्रमुख वन संपदा हैं: बबूल, नीम, बरगद, शीशम, पीपल और आम.

खनिज

यह जिला खनिज संपन्न नहीं है. जिले में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज हैं: क्ले, सिलिका सैंड और कंकर.

पर्यटन

हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थल होने के कारण यहां प्रतिवर्ष भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. पर्यटन का जिले के अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है.

उद्योग

जिले में स्थित प्रमुख उद्योग हैं: कृषि आधारित उद्योग, कॉटन टैक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फर्नीचर उद्योग, धातु पर आधारित उद्योग, पेपर उद्योग, खादी उद्योग, लघु/कुटीर उद्योग, और भारत इलेक्ट्रिक इंडस्ट्रीज.

व्यापार और वाणिज्य

जिले से निर्यात किए जाने वाले प्रमुख पदार्थ हैं: गुड़, तिलहन, खाद्य तेल, फल, कॉटन, पशु, सीमेंट, लोहा, स्टील और लकड़ी.जिले में आयात किए जाने वाले प्रमुख पदार्थ हैं: रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं, नमक, औषधि, बिल्डिंग मटेरियल और रसायन.

प्रशासनिक सेटअप

प्रमंडल: आगरा
प्रशासनिक सहूलियत के लिए मथुरा जिले को 5 तहसीलों (अनुमंडल) और 10 विकासखंडो (प्रखंड/ ब्लॉक) में बांटा गया है. तहसील (अनुमंडल):
 जिले को कुल 5 तहसीलों में बांटा गया है:
मथुरा, गोवर्धन, छाता, मांट और महावन.
विकासखंड (प्रखंड):
मथुरा जिले को कुल 10 विकासखंडों (प्रखंडों) में बांटा गया है: मथुरा, गोवर्धन, चौमुहा, नंदगांव, छाता, नौझील, मांट, राया, बलदेव और फरह
पुलिस थानों की संख्या: 18
छावनी बोर्ड की संख्या: 1
नगर पालिका परिषदों की संख्या: 3
नगर पंचायतों की संख्या: 13
न्याय पंचायतों की संख्या: 89
ग्राम पंचायतों की संख्या: 479
गांवों की संख्या: 880
निर्वाचन क्षेत्र
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र: 1, मथुरा
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र: 5
मथुरा जिले के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं: छाता, मांट, गोवर्धन, मथुरा और बलदेव.

मथुरा जिले की डेमोग्राफीक्स  (जनसांख्यिकी)

2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार,  जिले की जनसांख्यिकी इस प्रकार है-
कुल जनसंख्या: 25.47 लाख
पुरुष: 13.67 लाख
महिला: 11.80 लाख
जनसंख्या वृद्धि (दशकीय): 22.78%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर): 763
उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में अनुपात: 1.27%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष): 863
औसत साक्षरता: 70.36%
पुरुष साक्षरता: 81.97%
महिला साक्षरता: 56.89%
शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या: 29.68%
ग्रामीण जनसंख्या: 70.32%

धार्मिक जनसंख्या

2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, यह एक हिंदू बहुसंख्यक जिला है. जिले में हिंदुओं की जनसंख्या 90.72% है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 8.52% है. अन्य धर्मों की बात करें तो जिले में ईसाई 0.12%, सिख 0.11%, बौद्ध 0.03% और जैन 0.08% हैं.
भाषाएं
 जिले में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं हैं: हिंदी, उर्दू और ब्रज.

मथुरा और वृंदावन आकर्षक स्थल 

मथुरा जिले में पौराणिक, धार्मिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कई दर्शनीय स्थल हैं. जिले में स्थित प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में संक्षिप्त विवरण:

श्री कृष्ण जन्मभूमि

यह प्रसिद्ध मंदिर मथुरा शहर के मध्य में स्थित है. हिंदुओं के पवित्रतम तीर्थ स्थलों में एक इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि जहां पर यह मंदिर स्थित है वहीं पर भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था.

द्वारकाधीश मंदिर

भगवान श्री कृष्ण को समर्पित यह मंदिर यमुना नदी के तट पर स्थित है. इस मंदिर का निर्माण 1814 में किया गया था.

गीता मंदिर

यह प्रसिद्ध मंदिर मथुरा जंक्शन से लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित है.

श्री जंबू स्वामी दिगंबर जैन मंदिर

यह प्रसिद्ध मंदिर जैन धर्मावलंबियों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है. कहा जाता है कि अंतिम केवली श्री जंबू स्वामी ने यहीं पर निर्वाण प्राप्त किया था.

विश्राम घाट

यमुना नदी के तट पर स्थित इस घाट के बारे में मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण ने कंस का वध करने के बाद यहां पर विश्राम किया था.

गोकुल

मथुरा से लगभग 15 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित गोकुल का पौराणिक महत्व है. ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण ने यहां पर अपना बचपन व्यतीत किया था.

वृंदावन

मथुरा से लगभग 11 किलोमीटर दूरी पर स्थित वृंदावन हिंदुओं के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है. बृज भूमि क्षेत्र में स्थित इस स्थान के बारे में मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण का बचपन ज्यादातर इसी स्थान पर व्यतीत हुआ था. यहां श्री कृष्ण और राधा को समर्पित कई दर्शनीय मंदिर स्थित हैं.

गोवर्धन

मथुरा से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गोवर्धन हिंदुओं के लिए एक पवित्र तीर्थस्थल है.

रमन रेती गोकुल

मथुरा और महावन के बीच स्थित इस स्थान के बारे में कहा जाता है कि संत रसखान ने यहां पर तपस्या किया था. यहां रमन बिहारी जी का मंदिर है जिसमें राधा कृष्ण की अष्ट धातु की बनी हुई मूर्ति विराजमान है. रमन रेती मंदिर के परिसर में हर तरफ रेत ही रेत है. ऐसी मान्यता है कि इस रेत में लोटने से बीमारियां दूर हो जाती हैं

राधा रमन जी वृंदावन

भगवान कृष्ण को समर्पित इस प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण 1542 में किया गया था.

श्री द्वारकाधीश मंदिर

भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 1814 में किया गया था. यह मंदिर सुंदर नक्काशी, कला, चित्रकारी और हिंदू देवी देवताओं के सुंदर मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है.

इस्कॉन मंदिर

श्री कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर का निर्माण 1975 में किया गया था. कहा जाता है कि इसी स्थान पर भगवान श्री कृष्ण अपने मित्रों के साथ खेला करते थे.

बांके बिहारी जी मंदिर

जिले के वृंदावन धाम में रमन रेती पर स्थित भगवान श्री कृष्ण को समर्पित यह मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है.

प्रेम मंदिर

वृंदावन के नजदीक स्थित भगवान श्री कृष्ण को समर्पित यह मंदिर अपनी सुंदरता और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है.

गोपेश्वर महादेव मंदिर

भगवान शिव को समर्पित यह प्रसिद्ध मंदिर वृंदावन में स्थित है.

मथुरा कैसे पहुंचे?

हवाई अड्डा: मथुरा जिले का अपना हवाई अड्डा नहीं है. यहां के लिए डायरेक्ट हवाई सेवा उपलब्ध नहीं हैं. निकटतम हवाई अड्डा: पंडित दीनदयाल उपाध्याय एयरपोर्ट/आगरा एयरपोर्ट (Code: AGR).
यह हवाई अड्डा मथुरा से लगभग 68 किलोमीटर की दूरी पर आगरा में स्थित है. दूसरा नजदीकी हवाई अड्डा: इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दिल्ली (Code: DEL). यह हवाई अड्डा मथुरा से लगभग 168 किलोमीटर की दूरी पर भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है.

रेल मार्ग

मथुरा रेल मार्ग से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तथा देश के विभिन्न हिस्सों से अच्छे से जुड़ा हुआ है. निकटतम रेलवे स्टेशन: मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन (Code: MTJ), वृंदावन रोड रेलवे स्टेशन Code: VRBD) और मथुरा कैंट रेलवे स्टेशन (Code: MRT).

सड़क मार्ग

मथुरा सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से अच्छे से जुड़ा हुआ है. यहां के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध है. आप यहां अपने निजी वाहन कार या बाइक से भी आ सकते हैं.
नेशनल हाईवे 2 (NH 2) और स्टेट हाईवे 33 (SH 33) जिले से होकर गुजरती है.

मथुरा जिले की कुछ रोचक बातें:

2011 के जनगणना के अनुसार,
1. जनसंख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में 37वां स्थान है.
2. लिंगानुपात के मामले में उत्तर प्रदेश में 66वां स्थान है.
3. साक्षरता के मामले में उत्तर प्रदेश में 30वां स्थान है.
4. सबसे ज्यादा बसे गांव वाला तहसील: मथुरा (216).
5. सबसे कम बसे गांव वाला तहसील: महावन(148)
6. जिले में कुल निर्जन गांवों की संख्या: 144.

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