Sarvan Kumar 10/04/2024
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Last Updated on 10/04/2024 by Sarvan Kumar

देश में आज वो रहा जो पहले कभी नहीं हुआ. आज देश दो हिस्सों में बंट गया है एक तरफ वो हैं जो देश से प्यार करता है, देश का भला चाहते हैं और दूसरी तरफ़ वो जो गुमराह है. ऐसा नहीं की वे देश का भला नहीं चाहते हैं पर कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह कर दिया है. ऐसे लोग जो आम जनता को एक अलग चश्मा पहनाकर उनको अलग ही दृश्य दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. इन नामों में रवीश कुमार, ध्रुव राठी,अजीत अंजुम, अभिसार शर्मा इत्यादि हैं. ये खुलकर मोदी का विरोध करते हैं और सरकार के प्रति लोगों को भड़काने का काम कर रहे है.
इनका मकसद यह नहीं की जनता को एक अच्छी सरकार मिले बस उनकी ये कोशिश है कैसे बीजेपी सत्ता से बाहर हो जाए. ये ऐसा क्यों कर रहे ये जांच का विषय है. कोई भी सरकार पूरी तरह से सही नहीं होती वो गलतियां करते है. विपक्ष की भूमिका यहा बढ़ जाती है वे सरकार को यहां घेर सकते हैं और जनता से समर्थन हासिल कर सकते हैं.

विपक्षी, सरकार के अच्छी नीतियों का भी विरोध कर गलती कर बैठते है और आम जनता के दिलों से उतर जाते है. बीजेपी सरकार ने कश्मीर से 370 हटाकर, राम मंदिर बनाकर, राफेल खरीद कर, पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाकर, विदेशों में भारतीयों का सम्मान बढ़ाकर, आतंकवाद पर अंकुश लगाकर कई ऐसे काम किए है जिसे जनता को मोदी भक्त बना दिया है. अंधभक्ति कोई अच्छी बात नहीं पर सरकार के राष्ट्रवादी नीतियों और हिन्दुत्व विचारधारा का विरोध कर विपक्षी दलों ने जनता से अपना वोट बैंक गंवा बैठी है.
जब विपक्षी दलों को कोई मुद्दा नहीं मिला तब उसने तानाशाही, लोकतंत्र पर खतरा जैसे शब्द उछालकर, और जनता को भड़काकर चुनाव जीतना चाहती है.
इस काम के लिए कुछ लोगों को काम पर लगा दिया है इन नामों में दो कुछ प्रमुख नाम हैं जैसे रवीश कुमार, ध्रुव राठी,अजीत अंजुम, अभिसार शर्मा इत्यादि.
मोदी के तानाशाह बताने वाले ये लोग तानाशाह का मतलब ही नहीं समझते. इनके अनुसार भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करना तानाशाही है. अपराधियों पर लगाम तानाशाही है. इनका मानना है की विपक्षी पर ED, CBI लगाना लोकतंत्र पर खतरा है चाहे वो सचमुच का दोषी क्यों ना हो. आज हमारा देश कानून से चलता है और कोई आपको ED, CBI का डर दिखाकर आपको अपने पक्ष में करना चाहते है तो इसके लिए अदालतें हैं.
ये बात करते हैं Electoral bonds की तो क्या बीजेपी ने अकेले चंदा लिया चुनावी चंदा पाने वालों में बीजेपी को सबसे ज्यादा 6,060 करोड़ रुपये मिले। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस को 1,609.50 करोड़ और तीसरे नंबर कांग्रेस को 1,421.9 करोड़ रुपये मिले.
इस लिस्ट में अगला नंबर भारत राष्ट्र समिति है। उन्हें 1214 करोड़ रुपये चुनावी बॉन्ड के तौर पर मिले। इसके बीजू जनता दल है, जिन्हें 775 करोड़ रुपये मिले। बीजेडी के बाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) है, जिसे 639 करोड़ रुपये चुनावी चंदे में मिला. आम आदमी पार्टी को 65.50 करोड़ मिले.यानी सबने धन बटोरने का काम किया है. तो अगर बीजेपी चंदा चोर है तो दूसरे सारे दल भी चोर ही हैं. विपक्षी Electoral bonds पर बीजेपी को तो घेरती है पर वो अपने गिरेबान में नहीं झाँकती. वे कुतर्क ये देते हैं की बीजेपी ने सबसे ज्यादा चंदा उगाही की पर आज बीजेपी केंद्र में है और 17 राज्यों में या तो पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में है या फिर सरकार में सहयोगी है. अगर ममता बनर्जी वाली TMC को बस एक राज्य में सरकार होते हुए लगभग 1700 करोड़ मिल सकते हैं तो इसके हिसाब से बीजेपी को लगभग 2700 करोड़ मिलना चाहिए था. इसका मतलब बीजेपी का घाटा हो गया. इधर विपक्षी मोदी को चंदा चोर बताने में लगे हैं,  वहीं आम जनता calculator लेके बैठी है और सभी के पापों का लेखा-जोखा कर रही है. अगर जनता ने बीजेपी को सत्ता दी है तो वो छीन भी सकती है. मोदी कितने तानाशाह हैं या कितने दिलों में बसते है ये चुनाव के बाद पता चल ही जाएगा. तब तक रवीश कुमार इत्यादि को चाहिए कि जनता को गुमराह करना बंद करदे और उन्हें सच बताएं. जनता समझदार हैं और वो अपना भला- बुरा सोच सकती है.

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