Ranjeet Bhartiya 10/04/2022
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Last Updated on 10/04/2022 by Sarvan Kumar

बिंद (Bind) भारत में पाई जाने वाली एक जाति है.
निकटतम समूह जो बिंद के करीब आता है, वह निषाद हैं. ब्रिटिश सिविल सेवक रॉबर्ट वेन रसेल (R.V. Russell), जो ब्रिटिश भारत के मध्य प्रांत के लिए नृवंशविज्ञान के अधीक्षक के रूप में अपनी भूमिका के लिए जाने जाते थे, ने ‌ बिंद को बिहार और और संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) की एक बड़ी गैर-आर्य (non-Aryan) जाति के रूप में वर्णित किया है. ब्रिटिश नृवंशविज्ञानी, औपनिवेशिक प्रशासक सर हर्बर्ट होप रिस्ले (Sir Herbert Hope Risley) के अनुसार; जीविकोपार्जन के लिए यह कृषि, मिट्टी के काम (earthwork), मछली पकड़ने, शिकार, नमक बनाने और स्वदेशी जड़ी-बूटियों और औषधियों को इकट्ठा करने में कार्यरत एक जनजाति हैं .आइए जानते हैं, बिंंद समाज का इतिहास बिंद की उत्पति कैसे हुई?

बिंद समाज एक परिचय

वर्तमान परिस्थिति (कैटेगरी): भारत सरकार के सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था आरक्षण के अंतर्गत इन्हें बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, और त्रिपुरा में अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class ,OBC) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम में इन्हें अनुसूचित जाति (Scheduled Caste, SC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है.

पॉपुलेशन, कहां पाए जाते हैं? यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में पाए जाते हैं. बिहार में यह मुख्य रूप से समस्तीपुर, बेगूसराय, दरभंगा और सारण जिलों में पाए जाते हैं . उत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) में केंद्रित हैं, और भोजपुरी भाषा बोलते हैं.

धर्म: यह सनातन हिंदू धर्म को मानते हैं. हिंदू देवी देवताओं जैसे भगवान शिव, माता पार्वती, हनुमान, सत्यनारायण (विष्णु), देवी दुर्गा और माता काली की उपासना करते हैं. रीति-रिवाजों में यह केवट जैसे समूहों के समान हैं.

भाषा: यह हिंदी, भोजपुरी, मैथिली और अंगिका बोलते हैं.

बिंद समाज का उप विभाजन

बिंद 7 व्यावसायिक समूहों में उप-विभाजित किया गया हैं- सुरैया, निषाध, कुलावत, मल्लाह, गुरिया, केवट और बिंद. इन उप-समूहों में से प्रत्येक का अपना विशिष्ट व्यवसाय है. मिसाल के तौर पर, केवट, निषाध और कुलावत की विशेषता मछली पकड़ना है; जबकि मल्लाह और गुरिया पारंपरिक रूप से नाविक हैं.

बिंद समाज का इतिहास

बिंद शब्द “विंध्य” से बना है, जिसका संस्कृत में शाब्दिक अर्थ होता है- “शिकारी”. बिंद मूल रूप से विंध्य के रहने वाले हैं. ऐतिहासिक रूप से विंध्यांचल क्षेत्र के आसपास के इलाकों में रहने वाला यह समुदाय कालांतर में देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में फैल गया. इनकी उत्पत्ति के बारे में निम्नलिखित मान्यताएं प्रचलित हैं-

बिंद समाज की उत्पति की पहली मान्यता

बिंद समाज के बीच मौजूद परंपराएं विंध्य पहाड़ियों में इनकी उत्पत्ति का पता लगाने के लिए दावा करती हैं. किंवदंतियों के अनुसार, एक बार एक यात्री विंध्य की पहाड़ियों की तलहटी से गुजर रहा था. उसने बांस के एक झुंड से एक विचित्र बांसुरी जैसी आवाज सुनी. उसने एक टहनी को काटा और उसमें से एक मांसल पदार्थ निकाल लिया जो बाद में एक व्यक्ति के रूप में विकसित हुआ. इसी व्यक्ति को बिंद समाज के लोगों का पूर्वज माना जाता है

बिंद समाज की उत्पति की दूसरी  मान्यता

एक अन्य कथा के अनुसार, बिंद और नोनिया पहले एक ही थे. वर्तमान नुनिया बिंद के वंशज हैं जिन्होंने एक मुहम्मदन राजा के लिए कब्र खोदने की सहमति दी थी और ऐसा करने के लिए उन्हें बहिष्कृत कर दिया गया था . बिहार और असम में उनकी परंपराओं के अनुसार, शुरुआती मुस्लिम शासकों द्वारा नोनिया को कब्र खोदने के लिए मजबूर किया गया था, जबकि बिंद के पूर्वज जंगलों में भाग गए, और एक समुदाय में विकसित हुए. एम. ए. शेरिंग (M. A. Sherring) बिंद को नोनिया की एक शाखा के रूप में मानते हैं; जबकि अन्य नोनिया को बिंद की एक उपजाति मानते हैं.

बिंद समाज की उत्पति की तीसरी मान्यता

एक तीसरी के किंवदंती के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में महादेव ने मिट्टी की एक गांठ बनाई और उसे जीवन प्रदान किया. इस प्रकार उत्पन्न प्राणी ने महादेव से पूछा कि उसे क्या खाना चाहिए. भगवान ने एक तालाब की ओर इशारा किया और कहा कि तालाब के मछली और उसके किनारे के पास उगने वाले जंगली चावल खाओ. इसी व्यक्ति के वंशज बिंद कहलाए. ब्रिटिश प्राच्यविद् (orientalist) विलियम क्रुक के अनुसार; पितृपक्ष के पवित्र पखवाड़े को छोड़कर, इस समुदाय के लोग बड़े पैमाने पर मछली का उपयोग करते हैं.


References;
(a). Title: The Tribes and Castes of the Central Provinces of India–Volume I (of IV)
Author: R.V. Russell

(b). The Tribes and Castes of Bengal, Volume 1
By Sir Herbert Hope Risley

(c ). Russell, Robert Vane.
The Tribes and Castes of the Central Provinces of India, Volume 4

(d). People of India Uttar Pradesh Volume XLII Part One edited by A Hasan & J C Das

(e). People of India Bihar Volume XVI Part One edited by S Gopal & Hetukar Jha

(f). People of India Uttar Pradesh Volume XLII Part One edited by A Hasan & J C

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