Ranjeet Bhartiya 09/04/2023
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Last Updated on 09/04/2023 by Sarvan Kumar

भारत के इतिहास को दिशा देने में बंगाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. बंगाल क्षेत्र, वर्तमान में पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश, मौर्य और गुप्त सहित कई प्राचीन भारतीय साम्राज्यों का हिस्सा था. मध्यकालीन भारत में बंगाल में अनेक शक्तिशाली राजवंशों का उदय हुआ, जिनमें पाल वंश, सेन वंश और देव वंश प्रमुख थे. यहां हम जानेंगे कि सेन वंश का अंतिम शासक कौन था.

सेन वंश का अंतिम शासक कौन था?

सेना साम्राज्य (Sena Empire) मध्ययुगीन भारत का एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली हिंदू साम्राज्य था जिसने 1070 ईस्वी से 1130 ईस्वी तक बंगाल पर शासन किया था. इस प्रकार यह वंश लगभग 160 वर्षों तक चला. इस अवधि के दौरान, सेन राजाओं ने भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पूर्वी भाग में एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की. सेन शासकों के शासनकाल में हिंदू धर्म के संरक्षण और उत्थान को बहुत बढ़ावा मिला. सेन राजाओं ने हिंदू धर्म को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण मंदिरों और मठों का निर्माण किया. बंगाली साहित्य को समृद्ध बनाने में सेन राजाओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी. सेन वंश की स्थापना सामंत सेन ने की थी, जो इस वंश का पहले शासक थे. सामंत सेन के बाद हेमंत सेन राजा बने. हेमंत सेन की मृत्यु के बाद उनका पुत्र विजय सेन राजा बना. विजय सेन इस राजवंश के पराक्रमी राजा थे जिन्होंने अपने पिता के छोटे से राज्य को एक विशाल साम्राज्य में बदल दिया. विजय सेन के बाद बल्लाल सेन, लक्ष्मण सेन, विश्वरूप सेन आदि इस वंश के प्रमुख राजा हुए. कालांतर में यह वंश कई कारणों से कमजोर होता गया जिससे इसका पतन हो गया. लक्ष्मण सेन (द्वितीय) के शासनकाल में इस राज्य वंश की स्थिति में भारी गिरावट आई. लोगों के मन में देशभक्ति का जज्बा खत्म हो गया. अकुशल और असक्षम नेतृत्व के कारण राज्य में अराजकता व्याप्त हो गई. सेन वंश सैन्य रूप से कमजोर हो गया. लक्ष्मणसेन ने तुर्कों के अनुसार अपनी सेना में कभी सुधार नहीं किया और अंततः मुस्लिम आक्रमण भी इस वंश के पतन का एक प्रमुख कारण बना. लक्ष्मण सेन इस वंश के अंतिम शासक थे.


References:

•Raj Kumar (2003). Essays on Medieval India. p. 340. ISBN 9788171416837.

•Sen, Sailendra (2013). A Textbook of Medieval Indian History. Primus Books. pp. 35–36. ISBN 978-9-38060-734-4.

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