Last Updated on 25/07/2022 by Sarvan Kumar
पटेल-पाटीदार भारत में निवास करने वाला एक महत्वपूर्ण समुदाय है. आइए जानते हैं पटेल कितने प्रकार के होते हैं.
पटेल कितने प्रकार के होते हैं?
मूल रूप से यह एक कृषक समुदाय हैं. परंपरागत रूप से इस समुदाय के लोग व्यापक स्तर पर कृषि और संबंधित गतिविधियों से जुड़ें रहे हैं. पारंपरिक रूप से इनकी आर्थिक आय मुख्य रूप से, कृषि, पशुपालन और डेरी सहकारी क्षेत्र पर निर्भर है. वर्तमान परिस्थितियों की अगर बात करें तो पटेल एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरे हैं. माना जाता है कि पटेलों के पास पैसे कमाने की तीक्ष्ण बुद्धि होती है जो स्वतः हीं इन्हें बड़े पैमाने पर पैसे कमा कर देती है.अपने असाधारण व्यावसायिक कौशल के दम पर इस समुदाय के लोगों ने कई उद्योगों और व्यवसायों पर अपना वर्चस्व स्थापित कर रखा है, जिनमें प्रमुख हैं- फार्मास्यूटिकल्स, बंदरगाह विकास, इस्पात उद्योग और खाद्य व्यवसाय. आर्थिक समृद्धि हासिल करने के उपरांत इस समुदाय के लोगों ने कई क्षेत्रों में इन्वेस्टमेंट करना शुरू कर दिया है. आज पटेल देश के कुछ बड़े बड़े उद्योगों के मालिक हैं. आज शायद ही ऐसा कोई व्यवसायिक क्षेत्र हो जिसमें इस समुदाय के लोगों की उपस्थिति ना हो. भारत के कई राज्यों में, विशेष रूप से गुजरात में पटेल समुदाय सियासी ताकत रखता है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात की 6 करोड़ आबादी में इस समुदाय की आबादी करीब 1.5 करोड़ है. उनकी संख्या और आर्थिक दबदबे को देखते हुए, पटेल राज्य में राजनीति पर हावी हैं. यही कारण है कि इस समुदाय से गुजरात में कई मुख्यमंत्री रहे हैं. आइए आप बात करते हैं कि पटेल कितने प्रकार के होते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार, पाटीदार-पटेल समुदाय लेऊवा (लेवा) पटेल, कड़वा पटेल, अंजना पटेल (चौधरी पटेल), मटिया पटेल और सतपंथी उपजातियों में विभाजित है. लेकिन मुख्य रूप से पटेल दो प्रकार के होते हैं- लेउवा और कड़वा. लेउवा पटेल भगवान श्री राम के पुत्र लव से अपनी उत्पत्ति का दावा करते हैं. वहीं, कड़वा पटेल भगवान श्री राम के पुत्र कुश से अपनी वंशावली का दावा करते हैं. “बीबीसी” में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, कड़वा और लेउवा पाटीदार के रूप में देखें तो कड़वा पटेल 60% और लेउवा पटेल 40% हैं.
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