Ranjeet Bhartiya 27/03/2023
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Last Updated on 27/03/2023 by Sarvan Kumar

महिलाएं भारत की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं. नारी के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती. महिलाएं परिवार बनाती हैं, परिवार से घर बनता है, घर से समाज बनता है और समाज से राष्ट्र बनता है. इसका सीधा मतलब है कि सामाजिक संरचना के हर स्तर पर महिलाओं का महत्वपूर्ण भूमिका है. महिलाओं की क्षमता का उपयोग किए बिना एक मजबूत समाज और एक सुदृढ़ और विकसित देश की कल्पना करना व्यर्थ है. इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी बच्चियों को शिक्षित करें और उन्हें सशक्त बनाएं. यहां हम सेन समाज की लड़कियों के बारे में जानेंगे.

सेन समाज की लड़कियों

इससे पहले कि हम सेन समाज की लड़कियों (Girls of Sen Samaj) की बात करें तो यहां यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि पश्चिम बंगाल में रहने वाले बैद्य और कायस्थ समुदायों के लोग सेन शब्द का प्रयोग अपने उपनाम के रूप में करते हैं. लेकिन यहां हम सेन नाई (Sen/Sain/Nai) समुदाय की बात कर रहे हैं, जो भारत में अलग-अलग नामों से व्यापक रूप से फैला हुआ है. महिलाओं की स्थिति एक राष्ट्र के सामाजिक, आर्थिक, मानसिक स्थिति और विकास के स्तर को दर्शाती है. इसी तरह से, एक जाति विशेष में महिलाओं और लड़कियों की स्थिति भी जाति की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति को दर्शाती है.

सेन नाई समुदाय को भारत के अधिकांश राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में वर्गीकृत किया गया है. इससे यह स्पष्ट होता है कि यह समुदाय आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा हुआ है. आर्थिक रूप से कमजोर होने, जागरूकता की कमी और शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण की कमी के कारण इस समुदाय के अधिकांश बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं. उच्च शिक्षा की बात छोड़ दीजिए, इनमें से कई स्कूल में ही पढ़ाई छोड़कर अपने माता-पिता की रोजी-रोटी कमाने में मदद करने लगते हैं.

भारत जैसे पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं और लड़कियों के प्रति लैंगिक भेदभाव जीवन के हर पहलू में शामिल है. आमतौर पुरुष ही हर प्रकार का फैसला लेते हैं और महिलाओं तथा लड़कियों को परिवार संबंधी फैसलों से बाहर रखा जाता है. भारत में लड़कियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चलाती हैं. लेकिन सेन समाज की लड़कियों तक इसका लाभ नहीं पहुंच पाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इस समुदाय की लड़कियों की स्थिति और भी खराब है. इनमें से ज्यादातर अपनी स्कूली शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाती हैं और इनकी शादी भी जल्दी कर दी जाती है.

सकारात्मक पहलू यह है कि सेन समाज का शिक्षित वर्ग शिक्षा के महत्व को समझने लगा है. इनमें से कई ने अपनी रूढ़िवादी सोच को छोड़कर लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान देना शुरू कर दिया है, जिसके कारण सेन जाति की लड़कियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने की ओर अग्रसर है. लेकिन यह अनुपात अभी भी बहुत कम है. समय की मांग है कि सेन समाज अपने उत्थान के लिए लड़कियों की शिक्षा और सर्वांगीण विकास पर ध्यान दे, ताकि इस समुदाय की लड़कियां न सिर्फ अपने समाज का नाम रोशन करें बल्कि देश की तरक्की में अहम योगदान दे सकें.

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