Ranjeet Bhartiya 05/01/2022
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Last Updated on 05/01/2022 by Sarvan Kumar

बैश्य कपाली या कपाली (Baishya Kapali or Kapali) भारत और बांग्लादेश में पाई जाने वाली एक जाति है. परंपरागत रूप से यह एक कृषक और बुनकर जाति है. यह पशुपालन और अन्य व्यवसाय भी करते हैं. यह जूट की खेती और जूट के बोरियों के निर्माण में विशेष रूप से कुशल होते हैं. इनका इतिहास समृद्ध और गौरवशाली रहा है. जूट से बोरियां तैयार करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के कारण यह धीरे-धीरे वे समृद्ध होते गए और उनमें से कुछ धनी जमींदार भी बन गए. महाराजा प्रतापादित्य के शासनकाल के दौरान, कई कपाली सरकार के साथ-साथ सेना में भी कार्यरत थे. बता दें कि कपाली मजदूर, नौकर या घरेलू नौकर के रूप में काम नहीं करते हैं. आरक्षण प्रणाली के अंतर्गत इन्हें पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class, OBC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. भारत में यह मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में पाए जाते हैं. आइए जानते हैं बैश्य कपाली का इतिहास, बैश्य कपाली की उत्पति कैसे हुई?

बैश्य कपाली किस धर्म को मानते हैं?

यह हिंदू धर्म का पालन करते हैं.कपाली स्वभाव से बड़े धार्मिक होते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों का श्रद्धा पूर्वक पालन करते हैं. कपाली मूल रूप से कश्मीर शैव धर्म को मानते थे. बाद में यह बौद्ध धर्म से प्रभावित होकर बौद्ध बन गए. भक्ति आंदोलन के बाद, कपाली वैष्णव बन गए. वर्तमान में, ज्यादातर कपाली वैष्णव है, जबकि इनमें से कुछ शाक्त हैं. कपालियों के प्रमुख गोत्र हैं-कश्यप, शिव, अलम्बयान और मौदगल्य. इस समुदाय के कुछ कपाली को अपने उपनाम के रूप में भी प्रयोग करते हैं. इनके अन्य प्रमुख सरनेम हैं- मांझी, मंडल, शिकदार, माला और हलदर.

बैश्य कपाली की उत्पत्ति कैसे हुई?

इनकी उत्पत्ति के बारे में अनेक मान्यताएं हैं, जिसके बारे में नीचे बताया गया है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिंदू धर्म के 33 करोड़ देवताओं के 11 रुद्रो में से 9वें को कपाली के नाम से जाना जाता है. वामन पुराण के अनुसार, रुद्र सप्तर्षियों में से एक कश्यप ऋषि और अदिति के पुत्र हैं. जबकि मत्स्य पुराण के अनुसार, रुद्र सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा और सुरभि के पुत्र हैं. महाभारत के परिशिष्ट (appendix) हरिवंश में रूद्र को कश्यप ऋषि और सुरभि के संतान के रूप में वर्णन किया गया है. महाभारत के आदिपर्व में उल्लेख किया गया है कि कपाली ने एक ऋषि की पुत्री से विवाह किया और उन्हें एक पुत्र हुआ. बंगाली जाति परिचय An Introduction of Bengali Castes) नामक पुस्तक के लेखक शौरींद्र कुमार घोष के अनुसार, कपाली जाति के लोग रुद्र कपाली के पुत्र के वंशज हैं. ब्रिटिश नृवंशविज्ञानी (ethnographer) और अंग्रेजी हुकूमत के दौरान भारतीय सिविल सेवा में अधिकारी रहे सर हर्बर्ट होप रिस्ले (Sir Herbert Hope Risley) ने कापालियों को “पूर्वी बंगाल की एक खेती करने वाली और बुनाई करने वाली जाति के रूप में वर्णन किया है. रिस्ले के अनुसार, कपाली कर्मकार पिता और एक तेली माता की संतान होने का दावा करते हैं. 1860 के दशक में ढाका के एक ब्रिटिश सिविल सर्जन और लेखक जेम्स वाइज (James Wise) भी कपाली जाति के कर्मकार पिता और तेरी माता से उत्पन्न हुई मिश्रित जाति के दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं.

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