Ranjeet Bhartiya 14/09/2022
नहीं रहे सबके प्यारे ‘गजोधर भैया’। राजू श्रीवास्तव ने 58 की उम्र में ली अंतिम सांस। राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद से वो 41 दिनों से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। उनकी आत्मा को शांति मिले, मुझे विश्वास है कि भगवान ने उसे इस धरती पर रहते हुए जो भी अच्छा काम किया है, उसके लिए खुले हाथों से स्वीकार करेंगे #RajuSrivastav #IndianComedian #Delhi #AIMS Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 14/09/2022 by Sarvan Kumar

भारत में उपनामों का विशेष महत्व है क्योंकि ज्यादातर मामलों में एक विशिष्ट जाति द्वारा विशिष्ट उपनामों का उपयोग किया जाता है. इस प्रकार एक उपनाम आमतौर पर एक विशिष्ट जाति को संदर्भित करता है. आपने “गुप्ता” शब्द तो सुना ही होगा. गुप्ता भारत में उपयोग किए जाने वाले सबसे आम उपनामों में से एक है. लेकिन गुप्ता उपनाम की खास बात यह है कि अधिकांश अन्य भारतीय उपनामों के विपरीत, गुप्ता उपनाम पूरे भारत में विभिन्न समुदायों में मौजूद है, चाहे वह किसी भी जाति का हों. आइए जानते हैं गुप्ता जाति वर्ग के बारे में-

गुप्ता जाति वर्ग

सबसे पहले गुप्ता (अथवा गुप्त) शब्द की उत्पत्ति के बारे में जानना जरूरी है. “गुप्ता” शब्द यह नाम संस्कृत भाषा के शब्द “गोप्त्री” से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है “सैन्य राज्यपाल (Military Governor), शासक, या रक्षक”. गुप्ता (गुप्त) का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है. सबसे प्रसिद्ध गुप्तों में गुप्त राजाओं की एक लंबी कतार शामिल है, जिन्होंने लगभग 200 वर्षों तक भारत पर शासन किया था. बता दें कि गुप्त साम्राज्य एक प्राचीन भारतीय साम्राज्य था. अपने चरम पर भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्से पर इस राजवंश का शासन था. इतिहासकारों द्वारा इस काल को भारत का स्वर्ण युग माना जाता है.  इतिहासकार आर. सी. मजूमदार (R. C. Majumdar) के अनुसार, गुप्ता/गुप्त उपनाम उत्तरी और पूर्वी भारत में कई अलग-अलग समुदायों द्वारा अलग-अलग समय पर अपनाया गया था. उदाहरण के तौर पर, श्रीचंद्र (शासनकाल 930-975) पूर्वी बंगाल में चंद्र वंश के दूसरे और सबसे प्रभावशाली शासक थे. श्रीचंद्र की रामपाल प्लेट में ब्राह्मणों की एक पंक्ति का उल्लेख है जिनके उपनाम के रूप में गुप्ता था. बंगाल क्षेत्र में, गुप्ता मुख्य रूप से उपनाम बैद्यों तथा कायस्थों में भी पाया जाता है. बंगाल में उपयोग किए जाने वाले कई उपनामों हो जैसे सेनगुप्ता, दासगुप्ता, दत्तगुप्ता आदि को भी गुप्ता का हीं भिन्न रूप माना जाता हैं. सेनगुप्ता और दासगुप्ता उपनाम पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बंगालियों में पाया जाता है. यह बैद्य जाति के होते हैं. यह उपनाम सेन और गुप्ता का संयुक्त रूप है. उत्तर भारत में गुप्ता उपनाम का प्रयोग बनिया और जैन समुदायों द्वारा भी किया जाता है. जैसा कि हम जानते हैं कि बनिया समुदाय में सैकड़ों घटक या उपजातियां शामिल हैं. वैश्य बनिया समुदाय की कई उपजातियां द्वारा अपने उपनाम के रूप में गुप्ता शब्द का प्रयोग किया जाता है.


References;

•https://www.thoughtco.com/gupta-surname-meaning-and-origin-4099458

•Majumdar, Ramesh Chandra; Anant Sadashiv Altekar (1986). Vakataka Gupta Age: circa 200–550 A.D. Motilal Banarsidass Publ. p. 126. ISBN 81-208-0026-5.

•Sarkar, Girindra Mohan (1984). Early History of Bengal. p. 47

•Sahay, Keshari N. (2001). Ambastha Kayastha: The Evolution of a Family and Its Socio-cultural Dimensions. Commonwealth Publishers. p. 11. ISBN 978-81-7169-660-4.

•Ronald. B. Inden (January 1976). Marriage and Rank in Bengali Culture : A History of Caste and Clan in Middle Period Bengal. p. 40. ISBN 9780520025691.

•Hanks, Patrick (8 May 2003). Dictionary of American Family Names: 3-Volume Set. Oxford University Press, USA. p. 103. ISBN 978-0-19-508137-4.

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