Last Updated on 08/12/2022 by Sarvan Kumar
जाति, जातिवाद और समाज पर पड़ने वाला इसका दुष्प्रभाव सदियों से भारत में बहस का केंद्र रहा है। जाति व्यवस्था का प्रभाव भारत में रहने वाले अन्य धार्मिक समूहों, जैसे- मुसलमान, ईसाई, बौद्ध, जैन एवं सिक्खों की सामाजिक व्यवस्था पर भी दिखाई पड़ता है। ऐसा नहीं है की जाति प्रथा सिर्फ हमें नुकसान ही पहुंचाती है ये कई तरह से सरल जीवन जीने में हमारी मदद भी करती है। जाति प्रथा शादी विवाह और चुनावों के समय और भी प्रासंगिक हो जाति है. आमतौर पर भारतीय समाज में यह देखा गया है माता – पिता अपने बच्चों की शादी अपने ही जाति में करते हैं. बहुत ही कम अन्तर्जातीय शादियाँ होती है जिसमें माता पिता की सहमति होती है. ज्यादातर अन्तर्जातीय शादियाँ प्रेम विवाह से ही संभव हो पाता है. Indiatimes में छपी अगस्त 2022 के एक लेख के आधार पर 2011 की जनगणना के अनुसार, केवल 5.8% भारतीय विवाह अंतर-जातीय थे, यह दर 40 वर्षों से समान रही है। जबकि भारत मानव विकास सर्वेक्षण से पता चलता है कि केवल 5% भारतीय विवाह अंतर-जातीय हैं। UPSC परीक्षा की तैयारी कराने वाली प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान drishti ias के अनुसार लगातार सख्त होती जाति व्यवस्था ऑनर किलिंग का मुख्य कारण है. देश में जातिगत धारणाएँ लगातार बलवती होती जा रही हैं। अधिकांश ऑनर किलिंग के मामले तथाकथित उच्च और नीची जाति के लोगों के प्रेम संबंधों के मामले में देखने को मिले हैं। अंतर-धार्मिक संबंध भी ऑनर किलिंग का एक बड़ा कारण है। सदियों से राजनीति में जाति का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। भारतीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में देखा जाय तो राजनीतिक पार्टियों ने जाति को एक मुद्दा बनाकर अपने-अपने हित साधे हैं। आइए जानते हैं जाति प्रथा क्या है?
जाति का अर्थ एवं परिभाषा
जाति शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘कास्ट’ Caste का हिन्दी रूपान्तरण है। Caste’ शब्द की उत्पत्ति पुर्तगाली भाषा के शब्द Casta (कास्टा) से हुई है, जिसका तात्पर्य प्रजाति, नस्ल या भेद है। ‘कास्टा’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम सन् 1665 में ग्रेसिया डि ओरेटा (Gracia de orat ) ने किया था। इसके पश्चात फ्रांसीसी विद्वान अब्बे डुबायस ने इस शब्द का प्रयोग प्रजातीय समूहों के विभेद के लिए किया था। भारत में अनुमानतः तीन हजार से अधिक जातियाँ और उनकी अनेकानेक उपजातियाँ पायी जाती हैं। शास्त्र में वर्णित सैद्धान्तिक आधार के अतिरिक्त जातियों की सामाजिक संरचना, प्रथा, परम्परा, रूढ़ियों, रीतियों तथा व्यवसायों पर आधारित है। फिर भी मुख्यतः जाति प्रथा जन्मगत भेद पर आधारित एक व्यवस्था है।
जाति प्रथा क्या है?
विभिन्न विद्वानों के अनुसार जाति की परिभाषा निम्नलिखित है-
Charles Coole
“When a class is somewhat strictly hereditary, we may call it a caste.”
कूले के अनुसार “जब एक वर्ग पूर्णतया आनुवांशिकता पर आधारित होता है तो हम जाति कहते हैं।
Herbert Kisley
“Class is a collection of families or group of families bearing a common name which usually denotes or is associated with specific occupation, claiming descent from a mythical ancestor, human or divine, professing to follow the same heredity callings & regarded by those who are competent to give an opinion as forming a single homogenous communities.
जाति परिवारों या कई परिवारों के समूहों का संकलन है. जिसको एक सामान्य नाम दिया गया है, जो किसी काल्पनिक पुरुष या देवता से अपनी उत्पत्ति मानता है तथा पैतृक व्यवसाय को स्वीकार करता है और जो लोग विचार कर सकते हैं, उन लोगों के लिए एक सजातीय समूह के रूप में स्पष्ट होता है।”
Mazumdar Madan
“Caste is a closed class’ i.e. class refers to people based on property, business, occupation i.e. one can’t change his own caste system by can change the class system & can be a member of many classes at the same time.”
जाति एक बंद वर्ग है ‘अर्थात् वर्ग संपत्ति, व्यवसाय, व्यवसाय के आधार पर लोगों को संदर्भित करता है अर्थात कोई व्यक्ति वर्ग व्यवस्था को बदलकर अपनी जाति व्यवस्था को नहीं बदल सकता है और एक ही समय में कई वर्गों का सदस्य हो सकता है
Blunt
“Caste is an endogamous group bearing a common name, membership of which is hereditary, imposing on its members certain restrictions in the matter of social intercourse, either following a common traditional occupation a claiming a common origin & generally regarded as forming a single homogenous community.”
जाति एक सामान्य नाम रखने वाला एक अंतर्विवाही समूह है, जिसकी सदस्यता वंशानुगत है, सामाजिक सबंध के मामले में अपने सदस्यों पर कुछ प्रतिबंध लगाते हैं, या तो एक सामान्य पारंपरिक व्यवसाय का पालन करते हुए एक सामान्य मूल का दावा करते हैं और आम तौर पर एक समरूप समुदाय बनाने के रूप में माना जाता है।
जाति का निर्धारण कैसे होता है?
जाति प्रथा में प्रत्येक समुदाय या वर्ग के लिए अलग-अलग कार्य तथा पेशे का निर्धारण किया गया है। जैसे ब्राह्मण जाति के लोग पूजा-पाठ करते हैं। हर वर्ग के लिए पूजा पाठ कराने का अधिकार और पेशा इन्हीं का है। क्षत्रिय जाति के लोगों को युद्ध करने का अधिकार था। अतः उनके लिए सेना में नौकरियाँ निश्चित थीं। ऐसे ही वैश्य लोग व्यापार करते थे। निम्नवर्ग में लुहार, सुनार, चर्मकार, बढ़ई, धुनई, कसाई, कुम्हार इत्यादि कार्य निश्चित किए गए थे। इन वर्ग के लोगों को केवल यही कार्य करने की अनुमति थी। इन्हीं के कामों के आधार पर इनकी जाति का निर्धारण होता था।
References:
com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-166821/
https://www.indiatimes.com/explainers/news/laws-to-protect-intercaste-marriages-in-india-577759.html
https://www.civilserviceindia.com/subject/Sociology/notes/caste-system.html
