Sarvan Kumar 03/09/2023
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Last Updated on 03/09/2023 by Sarvan Kumar

गौतम बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक के रूप में प्रसिद्ध हैं। जब उन्होंने लोगों को दुख और पीड़ा में देखा, तो उन्होंने मानव अस्तित्व की जटिलताओं को गहराई से समझने के लिए आध्यात्मिक यात्रा शुरू की। अपनी गहन अंतर्दृष्टि और शिक्षाओं के माध्यम से, उन्होंने नए सिद्धांत दिए जिनका उद्देश्य लोगों को पीड़ा और अज्ञानता से मुक्ति की ओर मार्गदर्शन करना था। गौतम बुद्ध ने धार्मिक आडंबरों से परे मोक्ष का एक सरल मार्ग बताया जो सभी के लिए सुलभ है। इसी क्रम में यहां हम जानेंगे कि बुद्ध किस भगवान को मानते थे।

बुद्ध किस भगवान को मानते थे?

यह जानने के लिए कि बुद्ध किस भगवान को मानते थे, हमें उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानना होगा। तो चलिए शुरू करते हैं उनके शुरुआती जीवन से। गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व लुंबिनी में हुआ था, जो नेपाल में स्थित है। उनके पिता का नाम शुद्धोधन था, जो इक्ष्वाकु वंशी क्षत्रिय शाक्य थे। क्षत्रिय कुल में जन्म लेने के कारण यह स्पष्ट है कि गौतम बुद्ध गृह त्याग से पहले सनातन धर्म को मानते थे, जिसे वर्तमान में हिंदू धर्म के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा करने का विधान है। इसमें लोग अपनी आस्था के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। जहां तक भगवान बुद्ध की बात है तो एक किंवदंती है कि भगवान गौतम बुद्ध तारा देवी की आराधना करते थे।

यहां बता दें कि हिंदू धर्म में तारा देवी को 10 महाविद्याओं में से दूसरी महाविद्या माना जाता है। माँ तारा देवी को आदिशक्ति का रूप माना जाता है जो देवी पार्वती का तांत्रिक रूप है। यहां यह उल्लेखनीय है कि हिंदू धर्म में महाविद्या 10 हिंदू तांत्रिक देवियों का एक समूह है। इन महाविद्याओं के नाम आमतौर पर निम्नलिखित क्रम में विभिन्न नामों से जाने जाते हैं: काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला।

29 वर्ष की आयु में गौतम बुद्ध ने सत्य की खोज में अपना घर-परिवार छोड़ दिया। बाद में उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और उन्होंने लोगों को मुक्ति का सरल मार्ग दिखाया, जिसे आज हम बौद्ध धर्म के नाम से जानते हैं। बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के बीच जहां कई समानताएं हैं, वहीं कई अंतर भी हैं। ‌ एक बड़े अंतर की बात करें तो जहां हिंदू धर्म में ब्रह्म (ईश्वर) को पूरे संसार का अंतिम सत्य माना जाता है, वहीं भगवान बुद्ध ने कभी भी ब्रह्म को भगवान नहीं माना।


References:
•https://www.naidunia.com/spiritual/kehte-hain-buddha-were-worshipers-of-the-goddess-tara-920263

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