Ranjeet Bhartiya 06/04/2020
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Last Updated on 06/04/2020 by Sarvan Kumar

जम्मू: कोरोना महामारी के रोकथाम के लिए देशव्यापी लॉक डाउन लागू होने के कारण कई लोग अपने घरों से दूर किसी दूसरे शहर में फंस गए हैं. ऐसा ही एक मामला मुंबई में रहने वाले 30 वर्षीय मुस्लिम शख्स के साथ हुआ है. 30 साल के आरिफ को जब यह खबर मिला कि मुंबई से लगभग 2100 किलोमीटर दूर, जम्मू-कश्मीर के राजौरी में रह रहे उनके पिता को दिल का दौरा पड़ा है तो वह उनसे मिलने के लिए बेचैन हो गए. यातायात की सुविधा बंद होने के कारण आरिफ के पास दो ही विकल्प थे, लॉक डाउन खत्म होने का इंतजार करें या फिर पिता से मिलने के लिए अन्य प्रयास करें. फिर उन्होंने साइकिल से एक ही 2100 किलोमीटर की दूरी तय करके अपने पिता से मिलने का निश्चय किया और निकल गए.

बता दें, लॉक डाउन लागू किए जाने के 1 सप्ताह बाद 1 अप्रैल को आरिफ को यह पता चला था कि उनके पिता को दिल का दौरा पड़ा है. ऐसे मुश्किल वक्त में सीआरपीएफ के जवान फरिश्ता बनकर मदद के लिए सामने आए. सीआरपीएफ अपने श्रीनगर कैंप से मदद कर हेल्पलाइन चलाती है जिसके माध्यम से कश्मीर की जनता को मेडिकल सुविधाएं तथा आपातकालीन मदद पहुंचाई जाती है. मददगार हेल्पलाइन ने पता चलते ही कार्रवाई करते हुए आरिफ के पिता वजीर हुसैन को हेलीकॉप्टर के माध्यम से एअरलिफ्ट करके जम्मू के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया.

सीआरपीएफ के जम्मू कश्मीर जोन के विशेष महानिदेशक जुल्फीकार हसन ने जानकारी देते हुए बताया की मीडिया सूत्र के माध्यम से उन्हें आरिफ के बारे में पता चला था. हेल्पलाइन तुरंत सहायता पहुंचाने में जुट गई. आरिफ को फोन करके जानकारी दी गई कि पांच राज्यों में फैले सीआरपीएफ के नेटवर्क के माध्यम से उनके लिए सभी जरूरी चीजों की व्यवस्था की जाएगी. इसके बाद सीआरपीएफ ने आरिफ को खाने के पैकेट, ₹2000 नगद, सैनिटाइजर और अन्य जरूरी सामान दिया.

लॉक डाउन के कारण आरिफ को बेस कैंप पर ही रहने की सलाह दी गई तथा उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनके पिता का ख्याल रखा जाएगा. लेकिन फिर भी आरिफ ने अपने पिता से मिलने की इच्छा जताई.
जिसके बाद आरिफ के लिए ट्रक से यात्रा करने की व्यवस्था की गई और गुजरात पुलिस के माध्यम से जरूरत जरूरी सामान पहुंचाया गया. अनुमान के मुताबिक, ट्रक सोमवार दोपहर उन्हें राजस्थान के जोधपुर के पास पहुंचाएगा उसके बाद आगे की व्यवस्था की जाएगी.

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