Ranjeet Bhartiya 29/03/2020

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश में लागू हुआ 21 दिनों के लॉक डाउन से उत्पन्न हो गए हालातों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जनता को परेशानी हो रही है लेकिन कोरोना को रोकने के लिए यह कदम आवश्यक था. आज यानी कि रविवार मन की बात के 63वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातों को कहा।

मन की बात के 63वें संस्करण

▪मुझे पता है कि लॉकडाउन की वजह से लोगों को काफी परेशानी हो रही है.

▪भारत जैसे 130 करोड़ लोगों के देश में कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए कोई और रास्ता नहीं था, कठोर कदम उठाना जरूरी था.

▪आपको होने वाली असुविधा और कठिनाई के लिए मैं क्षमा मांगता हूं. बीमारी और उसके प्रकोप से शुरुआत में ही निपटना पड़ता है, नहीं तो बाद में यह असाध्य हो जाता है. भारत आज यही कर रहा है.

▪मैं जानता हूं कि कोई कानून नहीं तोड़ना चाहता है, लेकिन कई लोग कानून तोड़ रहे हैं. स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, लॉकडाउन को तोड़ेंगे तो कोरोना वायरस से नहीं बच पाएंगे. नियम तोड़ने वाले अपने जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

▪कोरोना के मामलों में मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ जाती है। दुनिया का अनुभव विदेशों में हमने अच्छी से अच्छी स्वास्थ्य सेवा को जवाब देते हुए देखा है, भारत में ऐसी स्थिति ना हो, इसका हमें ध्यान रखना है.

▪डॉक्टर हों, नर्स हों, पैरा मेडिकल, आशा, एएनएम कार्यकर्ता, सफाई कर्मचारी हो आपके स्वास्थ्य की भी देश को बहुत चिंता है. इसी को देखते हुए ऐसे करीब 20 लाख साथियों के लिए 50 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा की घोषणा सरकार ने की है.

▪साथियों हमारे यहां तमाम साथी आपको, पूरे देश को इस संकट से बाहर निकालने में जुटे हैं. ये जो बाते हमें बताते हैं उन्हें हमें सुनना ही नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना भी है.

▪सबसे पहले मैं सभी देशवासियों से क्षमा मांगता हूँ. और मेरी आत्मा कहती है की आप मुझे जरुर क्षमा करेंगे क्योंकि कुछ ऐसे निर्णय लेने पड़े हैं जिसकी वजह से आपको कई तरह की कठिनाईयां उठानी पड़ रही हैं.

▪बहुत से लोग मुझसे नाराज भी होंगे कि ऐसे कैसे सबको घर में बंद कर रखा है.

▪मैं आपकी दिक्कतें समझता हूं, आपकी परेशानी भी समझता हूं लेकिन भारत जैसे 130 करोड़ की आबादी वाले देश को, कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए, ये कदम उठाए बिना कोई रास्ता नहीं था.

▪कोरोना वायरस ने दुनिया को कैद कर दिया है. ये ज्ञान, विज्ञान, गरीब, संपन्न कमजोर, ताकतवर हर किसी को चुनौती दे रहा है. ये ना तो राष्ट्र की सीमाओं में बंधा है, न ही ये कोई क्षेत्र देखता है और न ही कोई मौसम.

▪कुछ लोगों को लगता है की वो लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं तो ऐसा करके वो मानो जैसे दूसरों की मदद कर रहे हैं, ये भ्रम पालना सही नहीं है. ये लॉकडाउन आपके खुद के बचने के लिए है. आपको अपने को बचाना है, अपने परिवार को बचाना है.

▪हमारे यहां कहा गया है-‘एवं एवं विकार, अपी तरुन्हा साध्यते सुखं’ यानि बीमारी और उसके प्रकोप में शुरुआत में ही निबटना चाहिए. बाद में रोग असाध्य हो जाते हैं, तब इलाज भी मुश्किल हो जाता है. आज पूरा हिन्दुस्तान, हर हिन्दुस्तानी यही कर रहा है.

▪मैं जानता हूं कि कोई कानून नहीं तोड़ना चाहता, लेकिन कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं क्योंकि अभी भी वो स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे. अगर आप Lockdown का नियम तोड़ेंगे तो वायरस से बचना मुश्किल होगा.

▪इस लड़ाई में अनेकों योद्धा ऐसे हैं जो घरों में नहीं, घरों के बाहर रहकर कोरोना का मुकाबला कर रहे हैं. जो हमारे Front line soldiers हैं खासकर हमारी नर्सेज बहनें है,नर्सेज का काम करने वाले भाई हैं,डॉक्टर हैं. ऐसे साथी जो कोरोना को पराजित कर चुके हैं आज हमें उनसे प्रेरणा लेनी है.

▪धन और किसी खास कामना को लेकर नहीं, बल्कि मरीज की सेवा के लिए, दया भाव रखकर कार्य करता है, वो सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक होता है.

▪साथियों हमारे यहां तमाम साथी आपको, पूरे देश को इस संकट से बाहर निकालने में जुटे हैं. ये जो बाते हमें बताते हैं उन्हें हमें सुनना ही नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना भी है.

कोरोना वायरस से ठीक हुए रामगप्पा तेजा

कोरोना वायरस से पीड़ित रामगप्पा तेजा हाल ही में ठीक हुए हैं. उन्होंने पीएम मोदी के साथ अपना अनुभव साझा किया. तेजा ने कहा कि, “मैं काम की वजह से दुबई गया था, उसके बाद कोरोना से पीड़ित हो गया. शुरू में मैं डर गया था, लेकिन डॉक्टरों और नर्सों ने मेरा साहस बढ़ायाः

आगरा के अशोक कपूर भी हुए ठीक

आगरा के अशोक कपूर अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि, “मैं और मेरे परिवार के 6 लोग कोरोना से संक्रमित हो गए थे. हमें आगरा से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ऐम्बुलेंस से भेजा गया. हमें 14 दिन अस्पताल में रखा गया था. डॉक्टरों और अन्य स्टाफ ने हमारी अच्छी देखभाल की.”

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