Ranjeet Bhartiya 07/04/2022
नहीं रहे सबके प्यारे ‘गजोधर भैया’। राजू श्रीवास्तव ने 58 की उम्र में ली अंतिम सांस। राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद से वो 41 दिनों से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। उनकी आत्मा को शांति मिले, मुझे विश्वास है कि भगवान ने उसे इस धरती पर रहते हुए जो भी अच्छा काम किया है, उसके लिए खुले हाथों से स्वीकार करेंगे #RajuSrivastav #IndianComedian #Delhi #AIMS Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 07/04/2022 by Sarvan Kumar

बारी (Bari) भारत में पाई जाने वाली एक जाति है.
इनका पारंपरिक व्यवसाय पत्तों से प्लेटें बनाना है, जिसे पत्तल या दौना कहा जाता है  हिंदू जाति व्यवस्था के पदानुक्रम (hierarchy) में, इन्हें स्वच्छ जाति (clean caste) के रूप में गिना जाता है. रसेल और हीरालाल ने इन्हें घरेलू कामगार (घरेलू सहायक या घरेलू नौकर) और पत्तों के प्लेटों के निर्माता के रूप में वर्णित किया है, जिनसे ब्राह्मण पानी स्वीकार करते हैं त्योहारों पर सभी हिंदुओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले पत्तों के प्यालों और प्लेटों का निर्माण करने, आत्म-निषेध जीवन का अनुकरण करने वाले विशुद्ध ब्राह्मणों द्वारा खाने के लिए केवल पत्तों से बनी प्लेटों का उपयोग करने, तथा समाज के सभी वर्गों (उच्च से निम्नतम जातियों) द्वारा बड़े पैमाने पर उपयोग के
के कारण पत्ती-प्लेटों की मांग के परिणामस्वरूप
इनको सामाजिक व्यवस्था में काफी सम्मानजनक स्थान दिया गया है. आइए जाानते हैं बारी समाज का इतिहास, बारी की उत्पत्ति कैसे हुई?

बारी समाज एक परिचय

इनका इतिहास गौरवशाली रहा है. आवश्यकता पड़ने पर इस समाज के लोगों ने धर्म और राष्ट्र की रक्षा में बढ़-चढ़कर भाग लिया है. ऐसा कहा जाता है कि, पूर्व में इन्होंने अवध के राजा की सेवा में खुद को उत्कृष्ट सैनिक साबित किया था; और उनमें से कुछ राजा भी बने. बारियों को इनके कर्तव्य परायणता तथा अपने नियोक्ताओं (स्वामियों) के प्रति निष्ठा भाव और वफादारी के लिए जाना जाता है. इनके स्वामी भक्ति के बारे में एक कहावत प्रचलित है, “बारी अपने मालिक के लिए लड़ते हुए मर जाएगा.

बारी किस कैटेगरी में आते हैं?

सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करके सरकारी सेवाओं और संस्थानों; तथा राजनीति में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उद्देश्य से भारत सरकार की सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था “आरक्षण” के अंतर्गत इन्हें मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class, OBC) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है उड़ीसा में इन्हें अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है.

बारी की जनसंख्या, कहां पाए जाते हैं?

यह मुख्य रूप से उत्तरी भारत के राज्यों में फैले हुए हैं  मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र‌, उड़ीसा और दिल्ली में इनकी उपस्थिति है. उड़ीसा में यह मुख्य रूप से सुंदरगढ़, खुर्दा और बालेश्वर जिलों में पाए जाते हैं. यहां रहने वाले अधिकांश बारी भोजपुरी भाषा बोलते हैं.

बारी किस धर्म को मानते हैं?

यह हिंदू धर्म में आस्था रखते हैं और हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करते हैं. यह कई हिंदू देवी देवताओं की पूजा करते हैं, और हिंदू त्योहारों को श्रद्धा पूर्वक मनाते हैं. भगवान सूर्य में इनकी विशेष आस्था है.

बारी समाज का इतिहास

बारी समुदाय का नाम संस्कृत शब्द “वारी” से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है- ‘पानी’  इनकी परंपराओं के अनुसार, यह जलमार्ग के स्वामी थे

रसेल के अनुसार बारी समाज

रॉबर्ट वेन रसेल (R. V. Russell) ने इन्हें घरेलू सेवकों और परिचारिकाओं की जाति; तथा पत्तों से बने प्लेटों के निर्माता (Maker of leaf-plates) के रूप में वर्णित किया है, जो उत्तर भारत में निवास करते हैं विवाह और अन्य मनोरंजनों में तथा यात्रा पर मशाल जलाने तथा मशाल वाहक के रूप में काम करते हैं. इनमें से कुछ ने कृषि को अपना लिया है.

M. A. Sherring के अनुसार बारी समाज

एम. ए. शेरिंग (M. A. Sherring) ने इन्हें एक आदिवासी जनजाति (aboriginal tribe) के रूप में वर्णित किया है, जिसका केवल एक ही कुल (clan) है.
इनका विशेष व्यवसाय पत्तों से प्लेटो और प्यालो को बनाना है. इसके अलावा, यह मशाल वाहक और नाइयों के रूप में भी काम करते हैं. चूंकि यह अपना अधिकांश समय जंगल में पत्तियों को इकट्ठा करने में बिताते हैं, इसीलिए यह ना केवल पत्तल, बल्कि जंगल के पेड़ों को काटने के व्यवसाय में कार्यरत हैं

Risley के अनुसार बारी समाज

ब्रिटिश नृवंशविज्ञानी, औपनिवेशिक प्रशासक और भारतीय सिविल सेवा के सदस्य सर हर्बर्ट होप रिस्ले
(Sir Herbert Hope Risley) इस जाति के बारे में टिप्पणी करते हुए लिखा है कि: “जॉन नेस्फील्ड (John Nesfield) बारी को बनमानुष (Banmanush); जंगल में निवास करने वाला मनुष्य; और मुसहर (Musahar) जनजाति की शाखा के रूप में मानते हैं. अगर यह बात सही है तो बारी एक गैर-आर्य जनजाति की एक शाखा है”.

बारी समाज की उत्पत्ति की पहली मान्यता

बारी जाति की उत्पत्ति के बारे में निम्नलिखित कथा प्रचलित है:
एक बार परमेश्वर अपने पूर्वजों की आत्माओं को चावल का दूध चढ़ा रहे थे. इस अनुष्ठान के दौरान साधक या कर्ता को एक उपहार प्रस्तुत करना होता है जिसे विक्राया दान कहा जाता है, जिसे दूसरों द्वारा स्थिति के नुकसान के बिना (पद की हानि के बिना) स्वीकार नहीं किया जा सकता है. परमेश्वर ने विभिन्न ब्राह्मणों को उपहार दिया, लेकिन सभी ने इसे अस्वीकार कर दिया. तो‌ उन्होंने मिट्टी का एक आदमी बनाया, और उस मूर्ति को फूंका और उसे जीवन दिया, और फिर उसे उस उपहार को स्वीकार करने के लिए कहा जिसे ब्राह्मणों ने अस्वीकार कर दिया था. यह आदमी, जो पहला बारी था, इस शर्त पर सहमत हुआ कि सभी उसके साथ पीएं और उसकी जाति की शुद्धता को मान्यता दें. परमेश्वर ने तब उसे एक प्याले में पानी लाने को कहा और सभी जातियों की उपस्थिति में उसे पी लिया. और इसके परिणामस्वरूप यह बात निर्धारित हो गया कि सभी हिंदू जातियां बारी के हाथ से पानी लेंगे. इस समुदाय के लोग कहते हैं कि व्यक्तिगत सुंदरता के कारण इनके पहले पूर्वज का नाम सुंदर रखा गया था

बारी समाज की उत्पत्ति की दूसरी मान्यता

एक अन्य मान्यता के अनुसार, श्री राम चरित्र मानस में उल्लेख किया गया है कि बारी समाज के पहले राजा सुग्रीव थे. उनके पुत्र दधिवल महा पराक्रमी थे. राम-रावण युद्ध में उन्होने अजेय माने जाने वाले रावण के पुत्र नारांतक का वध किया था.

बारी समाज के प्रमुख व्यक्ति

रूपन बारी
रूपन बारी का उल्लेख उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय लोक गीत और लोक साहित्य अल्लाह उदल में मिलता है. वीर शिरोमणि रूपन बारी आल्हा ऊदल के सेना के वीर सेनापति थे। जो किसी भी देश में जाते थे तो पहली तलवार उस देश के राजा के सेनाओं पर वीर योद्धा रूपन बारी की ही चलती थी.

कीरत बारी
कीरत बारी ने राष्ट्रभक्ति की मिसाल पेश करते हुए, अपने जान पर खेलकर बनवीर सिंह से राजा उदय सिंह के प्राणों की रक्षा की थी.


References;

(a). Singh, K. S.; India, Anthropological Survey of (1998). India’s Communities. Oxford University Press. pp. 304–06. ISBN 978-0-19-563354-2. Retrieved 20 April 2021.

(b). Srivastava, Sahab Lal (1974). Folk Culture and Oral Tradition: A Comparative Study of Regions in Rajasthan and Eastern U.P

(c ) Title: The Tribes and Castes of the Central Provinces of India, Volume II
Author: R. V. Russell

(d). Hindu Tribes and Castes as Represented in Benares
Book by M. A. Sherring

(e). http://www.ncbc.nic.in/User_Panel/CentralListStateView.aspx

(f). https://www.scstrti.in/index.php/communities/sc-communities/108-sc-communities/335-bari

(g). Gahlot, Sukhvir Singh; Dhar, Banshi; manthra. Castes and Tribes of Rajasthan

(h). https://www.jagran.com/uttar-pradesh/gorakhpur-city-13108930.html

Advertisement
Shopping With us and Get Heavy Discount
 
Disclaimer: Is content में दी गई जानकारी Internet sources, Digital News papers, Books और विभिन्न धर्म ग्रंथो के आधार पर ली गई है. Content  को अपने बुद्धी विवेक से समझे। jankaritoday.com, content में लिखी सत्यता को प्रमाणित नही करता। अगर आपको कोई आपत्ति है तो हमें लिखें , ताकि हम सुधार कर सके। हमारा Mail ID है jankaritoday@gmail.com. अगर आपको हमारा कंटेंट पसंद आता है तो कमेंट करें, लाइक करें और शेयर करें। धन्यवाद Read Legal Disclaimer 
 

Leave a Reply