Ranjeet Bhartiya 09/01/2022
नहीं रहे सबके प्यारे ‘गजोधर भैया’। राजू श्रीवास्तव ने 58 की उम्र में ली अंतिम सांस। राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद से वो 41 दिनों से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। उनकी आत्मा को शांति मिले, मुझे विश्वास है कि भगवान ने उसे इस धरती पर रहते हुए जो भी अच्छा काम किया है, उसके लिए खुले हाथों से स्वीकार करेंगे #RajuSrivastav #IndianComedian #Delhi #AIMS Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 13/01/2022 by Sarvan Kumar

Iभठियारा या भटियारा (Bhatiara) भारत में पाई जाने वाली एक मुस्लिम जाति समुदाय है. इन्हें फारूकी (Farooqi) और शेख फारूकी (Shaikh Farooqi) के नाम से भी जाना जाता है. रिजर्वेशन सिस्टम के अंतर्गत इन्हें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अन्य पिछड़ी जाति (Other Backward Class, OBC) का दर्जा प्राप्त है.यह मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में पाए जाते हैं. झारखंड और मध्यप्रदेश में भी इनकी आबादी है. उत्तर प्रदेश में यह समुदाय ग्रैंड ट्रंक रोड के साथ-साथ फैला हुआ है. लेकिन यहां यह मुख्य रूप से प्रयागराज और फतेहपुर में केंद्रित हैं और अवधी हिंदी और उर्दू भाषा बोलते हैं. बिहार में यह मुख्य रूप से मध्य बिहार में पाए जाते हैं. यहां यह हिंदी, उर्दू और मगधी बोलते हैं. राजस्थान में यह मुख्य रूप से अलवर, भरतपुर, सीकर, झुंझुनू, बीकानेर, चूरू और नागौर जिलों निवास करते हैं. यहां यह मारवाड़ी, शेखावटी, उर्दू और हिंदी बोलते हैं. आइए जानते हैं भठियारा समाज का इतिहास, भठियारा की उत्पति कैसे हुई?

भठियारा समाज की उत्पत्ति

यह सुन्नी इस्लाम का पालन करते हैं. ऐतिहासिक रूप से यह बरेलवी (Barelvi) हैं , लेकिन इनमें से कई अब देवबंदी (Deobandi) या अहले हदीस (Ahle Hadith) संप्रदायों के हैं. भठियारा शब्द का अर्थ होता है- “सरायों या धर्मशालाओं में यात्रियों के खाने-पीने, ठहरने और देखरेख की व्यवस्था करने वाला व्यक्ति”.परंपरागत रूप से; सरायों में मालिक, प्रबंधक या सहायक के रूप में इस कार्य से जुड़े होने के कारण इनका नाम “भठियारा पड़ा”. धीरे-धीरे सरायों का चलन कम हो गया और इसके स्थान पर बड़े-बड़े होटल बनने लगे. आतिथ्य क्षेत्र (hospitality sector) आए बदलावों के कारण इनके पुश्तैनी व्यवसाय में गिरावट आने लगी. नतीजतन यह जीवन निर्वाह के लिए अपने पारंपरिक व्यवसाय को छोड़कर रोजी रोटी के अन्य विकल्पों को अपनाने लगे. इस समुदाय के लोग सूरी साम्राज्य (Suri Empire) के संस्थापक और उत्तर भारत के अंतिम शासक शेरशाह सूरी के भाई सलीम शाह के वंशज होने का दावा करते हैं. इस समुदाय के लोगों का कहना है कि सूरी साम्राज्य के पतन के बाद, इन्हें मुगलों द्वारा प्रतिशोध की भावना से सरायों के देखभाल के काम करने को मजबूर किया गया था. हालांकि, यह पठान होने का दावा करते हैं, लेकिन इनके कुलों के अध्ययन से इनके विविध उत्पत्ति का पता चलता है. उत्तर प्रदेश में निवास करने वाले भठियारा खुद को शेख होने का दावा करते हैं. लेकिन मान्यता प्राप्त शेख समूह, जैसे मुस्लिम कायस्थ (Muslim Kayasths) . और मिल्की (Milkis) इस दावे को सिरे से खारिज करते हैं. ऐतिहासिक रूप से इनका समाज में महत्वपूर्ण स्थान रहा है. व्यापार मार्गों पर सरायों को चलाने के कारण इन्हें अमीर व्यापारी वर्ग के साथ-साथ शाही संरक्षण भी प्राप्त था. बिहार में निवास करने वाले भठियारो की परंपराओं के अनुसार, शासक सलीम शाह सूरी ने उन्हें ग्रांड ट्रंक रोड के किनारे सराय के रखवाले के रूप में बसाया था. राजस्थान में निवास करने वाली फारूकी मानते हैं कि वह मुगल सेनाओं के साथ यहां आए थे, जिन्होंने 16 वीं शताब्दी में राजस्थान पर आक्रमण किया था. बाद में मुगल अधिकारियों द्वारा इन्हें जीते गए शहरों में सराय निर्माण और देखरेख का कार्यभार सौंपा गया था. इनमें से कई भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए, जहां वह मुहाजिर समुदाय (Muhajir community)

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