Ranjeet Bhartiya 03/01/2022
नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की हाथी घोड़ा पालकी, जैय कन्हैया लाल की। jankaritoday.com की टीम के तरफ से कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं! Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 03/01/2022 by Sarvan Kumar

तड़वी भील (Tadvi Bhil) भारत में पाया जाने वाला एक आदिवासी समुदाय है. यह वृहद भील समुदाय की एक उप-जाति (sub-caste) है. यह एक कृषक जनजाति है जो जीवन यापन के लिए कृषि पर निर्भर हैं. इस समुदाय में मुख्य रूप से छोटे किसान शामिल हैं. कुछ पशुपालन का काम भी करते हैं. जमीन कम होने के कारण यह खेतिहर मजदूर के रुप में भी काम करते हैं. इनमें से कुछ आसपास के औद्योगिक कारखानों में काम करने जाते हैं. जिनके पास शैक्षणिक योग्यता है, वह बेहतर नौकरी भी करते हैं. भारत सरकार के सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था आरक्षण के तहत इन्हें राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe, ST) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. यह मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में पाए जाते हैं.आइए जानते हैं तड़वी भील समुदाय का इतिहास, तड़वी भील की उत्पति कैसे हुई?

तड़वी भील किस धर्म को मानते हैं?

धर्म से यह हिंदू मुसलमान या ईसाई हो सकते हैं. अधिकांश तड़वी हिंदू धर्म को मानते हैं और हिंदू देवी देवताओं की पूजा करते हैं. परंपरागत रूप से जमपदी माता, वेराई माता, मेलदी माता, अम्बा माता, मेलदी माता, कालिका माता आदि में इनकी विशेष आस्था है. इसके अलावा, यह भगवान राम, कृष्ण, शंकर, हनुमानजी, रामदेव पीर, भाथीजी महाराज आदि की भी पूजा करते हैं. अन्य हिंदू जातियों के तरह यह भी हिंदू त्योहारों जैसे नवरात्रि, दिवाली, मकर सक्रांति आदि को धूमधाम से मनाते हैं. कुछ तड़वी भील धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बन गए. लेकिन आज भी वह हिंदू संस्कृति के कई पहलुओं को बरकरार रखे हुए हैं. जैसे इनकी महिलाएं साड़ी पहनती हैं. यह मूर्तियों को हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं. इनके नमाज अदा करने का तरीके पर भी पारंपरिक और संस्कृति रूप से हिंदू संस्कृति का प्रभाव है.इनमें से कुछ ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में आकर क्रिश्चियन भी बन गए हैं.

तड़वी भील उप-विभाजन, भाषा, संस्कृति

तड़वी भील 12 मुख्य कुलों कुलों में विभाजित है.यह मराठी, गुजराती, भीली, उर्दू और हिंदी भाषा बोलते हैं. बता दें कि भीली (Bhili) एक पश्चिमी इंडो-आर्यन भाषा है‌ जो पश्चिमी-मध्य भारतीय राज्यों; राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश; में बोली जाती है.विभिन्न अवसरों पर यह एक विशेष आदिवासी नृत्य करते हैं, जिसे तिमली या सजोनी (Timli or Sajoni) के नाम से जाना जाता है.

तड़वी भील की उत्पत्ति कैसे हुई?

“तड़वी” शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है-“घुड़सवारी करने वाला”. एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, अकाल के दौरान यह घोड़े का मांस खाते थे. इसीलिए इन्हें तड़वी के नाम से जाना जाता है.एक किवदंती के अनुसार, इन्हें पावागढ़ का राजपूत चौहान माना जाता है. हालांकि, इस बात का कोई ऐतिहासिक और वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. नाम, परिवार का नाम, उपनाम या सामाजिक रीति-रिवाजों से संकेत मिलता है कि यह भीलों की ही एक उप-जनजाति हैं. तड़वी भील मुख्य रूप से एक ऐसे विशेष क्षेत्र में निवास करते हैं जो मोटे तौर पर गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों के सीमावर्ती इलाकों को कवर करता है. मध्य काल के दौरान यह इलाका, मध्य भारत के फारुकी साम्राज्य का केंद्र था. इस क्षेत्र के पश्चिमी भाग में, तड़वी और वसाव मुख्य रूप से हिंदू हैं. लेकिन इस क्षेत्र में ईसाई मिशनरी गतिविधियां के कारण कुछ ईसाई बन गए. इस क्षेत्र के भील और फारूकी साम्राज्य के बीच घनिष्ठ संबंध के कारण उनमें से कुछ का इस्लाम में धर्मांतरण हुआ और वह मुसलमान बन गए.

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