Ranjeet Bhartiya 19/11/2021

हलवाई भारत, पाकिस्तान और नेपाल में पाई जाने वाली एक व्यवसायिक जाति है. नेपाल में इन्हें हलुवाई कहा जाता है. मिष्ठान बनाने वाले को हलवाई कहा जाता है. यह पाक कला में प्रवीण होते हैं. मिठाई और स्वादिष्ट पकवान बनाना और बेचना इनका पारंपरिक व्यवसाय है. यह एक प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण जाति है. आदिकाल से अन्न और खाद्य पदार्थों से स्वादिष्ट व्यंजन और मिष्ठान बनाना तथा देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों और समाज की क्षुधा को तृप्त करने के कार्य से जुड़े होने के कारण समाज में इनका महत्वपूर्ण स्थान रहा है. यह धर्म से हिंदू, मुसलमान या जैन हो सकते हैं. मुस्लिम हलवाई भारत के विभिन्न भागों, विशेष रुप से रूप से उत्तर प्रदेश, तथा पाकिस्तान में निवास करते हैं. इन्हें मोहम्मदी हलवाई, सिद्दीकी, फरीदी और अदनानी भी कहा जाता है. यह मधेशिया वैश्य बनिया, हलवाई पोद्दार की उप जातियों में आते हैं. इनके प्रमुख उपनाम ( Surname) हैं मोदनवाल, साव, गुप्ता, अग्रवाल और कांदु हैं. ये हिंदी, उर्दू, अवधी, भोजपुरी, मारवाड़ी और पंजाबी भाषा बोलते हैं. आइए जानते हैं हलवाई समाज का इतिहास  हलवाई  शब्द की उत्पत्ति कैैैैसे हुई?

हलवाई शब्द की  उत्पत्ति और इतिहास

हलवाई  शब्द की उत्पत्ति मूल रूप से अरबी भाषा के शब्द “अल हलवा” से हुई है, जिसका अर्थ होता है- “मिठाई”. हलवाई जाति की उत्पत्ति और इतिहास की बातों का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों जैसे यजुर्वेद, अथर्ववेद गरुड़ पुराण, वराह पुराण, मनुस्मृति, वर्णविवेक चंद्रिका, वर्णविवेक सार, आदि में किया गया है. हिंदू धर्म में, वर्ण व्यवस्था के अंतर्गत, इन्हें वैश्य वर्ण का माना जाता है. “वर्णविवेक चन्द्रिका” नामक पुस्तक में सृष्टि का उत्पत्ति क्रम बताते हुए वैश्यों की उत्पत्ति और बाद में हलवाई वैश्यों की उत्पत्ति का वर्णन किया गया है. इस पुस्तक के अनुसार, सबसे पहले अव्यक्त यज्ञ से ब्रह्मा, विष्णु और महेश उत्पन्न हुए. फिर प्रजापति ब्रह्मा ने अपने मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, उदर से वैश्य और चरणों से शुद्र वर्ण का निर्माण किया. प्रजापति ब्रह्मा के उदर से वैश्यों के मूलपुरुष भलनन्दन और उनकी स्त्री मरूत्वती उत्पन्न हुई. फिर इनके संतान वत्सप्रीति, वतसप्रीति से प्रांशु हुए. प्रांशु के 6 पुत्र हुए जिनका नाम क्रमशः मोद, प्रमोद, बाल, मोदन, प्रमर्दन, शंकु और कर्ण हुआ. इनके कर्म भी पृथक-पृथक हुए.
प्रांशु के पुत्रों में से एक मोदन के वंश में, मोदक (लड्डू) आदि का व्यवसाय करने वाले-वैश्य उत्पन्न हुए, जो वैश्य वृत्ति के द्वारा संसार में फैले. वर्णविवेक चन्द्रिका के अनुसार, भलनन्दन और मरूत्वती नाम से उत्पन्न मोदन से हलवाई जाति की उत्पत्ति हुई है.

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