Last Updated on 28/06/2023 by Sarvan Kumar
हिंदू संस्कृति में, ब्राह्मणों को वर्ण व्यवस्था के चार प्रमुख सामाजिक वर्गों में से एक वर्ग के रूप में वर्णित किया गया है. जबकि अन्य 3 वर्ग हैं- क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र. हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों जैसे वेद, मनुस्मृति, धर्म शास्त्र, उपनिषद, भगवद गीता और महाभारत आदि में वर्ण व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई है और वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसी क्रम में हम यहां जानेंगे कि ब्राह्मणों के पूर्वज कौन थे.
ब्राह्मणों के पूर्वज कौन थे
विभिन्न ग्रंथों के अनुसार ब्राह्मणों के पूर्वजों (ancestors of Brahmins) के बारे में निम्नलिखित बातों का उल्लेख मिलता है-
•ब्रह्मा
ऋग्वेद के एक मन्त्र में वर्ण व्यवस्था का उल्लेख किया गया है जो इस प्रकार है-
ब्राह्मण: ब्रह्मस्य मुखमासीद्वाहू राजन्यः कृतः।
अरूः तदस्य यद्धेश्यः पदभ्या शूद्रो अजायत् ।।
इस मंत्र का अर्थ यह है कि ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, जंघाओं से वैश्य और पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए. इस प्रकार ब्राह्मण समेत सभी वर्णों की उत्पत्ति ब्रह्मा से होने के कारण सभी ब्रह्मा के वंशज हैं. अर्थात भगवान ब्रह्मा ब्राह्मणों के पूर्वज हैं.
•सप्तर्षि
ऋग्वेद में कहा गया है कि ब्राह्मण समुदाय वैदिक युग के प्रथम सात ब्राह्मण संतों (सप्तऋषि) के वंशज हैं. अर्थात सप्तऋषि ब्राह्मणों के पूर्वज हैं. हिन्दू धर्म अनुसार मानवता के प्रजनक मनु की आयु या अवधि को मन्वन्तर कहा जाता है. प्रत्येक मन्वंतर (एक मनु की अवधि) में, सात ऋषि, कुछ देवता, एक इंद्र और एक मनु, और राजा, उनके पुत्र पैदा होते हैं और नष्ट हो जाते हैं. विभिन्न ग्रंथों में सप्त ऋषि के नाम पर भिन्न-भिन्न नामावली मिलती है. शतपथ ब्राह्मण और बृहदारण्यक उपनिषद (2.2.4) के अनुसार सप्तर्षियों के नाम इस प्रकार हैं- भारद्वाज, गौतम, जमदग्नि, काश्यप, वशिष्ठ और विश्वामित्र.
•गोत्र
एक गोत्र किसी ऋषि के व्यक्तिगत वंशावली का प्रतिनिधित्व करता है. एक ब्राह्मण का गोत्र दर्शाता है कि इनमें से कौन से ऋषि उसके पूर्वज थे. उदाहरण के लिए, कश्यप गोत्र के ब्राह्मण कश्यप ऋषि के वंशज माने जाते हैं. प्रारम्भ में सात ऋषियों के आधार पर सात गोत्रों का का निर्माण हुआ. हालाँकि, समय के साथ, जैसे-जैसे ब्राह्मण जाति का विस्तार हुआ, कई और ब्राह्मण गोत्र अस्तित्व में आए. महाभारत में 18 ब्राह्मण गोत्रों के अस्तित्व का संकेत मिलता है. वहीं, विष्णु पुराण में विभिन्न ऋषियों के नाम पर 49 से अधिक ब्राह्मण गोत्रों का संकेत मिलता है.
References:
•Kosambi 1953, p. 203.
•Brough 2013, p. 34.
•Brough 2013, p. 52.
