Ranjeet Bhartiya 15/01/2024
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Last Updated on 15/01/2024 by Sarvan Kumar

भारत का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। अपनी हजारों साल की यात्रा के दौरान भारत कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है और कई साम्राज्यों का उत्थान और पतन देखा है। भारत का अतीत विदेशी शक्तियों के द्वारा निरंतर आक्रमणों से चिह्नित है। मुग़ल साम्राज्य 16वीं शताब्दी में भारत में मुग़ल साम्राज्य का उदय हुआ, लेकिन समय के साथ इसके कमज़ोर होने के बाद कई क्षेत्रीय शक्तियाँ भी उभरीं। ‌ बाद में, भारत लगभग 200 वर्षों तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद के अधीन रहा। अंग्रेजों ने भारत का कई तरह से शोषण किया और आखिरकार लंबे संघर्ष के बाद भारत 1947 में आजादी पाने में सफल रहा।

इसी क्रम में हम यहां निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से आजादी से पहले के भारत के इतिहास के बारे में संक्षेप में जानेंगे:

आजादी से पहले भारत का इतिहास

1.अंग्रेजों की शोषण और दमनकारी नीतियों के कारण भारतीयों में आक्रोश पैदा होने लगा, जिसने क्रांति की आग को और भड़का दिया। अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह 1857 से पहले भी हुए थे, लेकिन 1857 का विद्रोह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस विद्रोह को प्रारंभिक सफलता तो मिली लेकिन अंग्रेज इस विद्रोह को दबाने में सफल रहे।

2.20वीं सदी की शुरुआत में भारत में कई महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक घटनाएं हुईं, जिन्होंने भारतीय समाज और उस समय के राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 20वीं सदी में मॉर्ले-मिंटो सुधार, सामाजिक-धार्मिक संगठनों का उदय और बंगाल पुनर्जागरण आदि ने भारतीय समाज और राजनीतिक दिशा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अकाल, प्लेग और आर्थिक परिवर्तनों ने इस युग को आकार दिया, जिसका भारत की जनसंख्या और अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ा।

3.1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद विरोधी भावनाओं को तीव्र कर दिया, जिससे असहयोग आंदोलन शुरू हुआ। 1920 के दशक में महात्मा गांधी के नेतृत्व में ब्रिटिश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण जन आंदोलन शुरू हुए, जबकि कुछ क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ उग्रवादी दृष्टिकोण अपनाया।

4.समय के साथ हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनाव बढ़ता गया, जिसकी परिणति 1946 में डायरेक्ट एक्शन डे के रूप में हुई। मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए एक नए देश की मांग शुरू कर दी। ‌ हिंदू और मुसलमानों के बीच बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा शुरू हो गई। आख़िरकार लंबे संघर्ष के बाद 1947 में भारत को आज़ादी तो मिल गई लेकिन देश का बंटवारा हो गया। अंग्रेजों ने तत्कालीन भारत को दो देशों हिंदुस्तान और पाकिस्तान में बांट दिया।

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