भारत के दक्षिणी भाग में स्थित तमिलनाडु का एक समृद्ध और गतिशील राजनीतिक इतिहास है। यह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भागीदारी और क्षेत्रीय राजनीति के अपने अनूठे ब्रांड के लिए जाना जाता है। तमिलनाडु हमेशा से क्षेत्रीय दलों, मुख्य रूप से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) का गढ़ रहा है। इसी क्रम में यहां हम जानेंगे कि तमिलनाडु में विधानसभा की कितनी सीटें हैं।
तमिलनाडु में विधानसभा की कितनी सीटें हैं?
तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य पर कई दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके का दबदबा रहा है। डीएमके की स्थापना सी.एन. ने की थी। बाद में डीएमके का नेतृत्व एम. करुणानिधि ने किया। डीएमके हमेशा से द्रविड़ विचारधारा और सामाजिक न्याय की समर्थक रही है। दूसरी ओर, एमजी रामचंद्रन ने एआईएडीएमके की स्थापना की। एमजी रामचन्द्रन के बाद जे जयललिता ने एआईएडीएमके का नेतृत्व किया। जे.जयललिता हमेशा सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं की प्रबल समर्थक रहीं। डीएमके और एआईएडीएमके, इन दोनों पार्टियों के बीच प्रतिद्वंद्विता तीखी रही है और वे कई वर्षों तक बारी-बारी से सत्ता में रही हैं। यह दोनों पार्टियां लोकलुभावन नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के मामले में दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करती रही हैं।
तमिलनाडु अपनी 39 लोकसभा सीटों के कारण राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लोकसभा भारत की संसद का निचला सदन है, और ये सीटें राज्य के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में वितरित हैं। ये निर्वाचन क्षेत्र लोकसभा में अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए सदस्यों का चुनाव करते हैं। आईये अब जानते हैं कि तमिलनाडु में विधानसभा की कुल कितनी सीटे हैं। तमिलनाडु में विधानसभा की कुल 234 सीटें हैं। इनमें से कुछ निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।
