Sarvan Kumar 06/04/2020

5 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर देश के करोड़ों लोगों ने 9 बजे 9 मिनट तक सांकेतिक प्रकाश फैलाया। यह सांकेतिक प्रकाश उन वीर कोरोना फाइटर्स के हौसला अफजाई के लिए था जो अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए कोरोना संक्रमित लोगों की जान बचाने में लगे हुए हैं। हमारे देश के कुछ लोग मोदी विरोध में पूरी तरह से अंधे हो चुके हैं। तर्क या यूं कहिए कुतर्क देकर इस सांकेतिक प्रकाश उत्सव की भी खामियां निकालकर विरोध में उतर आएं है।

इन लोगों की कुतर्क बातों को सुनकर हंसी, गुस्सा, और उदासी जैसे कई भाव एक साथ मन में उभर आता है। वे कहते हैं कि पूरी दुनिया संकट में है और हम उत्सव मना रहे हैं। विरोध में अंधे हुए ये लोग मोदी को गाली देते हैं, पुतले जलाते हैं और पूछते हैं -क्या दिया जलाने से कोरोना भाग जाएगा। यह आयोजन खुशी का नहीं था यह कोरोना भगाने के लिए या कोरोना को डराने के लिए नहीं था। यह आयोजन पुलिस, मीडिया , चिकित्सक और ऐसे दूसरे कर्मचारियों के लिए था जो घर से बाहर निकलकर हमारी अलग -अलग तरीकों से मदद करने में लगें हैं। यह आयोजन ठीक उसी तरह से था जैसे युद्ध के समय हम अपने जवानों के लिए तालियाँ बजाकर या कविता पाठ कर उनके हौसला अफजाई करतें हैं। यह उस तरह से भी है जैसे कोई दुर्घटना हो जाने पर हम मोमबत्ती जलाकर सांकेतिक प्रकाश फैलाते हैं। क्या हम ऐसा खुशी से करते हैं, यह हम जागरूकता फैलाने और सरकार तक अपनी माँग पहुंचाने के लिए करतें हैं। हम अपनें घरों में बंद हैं और हम अपनी ही मदद कर रहे हैं। जरा उन लोगों के बारे में सोचिए जो घर से बाहर हैं और अलग अलग तरह से हमारी मदद कर रहें है। अस्पतालों में काम करने वाले डाक्टर, नर्स, और दूसरे कई मेडिकल स्टाफ अपनी जान की परवाह न करते हुए कोरोना मरीजों के देखभाल करनें में लगें हैं। अभी दिल्ली से एक खबर आई है की 100 से ज्यादा मेडिकल स्टाफ को क्वारनटीन किया गया है।

एक पुलिस वाले की विडियो वायरल हुई जिसमें वह अपने ही घर के बाहर खाना खा रहा है। वह घर के अंदर इसलिए नहीं जा रहा क्योंकी इससे घर के सदस्यों मे कोरोना संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। सब्जी वाला, दूधवाला, राशन वाला सफाई कर्मचारी ऐसे कई लोग जो इस लाॅक डाउन में हमारी मदद कर रहें है यह सांकेतिक प्रकाश उत्सव उन लोगों के लिए है। हमें इनके प्रति आदर और सम्मान होना चाहिए। हमें इनका ऋणी होना चाहिए।बजाए इसके हम विरोध में उतरे हुए हैं। अगर हम इन कोरोना फाइटर्स के लिए कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम हौसला अफजाई तो कर ही सकते हैं।

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