Last Updated on 01/12/2023 by Sarvan Kumar
स्वेज़ नहर भूमध्य सागर और लाल सागर के बीच स्थित एक नहर या जलमार्ग है। मिस्र में स्थित इस समुद्र स्तरीय जलमार्ग की खासियत यह है कि यह एक कृत्रिम नहर है। यह नहर अफ्रीका और एशिया को विभाजित करते हुए, स्वेज़ के इस्तमुस के माध्यम से भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है। इसकी लंबाई 193.3 किलोमीटर है और यह यूरोप और एशिया के बीच एक प्रमुख व्यापार मार्ग माना जाता है। इसी क्रम में यहां हम जानेंगे कि स्वेज नहर से भारत को क्या लाभ होता है।
स्वेज नहर से भारत को क्या लाभ होता है?
स्वेज नहर न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे न केवल भारत और मिस्र को बल्कि पूरे यूरोप को लाभ होता है। जैसा कि हम जानते हैं स्वेज नहर प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित जलमार्ग है। यह भूमध्य सागर को लाल सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है। स्वेज़ नहर एशिया और यूरोप के बीच जहाज़ों की आवाजाही के लिए एक आसान मार्ग प्रदान करती है। स्वेज नहर के निर्माण के बाद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आसान हो गया है क्योंकि अब अफ्रीकी महाद्वीप की चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसके जरिए उत्तरी अटलांटिक से सीधे हिंद महासागर तक पहुंचा जा सकता है। यही कारण है कि यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
आइए अब इस लेख के मुख्य विषय पर आते हैं और जानते हैं कि स्वेज नहर से भारत को क्या लाभ मिलता है। यूरोपीय देशों के साथ भारत के बहुत पुराने और मजबूत व्यापारिक रिश्ते हैं। स्वेज नहर के निर्माण से पहले यूरोपीय देशों और भारत के बीच व्यापार के लिए समुद्री मार्ग से लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी और इसके लिए पूरे अफ्रीकी महाद्वीप को कवर करना पड़ता था जिसमें काफी समय लगता था। लेकिन स्वेज नहर खुलने के बाद यूरोपीय देशों और भारत के बीच की दूरी काफी कम हो गई है। उदाहरण के लिए, स्वेज़ नहर के खुलने के बाद ब्रिटेन और भारत के बीच की दूरी लगभग 4500 मील हो गई है। इसके कारण भारत और पश्चिमी देशों के बीच कच्चा तेल, कच्चा सोना, कोयला, ठोस ईंधन, हीरे और यांत्रिक उपकरण, विशेष धातु, कार्बनिक रसायन, प्लास्टिक, लोहा और इस्पात आदि के आयात और निर्यात में काफी आसानी हो गई है।
