Sarvan Kumar 15/12/2018

महान लोगो का जीवनी पढ़कर हम अपने लाइफ में बहुत कुछ सीखते हैं। इसी क्रम में हम आज जानेंगे सचिन पायलट का संक्षिप्त जीवन परिचय।

सचिन पायलट का जन्म कब और कहाँ हुआ?

7 सितंबर 1977 को सहारनपुर , उत्तर प्रदेश में एक गुर्जर परिवार में सचिन पायलट का जन्म हुआ। वे कांग्रेस के राजेश पायलट और रमा पायलट के पुत्र हैं। सचिन पायलट की एक बहन हैं जिनका नाम है सारिका पायलट।

परिवार में पायलट सरनेेम कैसे जुड़ा?

 सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट एक गरीब परिवार से आते थे। उनका असली नाम राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधूरी था। राजनीति में आने से पहले वे भारतीय वायुसेना के जांबाज़ पायलट थे। 1971 की लड़ाई में उनहोंने कई ठिकानों को नष्ट किया था। यहीं से उन्होंने अपना सरनेम पायलट अडॉप्ट कर लिया। इस तरह से पुरे परिवार का सरनेम पायलट हो गया।

राजेश पायलट राजनीति में कैसे आये?

राजेश पायलट , राजीव गांधी के कहने पर  नौकरी छोड़ कर राजनीति में आ गए। राजनीति में आने के बाद वे  बड़े और गुज्जर नेता के रूप में उभरे। उन्होंने अपना सारा जीवन गरीब और पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। राजेश पायलट एक बेहद ईमानदार नेता माने जाते थे। उन्होंने जिंदगी में ना जाने कितने उतार-चढ़ाव का डट कर और हंसकर सामना किया। तमाम कठिनाइयों को परास्त करते हुए वे राजनीति के सितारे के तौर पर उभरे। राजेश पायलट कुल मिलाकर 5 बार लोकसभा के लिए चुने गए।  एक बार वह राजस्थान के भरतपुर से और चार बार दौसा  से सांसद रहे। वे केंद्र सरकार में सरफेस ट्रांसपोर्ट, जनसंचार और आंतरिक सुरक्षा मंत्री भी रहे। उनकी मृत्यु 11 जून 2000 को जयपुर के नजदीक एक सड़क दुर्घटना में हो गई।

 मां भी बनी सांसद

सचिन पायलट की माता का नाम रमा पायलट है। वे अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1998 में  राजस्थान के विधानसभा चुनाव से की। पति के मृत्यु के बाद  कांग्रेस पार्टी के टिकट पर उप चुनाव लड़ा और जीतकर लोक सभा पहुंची।

सचिन पायलट की शिक्षा

नई दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल से  सचिन पायलट ने  स्कूली शिक्षा प्राप्त किया। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से बी ए किया। आईएमटी गाजियाबाद से मार्केटिंग और फिर व्हार्टन स्कूल ऑफ द यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया से एमबीए किया। व्हार्टन स्कूल से एमबीए करने के बाद सचिन पायलट बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो के साथ रहे । उन्होंने 2 सालों तक अमेरिकन मल्टीनैशनल कंपनी जनरल मोटर्स के साथ काम किया।

व्यक्तिगत जीवन-

सचिन पायलट ने सारा अब्दुल्ला से 15 जनवरी 2004 को शादी किया। दोनों  की लव स्टोरी काफी दिलचस्प है। सारा जम्मू कश्मीर के भूतपूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की बेटी है। उनके भाई उमर अब्दुल्ला भी जम्मू कश्मीर  मुख्यमंत्री रहे। सचिन पायलट के दो बेटे हैं जिनका नाम है आरान और वेरान।

पॉलीटिकल करियर

सचिन पायलट 2002 में भारत वापस आ गए। उन पर अपने पिता के राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी थी। 10 फरवरी 2002 को अपने पिता  के जन्मदिन पर वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। 13 मई 2004 को सचिन पायलट चौदहवीं लोकसभा के लिए दौसा  से निर्वाचित हुए।  उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 1.2 लाख मतों से हराया। इस जीत के साथ सचिन पायलट ने अपने नाम एक अनोखा रिकॉर्ड कर लिया। वे  सबसे कम उम्र( 26 साल )की उम्र में सांसद बनने वाले भारतीय बन गए।

15 वीं लोकसभा के लिए 2009  में वे  फिर  से जीते। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार किरण महेश्वरी को 76000 वोटों से हराया।

16वीं लोकसभा चुनाव में सचिन पायलट अजमेर क्षेत्र से चुनाव लड़ा। लेकिन 2014 में हुए इस चुनाव में उन्हे  हार का मुंह देखना पड़ा। उन्हें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार से 171983 वोटों से शिकस्त मिली।

2014 के में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। उसके बाद हुए एक के बाद एक इलेक्शन में कांग्रेस पार्टी हारती गई। देश के ज्यादातर राज्यों पर बीजेपी का राज हो गया।

राजस्थान में मिली बड़ी जिम्मेदारी

यहाँ BJP  की सरकार थी। 2018 में राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। कांग्रेस को राजस्थान में एक बार फिर से खड़े करने की।

राजस्थान का किला जीत लिया सचिन पायलट ने।

सचिन पायलट ने अपना सारा ध्यान राजस्थान पर केंद्रित कर दिया। 2018 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को यहां जीत मिल गई।

इस जीत के लिए अगर किसी एक को सबसे ज्यादा श्रेय दिया जा सकता है तो वो हैं सचिन पायलट।

राजस्थान के मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए सचिन पायलट!
कांग्रेस  को जीत तो मिल गई पर  मुख्यमंत्री पद के लिए खींचातानी शुरू हो गई। कांग्रेस का आलाकमान भी इस मुद्दे पर  बंटा हुआ था। खबरों की मानें तो राहुल गांधी सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। जबकि सोनिया गांधी अशोक गहलोत को। सचिन पायलट ने स्पष्ट शब्दों में कहा उनहोंने  बहुत  मेहनत की है। इसके लिए उन्हें राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। उनके  समर्थन में कई विधायक थे। गुर्जर समाज सडकों  पर उतर आया। काफी मनाने के बाद सचिन उप मुख्यमंत्री के लिए तैयार हो गए। अशोक गहलोत को CM बना दिया गया।

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