Ranjeet Bhartiya 26/07/2023
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Last Updated on 26/07/2023 by Sarvan Kumar

मणिपुर पूर्वोत्तर भारत में स्थित एक राज्य है और इसका एक समृद्ध और विविध इतिहास है जो प्राचीन काल से चला आ रहा है। यह क्षेत्र प्रागैतिहासिक काल से बसा हुआ है और इसने अपने पूरे इतिहास में विभिन्न साम्राज्यों के उत्थान और पतन, विभिन्न संस्कृतियों के प्रभाव और महत्वपूर्ण घटनाओं को देखा है। यहां मणिपुर के इतिहास का एक सिंहावलोकन (overview) दिया गया है:

मणिपुर का इतिहास

1. प्राचीन काल (Ancient Period):

मणिपुर का इतिहास प्राचीन काल से मिलता है जब इसे कांगलेईपाक के नाम से जाना जाता था। इस क्षेत्र का उल्लेख महाभारत और पुराणों जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों में किया गया था। ऐसा माना जाता है कि इस काल में मणिपुर व्यापार और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।

2. मणिपुर साम्राज्य (Kingdom of Manipur):

मणिपुर का दर्ज इतिहास पहली शताब्दी ईस्वी के आसपास शुरू होता है जब इस पर स्थानीय राजाओं का शासन था। मणिपुर राज्य 15वीं और 18वीं शताब्दी के बीच निंगथौजा राजवंश (Ningthouja dynasty) के तहत फला-फूला। इस दौरान राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान काफी विकसित हुई। विशेष रूप से हिंदू धर्म और वैष्णववाद को प्रमुखता मिली। मणिपुर के राजाओं ने महाराजा और राजर्षि जैसी उपाधियाँ धारण कीं।

3. मध्ययुगीन काल (Medieval period):

मध्ययुगीन काल के दौरान, मणिपुर ने अपने शाही परिवारों, अहोम साम्राज्य और बर्मा के बीच लगातार विवाह गठबंधन देखे। ऐतिहासिक पांडुलिपियों से संकेत मिलता है कि भारतीय उपमहाद्वीप के हिंदुओं ने 14वीं शताब्दी से मणिपुर राजपरिवार से विवाह करना शुरू कर दिया था। सदियों से, शाही पत्नियाँ असम, बंगाल, उत्तर प्रदेश और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों से आती थीं। 17वीं शताब्दी में, मीडिंगु खगेम्बा (Meidingu Khagemba)के शासनकाल के दौरान मुसलमान वर्तमान बांग्लादेश से आए थे। सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल और विनाशकारी एंग्लो-बर्मी युद्धों ने मणिपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक जनसांख्यिकी को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया।

4. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन (British Colonial Rule):

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 19वीं सदी में मणिपुर में अपनी उपस्थिति स्थापित की। यह क्षेत्र ब्रिटिश आधिपत्य के तहत एक रियासत बन गया, और 1891 में मणिपुर के शासकों और ब्रिटिशों के बीच एक संधि पर हस्ताक्षर किए गए। हालाँकि, मणिपुर पर ब्रिटिश प्रभाव और नियंत्रण के कारण कई विद्रोह और प्रतिरोध आंदोलन हुए, जिनमें रानी गाइदिन्ल्यू (Rani Gaidinliu) जैसी कुछ उल्लेखनीय हस्तियों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया।

5. भारत के साथ विलय (Merger with India):

1947 में भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने के बाद, मणिपुर एक स्वतंत्र रियासत बन गया। हालाँकि, 1949 में, मणिपुर के महाराजा और भारत सरकार के बीच “विलय समझौते” के रूप में जाना जाने वाला एक विवादास्पद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके कारण भारत के केंद्र शासित प्रदेश के एक हिस्से के रूप में मणिपुर का भारतीय संघ में औपचारिक एकीकरण हुआ।

6. राज्य का दर्जा और राजनीतिक विकास (Statehood and Political Developments):

21 जनवरी, 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ और यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में से एक बन गया। तब से, राज्य ने विभिन्न राजनीतिक विकास देखे हैं, जिनमें क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का उदय और स्वदेशी लोगों के अधिकारों की वकालत करने वाले आंदोलन शामिल हैं।

7. विद्रोह और संघर्ष (Insurgency and Conflict):

पूर्वोत्तर भारत के कई अन्य राज्यों की तरह, मणिपुर को भी उग्रवाद और अलगाववादी आंदोलनों की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। अधिक स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग करते हुए कई उग्रवादी समूह इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। राज्य जातीय तनाव और संघर्षों से भी प्रभावित हुआ है।

8. संस्कृति और परंपराएँ (Culture and Traditions):

मणिपुर अपनी अनोखी और जीवंत संस्कृति के लिए जाना जाता है। यह अपने शास्त्रीय नृत्य रूप, मणिपुरी नृत्य के लिए प्रसिद्ध है, जिसकी जड़ें प्राचीन अनुष्ठानों और पौराणिक कथाओं में हैं। राज्य विभिन्न त्यौहार भी मनाता है, जिनमें लाई हराओबा (Lai Haraoba), याओशांग (होली), और निंगोल चाकोउबा (Ningol Chakouba) आदि शामिल हैं।

9. अर्थव्यवस्था और विकास (Economy and Development):

वर्षों से, मणिपुर की अर्थव्यवस्था कृषि, बागवानी और हस्तशिल्प पर निर्भर रही है। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए हैं, क्योंकि यह प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है।

निष्कर्ष (Conclusion): अपने पूरे इतिहास में, मणिपुर ने अपनी विशिष्ट पहचान बरकरार रखी है और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, राज्य प्रगति और विकास के लिए प्रयास करते हुए, अपनी विरासत को अपनाते हुए, विकसित हो रहा है।

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