Ranjeet Bhartiya 10/09/2022
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Last Updated on 10/09/2022 by Sarvan Kumar

जाति और वर्ण पारंपरिक भारतीय समाज के वर्गीकरण हैं. इससे‌ भारत में सामाजिक पदानुक्रम निर्धारित होते हैं. जाति व्यवस्था की अवधारणा बहुत प्राचीन है. हालाँकि, समय के साथ इस व्यवस्था में बहुत सारे बदलाव हुए हैं, लेकिन यह आज भी प्रचलित है और सामाजिक जीवन पर इसका व्यापक प्रभाव है. जाति और वर्ण दो वर्गीकरण हैं जो बहुत अलग हैं, लेकिन दोनों एक हिंदू के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वर्ण व्यवस्था के अनुसार, सामाजिक पदानुक्रम में वैश्य तीसरे स्थान पर आते हैं. वैश्य समुदाय भारत के विभिन्न हिस्सों में व्यापक रूप से वितरित है और इसकी उल्लेखनीय आबादी है. आइए जानते हैं भारत में वैश्य समाज की जनसंख्या के बारे में-

भारत में वैश्य समाज की जनसंख्या

वर्ण व्यवस्था वैदिक काल से चली आ रही सामाजिक वर्गीकरण की एक प्रणाली है. इस व्यवस्था के अंतर्गत समाज को चार वर्गों में विभाजित किया गया है- ब्राह्मण (पुजारी), क्षत्रिय (योद्धा), वैश्य (कुशल व्यापारी और व्यवसायी) और शूद्र (अकुशल श्रमिक).‌ वर्ण व्यवस्था मूल रूप से प्रत्येक व्यक्ति के गुणों के आधार पर भारतीय समाज को संरचना देने के लिए बनाई गई थी, न कि किसी के जन्म अधिकार के आधार पर, जिसमें बाद में यह विकसित हो गई. हिंदू धार्मिक ग्रंथों ने वैश्यों को कृषि और पशु-पालन में पारंपरिक भूमिकाओं को सौंपा, लेकिन समय के साथ वे जमींदार, व्यापारी और साहूकार बन गए. वैश्य समाज ने व्यापार, व्यवसाय व उद्योग को विस्तार देकर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. इस समुदाय के लोग दावा करते हैं कि वैश्य समाज का देश की अर्थवस्था में में 80 प्रतिशत से अधिक योगदान है. जहां तक भारत में वैश्य समाज की जनसंख्या का प्रश्न है इसके बारे में अलग-अलग अनुमान और दावे किए जाते हैं. भारत में वैश्य समुदाय की जनसंख्या के बारे में संक्षिप्त विवरण नीचे दिया जा रहा है-

•भारतीय फार्मासिस्ट अकादमी (Indian Academy of Pharmacists, IAOP) एक शैक्षिक और वैज्ञानिक गैर-लाभकारी संगठन है. IAOP फार्मेसी के क्षेत्र में पेशेवर और नैतिक मानकों को बढ़ावा देने और फार्मेसी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र के विकास और बेहतरी के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है.
IAOP द्वारा सन 2017 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 22,952,000 वैश्य हैं.

•patrika.com में छपी एक रिपोर्ट में, इस समुदाय के लोगों दावा करते हैं कि वैश्य समाज के देशभर में 375 घटक हैं, जो देश की जनसंख्या का 20 प्रतिशत है.


Refrences;
•Brief Report: Pseudocholinesterase Deficiency in an Indian Community”. 3 (1). Journal of Pharmacy Practice and Community Medicine. 2017: 27.

•Boesche, Roger (1 March 2003). The First Great Political Realist. p. 24. ISBN 978-0-73910-607-5

•https://www.patrika.com/surat-news/80-percent-of-the-country-s-economy-contributed-to-vaishya-society-4353102/

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