Sarvan Kumar 31/08/2020

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हालत चिंताजनक लेकिन स्थिर बनी हुई है. वह अभी गहरे कोमा में हैं. उनका इलाज दिल्ली कैंट स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में किया जा रहा है. रविवार को अस्पताल द्वारा मेडिकल बुलेटिन जारी करके कहा गया है कि पूर्व राष्ट्रपति का फेफड़ों के इन्फेक्शन का इलाज किया जा रहा है. उनकी सघन देखभाल की जा रही है. वह लगातार कोमा में है तथा उन्हें लाइफ सपोर्टिंग सिस्टम पर उन्हें रखा गया है. वह हीमोडायनेमिक रूप से स्थिर बताए गए हैं.

अस्पताल द्वारा जारी किए गए मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति के लंग्स इन्फेक्शन में थोड़ा सुधार हुआ है. लेकिन इसके बावजूद उन्हें लगातार वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा जा रहा है. हीमोडायनेमिकली स्टेबल’ होने का मतलब यह है कि रोगी का दिल ठीक तरीके से काम कर रहा है और शरीर में रक्त का संचार सामान्य है.
मेडिकल बुलेटिन में कहा गया है कि पूर्व राष्ट्रपति का रक्त संचार सभी मानकों पर स्थित है जैसे ब्लड प्रेशर, दिल एवं नारी की गति स्थिर और सामान्य है.

बता दें कि बीते दिनों पूर्व राष्ट्रपति के फेफड़ों में इन्फेक्शन के बाद उनका स्वास्थ्य ज्यादा खराब हो गया था. विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम द्वारा लगातार उन्हें निगरानी में रखा जा रहा है. 10 अगस्त को प्रणब मुखर्जी को एक जीवन रक्षक सर्जरी के लिए अस्पताल में एडमिट कराया गया था. उसी दिन दिमाग में जमे खून के थक्के को निकालने के लिए ऑपरेशन किया गया था.
अस्पताल में भर्ती होने के दौरान किए गए जांच में उन्हें कोरोनावायरस पॉजिटिव पाया गया था. उसके बाद उनके स्वास्थ्य में कोई ज्यादा सुधार नहीं हुआ है. बाद में उन्हें फिर फेफड़े का इंफेक्शन हो गया तथा उनके गुर्दे भी ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं.

गौरतलब है कि मुखर्जी वर्ष 2012 से 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति रहे. इससे पहले प्रणब मुखर्जी तीन अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के अधीन कार्य कर चुके हैं. अपने लंबे राजनीतिक कैरियर के दौरान उन्होंने केंद्र में वित्त मंत्रालय, विदेश मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाल चुके हैं. साल 2019 में केंद्र सरकार ने प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया था. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह समेत देश के तमाम बड़े नेताओं ने प्रणब मुखर्जी के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है.

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