Ranjeet Bhartiya 24/03/2022
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Last Updated on 24/03/2022 by Sarvan Kumar

बयार या बियार (Bayar, Biyar or Biar) भारत में निवास करने वाली एक जाति है. बयार पारंपरिक रूप से कृषकों और चरवाहों का समुदाय है. इनकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर है. यह विभिन्न प्रकार के फसल और सब्जियां जैसे आलू आदि उगाते हैं. यह विभिन्न प्रकार के पशुओं जैसे गाय, भैंस आदि पालने का काम करते हैं. पशुपालन इनके जीवन यापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बियार आमतौर पर एक शांतिप्रिय और काफी सम्मानित समुदाय है. उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अंग्रेजी अखबार Times of India में छपे एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों में इस जाति के मतदाताओं की संख्या 40,000 से अधिक है‌. इन सीटों पर यह चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की हैसियत रखते हैं. इसीलिए चुनाव नजदीक आते ही विभिन्न राजनीतिक दल इस समुदाय का समर्थन हासिल करने का प्रयास तेज कर देते हैं. इस समुदाय के लोग हिंदू धर्म का पालन करते हैं. यह हिंदी, भोजपुरी और अवधी बोलते हैं.आइए जानते हैं बयार (Bayar) समाज का इतिहास, बयार शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

बियार समाज एक परिचय

वर्तमान परिस्थिति (कैटेगरी) : भारत सरकार के सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था आरक्षण प्रणाली के अंतर्गत इन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class, OBC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. आर्थिक, शैक्षणिक, राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में इन्हें अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribe, ST) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

पॉपुलेशन, कहां पाए जाते हैं? : यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पाए जाते हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में इनकी अच्छी खासी उपस्थिति है. वाराणसी, चंदौली (चकिया), मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में यह बड़ी संख्या में निवास करते हैं. प्रतिष्ठित समाचार पत्र अमर उजाला में छपी एक रिपोर्ट में रॉबर्ट्सगंज से लोकसभा सांसद पकौड़ी लाल कोल के अनुसार; सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी एवं बलिया समेत पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में बियार समुदाय की आबादी लगभग चार लाख के करीब है.

बियार समाज का उप-विभाजन

बियार सख्ती से अंतर्विवाही (endogamous) समुदाय हैं. बियार समाज कई कुलों (कबीला/ Clan) में विभाजित है, जिसे कुरी कहा जाता है. इनके प्रमुख कुल हैं-कनौजिया (Kanaujiya), सकरवार (Sakarwar), बरवार (Barwar), महतो (Mahato), कहतो (Kahto) , काशी (Kashi) और बरहर (Barhar). यह उप समूह कुल या कबीला बहिर्विवाह के सिद्धांत का पालन करते हैं. आमतौर पर यह बहु-जाति के गांवों के अलग कोने में निवास करते हैं. इनकी प्रत्येक बस्ती में एक अनौपचारिक जाति परिषद होती है, जिसे बिरादरी पंचायत कहा जाता है. पंचायत झगड़ा-लड़ाई, विवाद, तालाब और विचार आदि मुद्दों से निपटने के लिए एक सामाजिक नियंत्रण के माध्यम के रूप में काम करती है.

बियार शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

कहा जाता है कि इस जाति के नाम की उत्पत्ति संभवतः हिंदी भाषा के शब्द “बेहड़उर” से हुई है. बेहड़उर शब्द को अंग्रेजी में Seedbed या Seedling Bed कहा जाता है. बेहड़उर स्थानीय मिट्टी के वातावरण को कहते हैं जिसमें बीज लगाया जाता है. अक्सर इसमें नियंत्रित वातावरण में बीज को बड़े युवा पौधों के रूप में उगाने के लिए उपयोग किया जाता है. बाद में इन बड़े पौधों को खेतों में या बगीचों में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है. अंकुरित होने वाले बीजों की संख्या बढ़ाने के लिए बेहड़उर या सीडलिंग बेड का उपयोग किया जाता है. कहा जाता है कि इस समुदाय का यह नाम चावल की खेती करने वालों और तटबंधों के निर्माता के रूप में अपने व्यवसाय के कारण पड़ा है.

बियार समाज का इतिहास

रॉबर्ट वेन रसेल (R.V. Russell) ने अपनी किताब “The Tribes and Castes of the Central Provinces of India-Volume I (of IV)” में इन्हें संयुक्त प्रांत के पूर्वी जिलों से संबंधित मजदूरों की एक जाति के रूप में वर्णित किया है. रसेल के अनुसार, यह कोरबा जमींदारी (जो वर्तमान छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित है) में पाए जाते हैं, और पेशेवर खुदाई करने वाले हैं. बता दें कि संयुक्त प्रांत (United Provinces) ब्रिटिशकालीन भारत में तथा भारत के स्वतंत्र होने के बाद तक एक प्रमुख प्रान्त था, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड को मिलाकर बनता है.रसेल के अनुसार, यह स्पष्ट रूप से कुछ हिंदू रक्त के साथ आदिम जनजातियों से प्राप्त मिश्रित जाति हैं.


References;

Book Title: The Tribes and Castes of the Central Provinces of India-Volume I (of IV)Author: R.V. Russell

People of India Uttar Pradesh Volume XLII Part One edited by A Hasan & J C Das pages 229 to 234 Manohar Publications

https://timesofindia.indiatimes.com/city/varanasi/in-up-shah-eyeing-backward-castes/articleshow/46650555.cms

https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/sonebhadra/demand-to-include-biar-caste-in-st-sonbhadra-news-vns6097367165

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