Ranjeet Bhartiya 26/07/2023
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Last Updated on 26/07/2023 by Sarvan Kumar

नव स्वतंत्र भारत में रियासतों का एकीकरण राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू था। पूर्वोत्तर भारत की एक रियासत, मणिपुर, इस अवधि के दौरान एक महत्वपूर्ण परिवर्तन से गुज़री। आइए उन प्रमुख घटनाओं का पता लगाएं जिनके कारण मणिपुर का भारत में विलय हुआ।

मणिपुर का विलय कैसे हुआ?

1. भारत की स्वतंत्रता (India’s Independence):
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, भारत ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता की ओर अग्रसर था। जैसे ही अंग्रेज़ भारत छोड़कर जाने के लिए तैयार हुए, रियासतों को अपनी स्वतंत्रता बरकरार रखने या भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का विकल्प दिया गया। मणिपुर ने, 1947 के मणिपुर राज्य संविधान अधिनियम के तहत, सरकार का एक लोकतांत्रिक स्वरूप स्थापित किया, जिसमें महाराजा राज्य के प्रमुख थे।

2. महाराजा को शिलांग बुलाया गया (The Maharaja Summoned to Shillong):
मणिपुर के शासक महाराजा बोधचंद्र (Maharaja Bodhchandra) ने खुद को एक निर्णायक मोड़ पर पाया। मणिपुर को भारत संघ में विलय करने की संभावना पर विचार करने के लिए उन्हें ब्रिटिश भारतीय प्रांत असम (British Indian province of Assam) की राजधानी शिलांग में बुलाया गया था। यह कदम तब आया जब भारत ने रियासतों को नवगठित राष्ट्र के दायरे में लाने की मांग की।

3. विलय समझौते पर हस्ताक्षर (Signing of the Merger Agreement):
ऐसा माना जाता है कि दबाव के तहत, महाराजा बोधचंद्र ने अंततः विलय समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे भारत में विलय हो गया। हस्ताक्षर के आसपास की परिस्थितियां विवादास्पद बनी हुई हैं, कुछ लोगों ने भारतीय अधिकारियों की ओर से जबरदस्ती (coercion) करने का आरोप लगाया है।

4. विधान सभा का विघटन (Dissolution of the Legislative Assembly):
विलय समझौते के बाद मणिपुर की विधानसभा भंग कर दी गई। इससे उस स्वायत्त सरकार का अंत हो गया जो पहले मणिपुर राज्य संविधान अधिनियम के तहत स्थापित की गई थी।

5. मणिपुर भारत का हिस्सा बना (Manipur Becomes Part of India):
अक्टूबर 1949 में मणिपुर आधिकारिक तौर पर भारत का हिस्सा बन गया। प्रारंभ में, इसे केंद्र शासित प्रदेश के रूप में नामित किया गया था, जो सीधे केंद्र सरकार द्वारा शासित था।

6. राज्य का दर्जा प्राप्त करना (Attainment of Statehood):
1971 के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम के माध्यम से, कई अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के साथ, मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। 21 जनवरी 1972 को, मणिपुर को आधिकारिक तौर पर भारतीय संघ के भीतर एक पूर्ण राज्य के रूप में मान्यता दी गई थी।

निष्कर्ष (Conclusion) : मणिपुर का भारत में विलय राज्य और पूरे देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसने मणिपुर में रियासती शासन के अंत को चिह्नित किया और भारतीय संघ के लोकतांत्रिक ढांचे में इसके एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया। हालांकि विलय समझौते से जुड़ी परिस्थितियों पर बहस जारी है, मणिपुर भारत का एक अभिन्न और जीवंत हिस्सा बना हुआ है, जो देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और विरासत में योगदान दे रहा है।

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