Sarvan Kumar 23/04/2022
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Last Updated on 23/04/2022 by Sarvan Kumar

भारत में 400 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज हैं जहां MBBS कोर्स कराया जाता है. इसमें से 50% कॉलेज सरकारी हैं, जबकि 50% कॉलेज प्राइवेट हैं. कम सीट होने के कारण भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने की चाहत रखने वाले छात्रों को कई तरह के मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस बहुत ज्यादा होती है, जिसे मध्यम वर्ग के छात्र afford नहीं कर सकते. इसीलिए उनके पास एक ही विकल्प रह जाता है, सरकारी मेडिकल कॉलेज. आइए जानते हैं भारत में एमबीबीएस कॉलेजों में एडमिशन कैसे होता है? इस पूरी प्रक्रिया को हम दो चरण में समझ सकते हैं.

भारत में एमबीबीएस कॉलेजों में एडमिशन कैसे होता है?

(A). QUALIFYING EXAM FOR ADMISSION IN MBBS

MBBS (Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery) हर उस छात्र का सपना होता है जो एक डॉक्टर के रूप में अपना करियर बनाना चाहते हैं. लेकिन यह सपना तभी साकार होता है जब Candidates “Minimum Qualifying Percentile” से NEET क्वालीफाई कर लेते हैं. National Eligibility cum Entrance Test (NEET) NTA (National Testing Agency) द्वारा हर साल आयोजित की जाने वाली परीक्षा है, जो भारत में MBBS में admission के लिए इच्छुक छात्रों की योग्यता सीमा निर्धारित करती है. भारत में MBBS कोर्स में Admission के लिए candidate को NEET परीक्षा pass करना होता है.

(B). COUNSELLING PROCESS FOR MBBS ADMISSION

NEET क्वालीफाई लेने के बाद सफल छात्रों को counselling के लिए बुलाया जाता है.
भारत के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS में admission की प्रक्रिया में एक centralised counselling process शामिल है जो चिकित्सा परामर्श समिति (Medical Counselling Committee, MCC) की ओर से स्वास्थ्य विज्ञान महानिदेशालय (Directorate General of Health Sciences, DGHS) द्वारा संचालित की जाती है.Counselling लिए eligible होने के लिए candidates को प्रत्येक category में प्राधिकरण (authority) द्वारा निर्धारित NEET Cutoff हासिल करना होता है. काउंसलिंग प्रक्रिया NEET रैंकिंग के अनुसार व्यवस्थित की जाती है. NEET के स्कोर के आधार पर छात्रों को MBBS कॉलेजों के चयन में प्राथमिकता दी जाती है. Candidates द्वारा NEET में प्राप्त scores के आधार पर उन्हें MBBS सीटों के 15% All India Quota (AIQ) और 85% State Quota के अंतर्गत विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिया जाता है. काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकारी कोटे की सीटों के लिए सीट आवंटन प्रक्रिया conduct करते हैं. बता दें कि प्रत्येक सरकारी मेडिकल कॉलेज में कुल MBBS सीटों का 15% All India Quota (AIQ) के लिए आरक्षित होता है. जबकि शेष 85% सीटें State Quota के तहत आरक्षित होती हैं, जहां आवश्यक पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले उम्मीदवारों को admission दिया जाता है.

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