Sarvan Kumar 15/09/2020
जाट गायक सिद्धू मूसेवाला आज हमारे बीच नहीं है पर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा बनी रहेगी। अपने गानों के माध्यम से वह अमर हो गए हैं । सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को मानसा जिले में उनके घर से कुछ किलोमीटर दूर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या किसने और किस वजह से की यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन हमने जाट समाज का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके फैंस पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। jankaritoday.com की टीम के तरफ से उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि! Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 15/09/2020 by Sarvan Kumar

क्रोध से मुक्ति पाने का उपाय। कैसा भोजन करना चाहिए?

श्रीमद भगवत गीता में कहा है कि काम और क्रोध रजोगुण के कारण उत्पन्न होते हैं इसलिए राजसी वृत्ति उत्पन्न करने वाले भोजन ना करो। जो भोजन बहुत कड़वा, खट्टा, बहुत गर्म, तिक्त, सूखा हुआ अथवा किरकिरा हो उसे रजोगुणी समझना चाहिए। अंडे, मछली, मांस, प्याज, मिर्ची, राई, अति मीठा पदार्थ या तेज मसालेदार पदार्थ का भी सेवन नहीं करना चाहिए। गाय का दूध, घी, चोखा, जौ, मूंग, तिल, केला वगैरह, दाल वगैरह में चना व मूंग उत्तम है। प्रतिदिन सोते समय और उठते समय ठंडा पानी पिए, वह पानी बिलकुल निर्मल और शुद्ध होना चाहिए, इससे पाचन तंत्र सही रहता है।चतुर्दशी और एकादशी को उपवास करने से शरीर और मन को लाभ पहुंचता है।

दुष्ट विचारों से कैसे दूर रहे?

सोने के लिए कड़ा स्थान या बिछौने का उपयोग करना चाहिए और रात को प्रकाश रखना नहीं चाहिए। सोने समय उत्तम पुस्तकों को अध्ययन करना चाहिए।  प्रतिदिन शारीरिक व्यायाम अवश्य करना चाहिए। प्रतिदिन दो -तीन बार व्यायाम करना चाहिए जिससे पसीना चुने लग जाए और जो लोग ऐसा करते हैं वह दुष्ट विचारों से दूर रहते हैं।

जब कभी भी मन में खराब विचार उत्पन्न होने लगे उसी समय पद्मासन या सिद्धासन लगाकर प्राणायाम  करना चाहिए जिससे कि खराब विचार एकदम भाग जाए।  जिनको यह उपाय सुगम ना हो उन्हें खराब विचार आते ही शारीरिक व्यायाम प्रारंभ कर देना चाहिए इससे 90% फायदा होते देखा गया है।

जीवन में घटित अच्छी-अच्छी घटनाओं का मनुष्य को स्मरण रखना चाहिए, यदि आपके साथ कोई अच्छी घटना घटी हो तो उस घटना को एक नोटबुक में नोट कर लें।  जिस समय हमारे मन में दूषित भावनाएं उदित हो उस समय उन  घटनाओं का स्मरण करना चाहिए।  वे घटनाएं हमारे मन में नई जागृति पैदा कर देगी जिससे दुष्ट विचार नष्ट हो जाएंगे।  पवित्रता, शुद्धता इन शब्दों का उच्चारण करो और इन्हीं शब्दों को जोर से बोलो। डायरी में उपयुक्त शब्दों को लिख कर रखना चाहिए और जब -जब आप में दुष्ट  विचार उत्पन्न हो तब -तब इन शब्दों को देखो।

जिससे मन में क्रोध, लोभ, ईर्ष्या वगैरह विकार उत्पन्न हो ऐसे किसी वस्तु को देखना ,सुनना तथा  स्पर्श नहीं करना चाहिए। यही नहीं उसका विचार तक मन में नहीं लाना चाहिए। इसी कारण से बुरी पुस्तकें पढ़ने की, वीभत्स नाटक देखने की, अश्लील गायन सुनने की और खराब चित्रों के देखने की मनाही की गई है।

पीड़ा अथवा कोई खास कारण के सिवा गुप्त अंगो का स्पर्श नहीं करना चाहिए ऐसी आज्ञा मनु संहिता में है।

?

Advertisement
Disclaimer: Is content में दी गई जानकारी Internet sources, Digital News papers, Books और विभिन्न धर्म ग्रंथो के आधार पर ली गई है. Content  को अपने बुद्धी विवेक से समझे। jankaritoday.com, content में लिखी सत्यता को प्रमाणित नही करता। अगर आपको कोई आपत्ति है तो हमें लिखें , ताकि हम सुधार कर सके। हमारा Mail ID है jankaritoday@gmail.com. अगर आपको हमारा कंटेंट पसंद आता है तो कमेंट करें, लाइक करें और शेयर करें। धन्यवाद

Leave a Reply