Ranjeet Bhartiya 02/04/2020
जाट गायक सिद्धू मूसेवाला आज हमारे बीच नहीं है पर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा बनी रहेगी। अपने गानों के माध्यम से वह अमर हो गए हैं । सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को मानसा जिले में उनके घर से कुछ किलोमीटर दूर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या किसने और किस वजह से की यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन हमने जाट समाज का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके फैंस पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। jankaritoday.com की टीम के तरफ से उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि! Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 02/04/2020 by Sarvan Kumar

देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है. महाराष्ट्र और केरल के बाद जिस तरह से तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश राजस्थान, मध्य प्रदेश, और दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी है यह देश के लिए एक खतरे की घंटी है.

देश को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए डॉक्टर अपनी जान पर खेलकर दिन रात काम में लगे हुए हैं, मगर कुछ ऐसे अराजक तत्व भी हैं जो कोरोना संकट से लड़ रहे योद्धाओं पर पत्थरबाजी कर रहे हैं. स्वास्थ्य कर्मियों पर हो रहे हमले से जनता में भी गुस्सा है. लोग कह रहे हैं कि ऐसे लोगों पर लानत है और इनकी पहचान करके कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए.

ऐसा ही एक विचलित कर देने वाला मामला मध्यप्रदेश के इंदौर से आया है. जानकारी के मुताबिक यह घटना इंदौर के टाट पट्टी बाखल इलाके की है जहां कोरोनावायरस से से संदिग्ध एक बुजुर्ग महिला का चेकअप करने पहुंची स्वास्थ्य कर्मियों की टीम पर पथराव किया गया है. पथराव करते हुए लाठी-डंडे से लैस भीड़ ने मेडिकल टीम पर हमला कर दिया, जिसके कारण स्वास्थ्य कर्मियों को जान बचाकर भागना पड़ा है.

घटना का शिकार हुई एक महिला डॉक्टर ने आपबीती बताते हुए कहा है कि कोरोना संदिग्ध की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने हमें उस इलाके में जाकर स्क्रीनिंग करने को कहा था. स्क्रीनिंग करने करने गई टीम मेडिकल टीम में 2 डॉक्टर, नर्स और आशा कार्यकर्ता शामिल थे. शुरू में सभी स्क्रीनिंग प्रक्रिया में सहयोग कर रहे थे और अच्छे से जवाब दे रहे थे. लेकिन फिर अचानक पता नहीं क्या हो गया. अचानक पत्थर हमारे पैरों पर पड़ने लगे और हमें जान बचाकर भागना पड़ा.

यह पूछे जाने पर कि भीड़ में कितने महिला और पुरुष थे महिला डॉक्टर ने बताया कि हमें यह देखने का मौका ही नहीं मिला. हम पिछले 3 दिनों से एक और डॉक्टर के साथ स्क्रीनिंग कर रहे थे क्योंकि इलाके में कोरोना संक्रमित मरीज की हिस्ट्री मिली थी. हमने पूछना शुरू ही किया था कि लोगों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया. वह तो अच्छा था कि हमारे साथ तहसीलदार और पुलिसकर्मी थे इसीलिए हम बच पाए नहीं तो हम नहीं बच सकते थे.

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