Ranjeet Bhartiya 18/11/2021
माता रानी ये वरदान देना,बस थोड़ा सा प्यार देना,आपकी चरणों में बीते जीवन सारा ऐसा आशीर्वाद देना। आप सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं। नव दुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री देवी का है। ये माता पार्वती का ही एक रूप हैं हिमालयराज की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री भी कहा जाता है। नवरात्रि के पहले दिन मां के शैलपुत्री रूप का पूजन होता है. Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 22/07/2022 by Sarvan Kumar

कोली (Koli) भारत में पाया जाने वाला एक जातीय समूह है. गुजरात में यह एक जमींदार जाति है, जिनका प्रमुख कार्य कृषि है. पढ़े-लिखे कोली सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र में नौकरियां करते हैं. महाराष्ट्र में इन्हें एक पुराना क्षत्रिय जाति माना जाता है. यह जाति अपनी बहादुरी और निडरता के लिए जाने जाती है. यह स्वभाव से विद्रोही प्रवृत्ति के होते हैं. राजा महाराजा अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने के लिए कोली जाति के सैनिकों के तौर पर रखते थे. प्रथम विश्व युद्ध में इन्होंने भाग लिया था और वीरता का परिचय दिया था, इसीलिए अंग्रेजी हुकूमत द्वारा इन्हें एक योद्धा जाति का दर्जा दिया गया था. आइए जानते हैं, कोली  जाति का इतिहास ,कोली शब्द की उत्पति कैसे हुई?

कोली किस कैटेगरी में आते हैं?

भारत सरकार की आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है. दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में इन्हें अनुसूचित जाति (scheduled caste) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. गुजरात, महाराष्ट्र और उड़ीसा में इन्हें अनुसूचित जनजाति (scheduled tribe) में शामिल किया गया है. मुख्य रूप से यह गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उड़ीसा और जम्मू कश्मीर राज्यों में पाए जाते हैं. यह मुख्य रूप से हिंदू धर्म को मानते हैं.

कोली की उपजातियां

सेनापति सूबेदार सरदार तानाजी राव मालूसरे शेर-ए-शिवाजी (तानाजी मालूसरे सिंहगढ़ के युद्ध पर जाने से पहले) image Wikimedia Commons

कोली जाति अनेक उप जातियों में विभाजित है, जिनमें प्रमुख हैं-ठाकोर, महादेव, चुवालिया, पटेल, कोतवाल बारिया, खांट, घेडिया, धराला, सोन, तलपड़ा, पाटनवाढीया, महावर, माहौर, टोकरे और सुच्चा. इनके प्रमुख गोत्र हैं-आंग्रे, वनकपाल, चिहवे, थोरात, शांडिल्य, कश्यप और जालिया.यह हिंदी, गुजराती, कन्नड़ और मराठी भाषा बोलते हैं.

कोली समाज का इतिहास

कोली ऐतिहासिक रूप से एक महत्वपूर्ण जाति है. इस जाति ने कई विद्रोहो और लड़ाईयों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है. जब गुजरात पर मुगलों का शासन हुआ तो उन्हें सबसे पहले कोली के कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा. गुजरात के कोली मुगलों के खिलाफ थे. उन्होंने मुगलों के खिलाफ हथियार उठा उठा लिया और मुगलों को नाक में दम कर कर दिया था. मुगल बादशाह औरंगजेब को भी गुजरात पर शासन करने के दौरान कोली के कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा. 1830 में कोली जागीरदारों ने अंग्रेजो के खिलाफ हथियार उठा लिया और कई वर्षों तक कड़ी टक्कर देते रहे. कोली जागीरदारों के विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजों को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा. 1857 में भी कोली जाति के जागीरदारों ने अंग्रेजो के खिलाफ भयंकर विद्रोह किया था.

कोली समाज के प्रमुख व्यक्ति

रामनाथ कोविन्द (जन्म-1 अक्टूबर 1945): राजनीतिज्ञ और भारत के 14वें और वर्तमान राष्ट्रपति.

कान्होजी आंग्रे (1669-4 जुलाई 1729): मराठा साम्राज्य की नौसेना के प्रथम सेनानायक.

झलकारी बाई (22 नवंबर 1830-4 अप्रैल 1857):
स्वतंत्रता सेनानी, रानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल और रानी लक्ष्मीबाई की नियमित सेना में महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति.

तानाजी मालूसरे (मृत्यु- 4 फरवरी 1670): छत्रपति शिवाजी महाराज के मराठा सेना में सूबेदार सरदार, सिंहगढ के युद्ध में अपनी भूमिका के लिए प्रसिद्ध.

महाराजा यशवंतराव मार्तंडराव मुकने उर्फ महाराजा पतंगसाह मुकने (11 दिसंबर 1917 – 4 जून 1978):
भारत के महाराष्ट्र के पालघर ज़िले में स्थित जव्हार (Jawhar) रियासत के अंतिम कोली महाराजा‌ और राजनेता.

राजेश चुडासमा (जन्म-10 अप्रैल 1982): गुजरात के जूनागढ़-गिर सोमनाथ लोकसभा सीट से सांसद.

देवजीभाई गोविंदभाई फतेपारा (जन्म- 20 नवंबर 1958): गुजरात के सुरेंद्रनगर लोकसभा सीट से सांसद.

भारती शियाल (जन्म-1 सितंबर 2014): गुजरात के भावनगर लोकसभा सीट से सांसद.

भानु प्रताप सिंह वर्मा (जन्म-15 जुलाई 1957): उत्तर प्रदेश के के जालौन लोकसभा सीट से सांसद, भारत सरकार में लघु, कुटीर और मध्यम उपक्रम राज्यमंत्री.

प्राजक्ता कोली (जन्म- 27 जून 1993): प्रसिद्ध यूट्यूबर और और ब्लॉगर.

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