Last Updated on 06/12/2021 by Sarvan Kumar
Introduction: जोगी ( Jogi, Jugi or Yogi) भारत में पाया जाने वाला एक जातीय समुदाय है. जोगी उपनाम (surname) मूल रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे-तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और भारत के पश्चिमी भाग में स्थित गुजरात राज्य के प्राचीन प्रवासियों से जुड़ा हुआ है. इन्हें गुजरात राज्य में सामूहिक रूप से नाथ, जोगी नाथ, जुगी नाथ, नाथ जोगी, रावल और रावल देव जोगी के नाम से जाना जाता है. आइए जानते हैं जोगी समाज का इतिहास, जोगी शब्द की उत्पति कैसे हुई?
कैटेगरी: आरक्षण प्रणाली के अंतर्गत इन्हें भारत के ज्यादातर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अन्य पिछड़ी जाति (Other Backward Class, OBC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. हिमाचल प्रदेश में इन्हें अनुसूचित जाति (Scheduled Caste, ST) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. गुजरात, असम, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दमन दिउ, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, और पश्चिम बंगाल में इन्हें ओबीसी वर्ग में शामिल किया गया है.
जोगी शब्द की उत्पत्ति : जोगी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के शब्द “योग” से हुई है. शिव पुराण में इस शब्द का उल्लेख किया गया है और इस जाति के उत्पत्ति के बारे में वर्णन किया गया है. कालांतर में योगी शब्द अपभ्रंश होकर बोलचाल का शब्द “जोगी” बन गया. योगी या जोगी शब्द उन लोगों को संदर्भित करता है जो दैनिक अनुष्ठान के हिस्से के रूप में योगाभ्यास करते हैं. समय के साथ, पहले यह एक समुदाय और बाद में जातियों में बदल गए. गोरखनाथ, सिद्ध सिद्धांत पद्धती III. 6-8 में योगी के बारे में वर्णन करते हुए लिखा गया है- “एक व्यक्ति प्रकृति में में चार वर्णों (जातियों) की स्थिति मानी जाती है, अर्थात ब्राह्मण में सदाचार (धार्मिक आचरण), क्षत्रिय में शौर्य (वीरता और साहस), वैश्य में व्यवसाय (बिजनेस) और शूद्र में सेवा. एक योगी अपने भीतर सभी प्रजातियों के सभी पुरुषों और महिलाओं को अनुभव करता है. इसीलिए उसे किसी से कोई द्वेष या घृणा नहीं है. उसे हर प्राणी से प्रेम है.”यह भारत के भिक्षुओं का वंशज होने का दावा करते हैं, जिन्हें साधु या ऋषि कहा जाता है.
